25 से अधिक ग्राम पंचायत को मिल सकता है नगर पंचायत का दर्जा

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25 से अधिक ग्राम पंचायत को मिल सकता है नगर पंचायत का दर्जा प्रतिनिधि, कटिहारवर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 12 हजार से ऊपर जनसंख्या वाले ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाया जा सकता है. जिले के पच्चीस से अधिक ऐसे ग्राम पंचायत हैं, जो नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं. सरकार […]

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25 से अधिक ग्राम पंचायत को मिल सकता है नगर पंचायत का दर्जा प्रतिनिधि, कटिहारवर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 12 हजार से ऊपर जनसंख्या वाले ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत बनाया जा सकता है. जिले के पच्चीस से अधिक ऐसे ग्राम पंचायत हैं, जो नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं. सरकार ने इसके लिए सभी जिला पदाधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा है कि वे इस संदर्भ में समीक्षा कर प्रतिवेदन समर्पित करें. जिले के कई ऐसे प्रखंड क्षेत्र हैं जिनमें अब भी बारह हजार की आबादी उसके एक ग्राम पंचायत में नहीं आती है.अब तक जिले में कितने नगरीय क्षेत्र हैंजिले के 16 प्रखंड क्षेत्रों में तीन प्रखंड क्षेत्रों में पूर्व से ही नगरीय क्षेत्र घोषित किये जा चुके हैं. जिनमें कटिहार नगर निगम, नगर पंचायत मनिहारी एवं पिछले वर्ष घोषित किये गये नगर पंचायत बारसोई शामिल है. जिसमें कटिहार नगर निगम सबसे पुराने नगरीय क्षेत्र है. नगर पंचायत घोषित करने का क्या है आधारबिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 में यह प्रावधान किया गया है कि जिन ग्राम पंचायतों की आबादी बारह हजार से उपर जनसंख्या वाले क्षेत्र हैं, उसे छोटा शहरी क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत कर नगर पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है. नगर पंचायत घोषित होने पर वहां नगर विकास एवं आवास विभाग के नियंत्राणाधीन विभिन्न वार्डों का गठन किया जायेगा. जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित विभिन्न पदों का सृजन किया जायेगा एवं नगर पंचायत की अपनी योजनाएं एवं नगरीय क्षेत्र को सुविधा प्रदान करने का अधिकार होगा. किन-किन ग्राम पंचायतों को घोषित किया जा सकता है नगर पंचायतजिले के विभिन्न प्रखंडों के पच्चीस से अधिक ग्राम पंचायतों के मिल सकता है नगर पंचायत का दर्जा. जिनमें प्राणपुर प्रखंड के लालगंज, कटिहार प्रखंड के दलन एवं सिरनियां, बरारी प्रखंड के सुखासन, मोहनाचांदपुर, विशुनपुर, बरारी, बारीनगर, समेली प्रखंड के चांदपुर एवं मुरादपुर, कुरसेला प्रखंड के मुरादपुर, मनिहारी प्रखंड के कुमारीपुर, कांटाकोश, बौलिया एवं दिलारपुर, अमदाबाद प्रखंड के करिमुल्लापुर एवं अमदाबाद, फलका प्रखंड के सोहथा, कोढ़ा प्रखंड के मुसापुर, खेरिया, सिमरिया के अलावा कदवा प्रखंड के कुम्हड़ी, गेठौरा, मनसाही के चितौरिया आदि ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने की संभावनाएं प्रबल है. इनमें कई पंचायतें प्रखंड मुख्यालय के क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण उनकी आबादी ग्राम पंचायत के दृष्टिकोण से बारह हजार से अधिक है. नगर पंचायत बनने से विकास के मार्ग होंगे प्रशस्तबारह हजार से अधिक आबादी वाले ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने पर वहां सड़क, बिजली, नाली की सुविधा, साफ-सफाई की व्यवस्था इत्यादि नगर पंचायत की ओर से की जायेगी. जिसके लिए होल्डिंग टैक्स का भी प्रावधान किया जायेगा. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने निर्मित पक्का मकान के बाबत शुल्क का भुगतान भी करना होगा. ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों में दिखेगा आक्रोशऐसे ग्राम पंचायत जिसे कि नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने की संभावना प्रबल हो गयी है. वहां के जनप्रतिनिधियों में विशेष आक्रोश देखा जा सकता है. चूंकि अब तक एक ग्राम पंचायत का मुखिया, उपमुखिया एवं सरपंच, उप सरपंच का पूर्ण अधिकार होता था. इनके अधिकारों में शत प्रतिशत सेंधमारी कर नये जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सामने आयेगी. इनके राजनीतिक सफर के सीमित होने के कारण इनकी ओर से कभी भी नगर पंचायत बनने में सार्थक कदम नहीं उठायेंगे. जहां एक ओर नये नगर पंचायत को अपना नगर भवन होगा, उनकी योजनाएं अपनी होगी. नये नेतृत्व भी विकसित होंगे, ऐसे में पूर्व के जनप्रतिनिधियों की मार्केटिंग भी खत्म हो जायेगी. पिछले वर्ष मिला बारसोई को नगर पंचायत का दर्जाबीते वर्ष सितंबर माह में बारसोई में नये नगर पंचायत बनाये जाने की अधिसूचना नगर एवं विकास विभाग द्वारा जारी की गयी. हालांकि बारसोई को नये नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त करवाने में पूर्व मंत्री दुलाल चंद्र गोस्वामी का पूर्ण रूप से सहयोग था. फलस्वरूप एक भी ग्राम पंचायत की आबादी बारह हजार की आंकड़ा को नहीं प्राप्त होने के बावजूद भी अन्य ग्राम पंचायतों को मिला कर उनकी आबादी का आंकड़ा दिखाया गया. जिसमें बारसोई के रघुनाथपुर, मौलानापुर, भाग बारसोई, सुलतानपुर एवं डकैत पूजा को मिला कर नगर पंचायत बारसोई का दर्जा प्राप्त करवाया गया. लेकिन अब तक इस अधिसूचना के जारी होने के बावजूद नगर पंचायत के रूप में बारसोई में कार्य नहीं होने से लोगों में आक्रोश है. बारसोई के आधार पर कई प्रखंड मुख्यालयों के दावे हो सकते हैं नयेआबादी के अनुसार बारसोई प्रखंड क्षेत्र में निश्चित आबादी नहीं होने के कारण अब तक बारसोई को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ लेकिन जुगाड़ टेक्नोलॉजी कहीं भी उद्देश्यों की प्राप्ति की पूर्ति करने में पीछे नहीं होती है. इसका जीता जागता उदाहरण बारसोई को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने में दिखा. बारसोई के आधार पर कई अन्य प्रखंड मुख्यालयों के विभिन्न पंचायतों की आबादी को जोड़ कर एक नगर पंचायत का दर्जा दिया जा सकता है. जिस प्रकार डंडखोरा, बलरामपुर, आजमनगर एवं हसनगंज में एक भी ग्राम पंचायत ऐसे नहीं हैं, जो निर्धारित बारह हजार के जनसंख्या की आबादी को पार करता हो. किन नेताओं में कितना दम अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले विभिन्न ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत के रूप में दर्जा प्राप्त करवाने में किन नेताओं का किस स्तर तक प्रयास होगा, यह भविष्य ही बतायेगा. क्योंकि उनके लिए एक तरफ कुंआ तो दूसरी तरफ खाई के समान होगी. एक तरफ उन्हें मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की कोपभाजन का शिकार होना पड़ेगा तो दूसरी ओर ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को प्रत्येक स्तर पर समझाना पड़ेगा कि क्यों नहीं उनके ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त हो सके.

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