गंडक की धारा तोड़ने के लिए बनेंगी 51 सीटें

Published at :24 May 2016 6:44 AM (IST)
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गंडक की धारा तोड़ने के लिए बनेंगी 51 सीटें

राहत . साल-दर-साल आने वाली बाढ़ से मुक्ति दिलाने की पहल शुरू सीट बनते ही नदी की धारा को मोड़ने में मिलेगी सफलता गंडक नदी में हर साल आनेवाली बाढ़ से बचाव के लिए सरकारी स्तर पर हर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं. जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार, पथ निर्माण विभाग […]

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राहत . साल-दर-साल आने वाली बाढ़ से मुक्ति दिलाने की पहल शुरू

सीट बनते ही नदी की धारा को मोड़ने में मिलेगी सफलता
गंडक नदी में हर साल आनेवाली बाढ़ से बचाव के लिए सरकारी स्तर पर हर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं. जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार, पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिवों की टीम ने पतहरा में मुआयना किया.
गोपालगंज : गंडक नदी की बाढ़ से बचाने के लिए सदर प्रखंड के पतहरा तटबंध पर 51 सीटें बनाने का निर्णय लिया गया है. सीट को 15 जून के पहले बना कर तैयार करने का निर्देश दिया गया है. सीट गंडक नदी की धारा के वेग को तोड़ने का काम करेगी. धारा टूटते ही तटबंध पर होनेवाले कटाव को रोकते हुए नदी की धारा को मोड़ने में सहायक होगा. इस धारा के टूटते ही नदी का वेग कमजोर होगा, जिससे जान-माल को बचाया जा सकेगा.
बता दें कि वर्ष 2009 से ही गंडक नदी पतहरा में प्रशासन और सरकार के लिए टेंशन बनी है. यहां नदी का सीधा दबाव तटबंध पर है. इसके पीछे विशेषज्ञों का मानना है कि गंडक नदी पर बनाये गये महासेतु को जोड़ने के लिए 18.2 किमी उत्तर से एप्रोच रोड बनाया गया, जिससे नदी का मुहाना महज दो किमी रह गया.
इस एप्रोच रोड में तीन नदी के सहायक नदियों का मुहाना भी बंद कर दिया गया, जिससे नदी का दबाव सीधा गोपालगंज की तरफ हो गया. विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद बंद की गयी सहायक नदियों के मुहाने को पिछले वर्ष खोला गया. लेकिन, अब भी बेतिया क्षेत्र में पड़नेवाले एक मुहाने को नहीं खोला जा सका है. अब सरकार स्तर पर इस तीनों सहायक नदियों के मुहाने को साफ करने का निर्देश दिया गया है.
ड्रेनेज के लिए मशीन लगातार काम कर रही
पायलट चैनल की शुरू हो गयी सफाई
गंडक नदी की धारा को मोड़ने के लिए पायलट चैनल को ड्रेनेज कर साफ करने का काम शुरू हो गया है. ड्रेनेज के लिए मशीन लगातार काम कर रही है. नदी की मुख्य धारा से चैनल को जोड़ने के लिए ड्रेनेज कर शिल्ट की सफाई की जा रही है, ताकि नदी की धारा को पायलट चैनल में जोड़ा जा सके.
पतहरा तटबंध पर सीट बनाने की मिली मंजूरी
जेसीबी के अलावा तैनात होगी अत्याधुनिक मशीन
पतहरा तटबंध पर क्रेन, जेसीबी के अलावा मोटर, ड्रेनेज मशीन तैनात होगी. बाढ़ अवधि में भी नदी के शिल्ट की सफाई करने के लिए मशीन को लगा कर रखा जायेगा, ताकि किसी तरह की स्थिति पर बांध और गांव को बचाया जा सके. बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता शरत कुमार की मानें, तो 15 जून तक बचाव के कार्यों को पूरा करने के साथ ही एप्रोच रोड को भी दुरुस्त कर लिया जायेगा, ताकि बाढ़ अवधि में परेशानी न हो.
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