रक्शिा तो दूर, पैदल चलना भी हुआ मुश्किल

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रिक्शा तो दूर, पैदल चलना भी हुआ मुश्किल शहर के चकबंदी रोड में क्षतिग्रस्त पीसीसी सड़क से आवागमन में हो रही परेशानी दोबारा बनाने के आश्वासन पर नगर पर्षद ने तोड़ी थी सड़क प्रतिनिधि, भभुआ (सदर) शहर के चकबंदी रोड में क्षतिग्रस्त हो चुके सड़क से आम लोगों को रिक्शा व वाहन से जाना तो […]

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रिक्शा तो दूर, पैदल चलना भी हुआ मुश्किल शहर के चकबंदी रोड में क्षतिग्रस्त पीसीसी सड़क से आवागमन में हो रही परेशानी दोबारा बनाने के आश्वासन पर नगर पर्षद ने तोड़ी थी सड़क प्रतिनिधि, भभुआ (सदर) शहर के चकबंदी रोड में क्षतिग्रस्त हो चुके सड़क से आम लोगों को रिक्शा व वाहन से जाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. उक्त पीसीसी सड़क के बीचोबीच बनी नाली से आये दिन मुहल्ले के लोग गिर कर घायल होते हैं. चकबंदी रोड में उक्त सड़क अधिवक्ता रामेश्वर पाठक के घर के पास से अखिलेश चौरसिया के घर तक नप द्वारा चार वर्ष पूर्व बनवायी गयी थी. लोगों का कहना है कि चार माह पूर्व जब बरसात के महीने में सड़क के बीच बना नाला जाम हो गया, तो उसे नगर पर्षद द्वारा तोड़वा दिया गया था. इस दौरान नप द्वारा आश्वासन भी दिया गया था कि बरसात बाद इसकी पुन: मरम्मत करा दी जायेगी, लेकिन नगर पर्षद की उदासीनता से सड़क आज भी उसी हाल में है. समय बीतने के साथ स्थिति और भयावह हो चुकी है. उक्त मुहल्ले के सैकड़ों लोगों का प्रतिदिन आना-जाना है, लेकिन लोगों की इस समस्याओं पर नगर पर्षद द्वार ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मुहल्ले के रहनेवाले रामेश्वर सिंह व शिवपूजन यादव आदि का कहना था कि बीच सड़क पर नाली होने के चलते आये दिन कोई न कोई इसमें गिर जा रहा है. उनका कहना था कि नाते-रिश्तेदार अगर वाहन लेकर मिलने या किसी घरेलू आयोजन में आते हैं, तो उन्हें मोबाइल से मुख्य सड़क पर ही रूक जाने को कहना पड़ता है, ताकि कोई घटना न हो. वार्ड की महिला गीता देवी व संध्या पांडेय ने कहा कि टूटी सड़क से वाहन तो दूर रिक्शा चालक भी अंदर तक आने से डरते हैं. यहां तक कि नाली में गिरने के डर से बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए मुख्य सड़क तक साथ लेकर जाना पड़ता है. जल्द ही होगा निर्माण कार्यचकबंदी रोड में क्षतिग्रस्त सड़क व लोगों की परेशानी पर नगर पर्षद अध्यक्ष बजरंग बहादुर सिंह उर्फ मलाई सिंह ने बताया कि उक्त सड़क के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी उन्हें नहीं थी. जल्द ही उक्त पीसीसी सड़क का डीपीआर बना कर उसकी मरम्मत या फिर जरूरत पड़ने पर उसका नया निर्माण कराया जायेगा.लोगों की परेशानी लोग अंदर तक रिक्शा लेकर जाने का दबाव डालते हैं, लेकिन सड़क इतनी क्षतिग्रस्त है कि अंदर तक रिक्शा लेकर जाने में डर लगा रहता है. इबरार अंसारी, रिक्शा चालक सबसे अधिक परेशानी बीमार होने या फिर प्रसव के दौरान अस्पताल ले जाने के लिए होती है. सड़क टूटी होने से कोई भी वाहन इधर नहीं आता. पैदल ही मरीजों को मुख्य सड़क पर लेकर जाना पड़ता है. जामवंती देवी, गृहणी जब सड़क को दुबारा बनाना ही नहीं था तो नगर पर्षद ने इसको तोड़वाया ही क्यों ? आम लोग सड़क के चलते परेशानी झेलने को मजबूर हैं, लेकिन नगर पर्षद को अब अपना दिया हुआ आश्वासन भी याद नहीं रहा. वीरेंद्र सिंह, चिकित्सकफोटो:-3. बदत्तर बना गली 4. रिक्शावान -इबरार अंसारी,मुहल्लेवासी वीरेंद्र सिंह, जामवंती देवी

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