पुलिस पदाधिकारी के विरूद्ध दिया एसपी को आवेदन

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पुलिस पदाधिकारी के विरूद्ध दिया एसपी को आवेदन मरने से पूर्व दिया गया बयान को पुलिस ने झुठलाया, अनुसंधान में आरोपी का नाम हटाया, फोटो-9 कैप्सन-एसपी से फरियाद करने पहुंची महिला प्रतिनिधि, कटिहार पूनम खातून की मां कैली खातून पति शेख दलीमुद्दीन अमदाबाद निवासी ने अपने मृतक पुत्री पूनम की हत्या के आरोपी को सजा […]

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पुलिस पदाधिकारी के विरूद्ध दिया एसपी को आवेदन मरने से पूर्व दिया गया बयान को पुलिस ने झुठलाया, अनुसंधान में आरोपी का नाम हटाया, फोटो-9 कैप्सन-एसपी से फरियाद करने पहुंची महिला प्रतिनिधि, कटिहार पूनम खातून की मां कैली खातून पति शेख दलीमुद्दीन अमदाबाद निवासी ने अपने मृतक पुत्री पूनम की हत्या के आरोपी को सजा दिलाने को लेकर एसपी डॉ सिद्धार्थ मोहन जैन को आवेदन दिया है. आवेदन में कैली ने दर्शाया है कि अमदाबाद थाना में दर्ज कांड संख्या 100/15 के नामजद अभियुक्त में मात्र पुलिस ने मृतक के पति खुशनसीब को गिरफ्तार कर जेल भेजा है. शेष आरोपी शेख बबलू, शेख कालो खातून, हीरवा जिरवा पिता मुस्ताख का नाम अनुसंधान के क्रम में हटा दिया गया है. जिसमें मृतका पूनम की मां कैली ने एसडीपीओ मनिहारी व कांड के आइओ के विरुद्ध आवेदन दिया कि आरोपी के मेल में आकर पुलिस ने अनुसंधान के क्र म में नामजद आरोपी का नाम हटाया गया है. अब यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि अनुसंधान के सही तथ्य के आधार पर नाम हटाया गया कि महिला का आरोप सत्य है. हत्या की वजह अवैध संबंधमृतका पूनम खातून की मां ने ससुराल वालों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी पुत्री पूनम को ससुराल वालों ने अगस्त माह में उसे जमकर पीटा. उसकी पिटाई इतनी निर्ममता से की थी कि उसके हाथ भी टूट गया था. फिर उसे पीटकर आग के हवाले कर दिया था. जिसमें वह गंभीर रूप से झुलस गयी थी. जिसे इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सदर अस्पताल में भरती कराया गया था जहां इलाज के क्रम में पूनम ने अपनी सास ससुर, देवर व पति को नामजद किया था. जिसमें पुलिस ने पति खुशनसीब को गिरफ्तार कर अन्य सभी के नाम अनुसंधान से हटा दिया है. वहीं पूनम की हत्या की वजह उसके ससुराल में पूनम ने उसके ससुराल पक्ष के लोगों में से एक को अवैध संबंध में देख लिया था. जिस कारण सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या कर दी गयी. फिर पुलिस के एक अधिकारी व अनुसंधान कर्ता ने किस प्रकार पूनम के बयान को अनुसंधान में एक दूसरा मोड़ दिया. जिसमें पति को न्यायिक हिरासत में लेकर सास, ससुर, देवर व अन्य के अभियुक्त का नाम अनुसंधान में हटा दिया गया है. अब सवाल यह उठता है कि एक पुलिस अधिकारी व जांच करता ऐसा किस प्रकार कर सक ते है. क्या पुलिस एक मृतक के प्रति भी अच्छी सोच नहीं रख सकती है. कहते हैं एसपीकांड से नाम हटाने को लेकर एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन ने बताया कि अगर पूनम चिकित्सक के सामने यह बयान दी थी. वह डायिंग डिकिलरेशन है कोर्ट इस आधार पर सभी को सजाए मौत का अधिकार रखती है. अगर पुलिस के समक्ष दी है तो यह समान्य बयान होगा. जिसकी जांच व अनुसंधान में जो तथ्य सामने आयेंगे वही पुलिस चार्ज करेगी. अगर मामले में मृतका का बयान तथा उसके गवाह मृतका के बयान के पक्ष में हुआ है. जिसमें अनुसंधान अधिकारी व वरीय अधिकारी बावजूद कांड से आरोपी का नाम हटा दिया है तो वह गलत है. इसके लिए जांच करायी जायेगी.

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