बैंकों का खजाना हो रहा है खाली!

Published at :23 Apr 2016 6:57 AM (IST)
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बैंकों का खजाना हो रहा है खाली!

चिंता. बैंक से निकलने वाली राशि महज 22 फीसदी ही हो रही वापस शादी विवाह के इस सीजन में परदेशी भी गांव में पहुंच चुके हैं. इन दिनों बैंकों में समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण परदेशी ग्राहकों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. बैंकों से निकलने वाली राशि भी चिंता का विषय […]

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चिंता. बैंक से निकलने वाली राशि महज 22 फीसदी ही हो रही वापस
शादी विवाह के इस सीजन में परदेशी भी गांव में पहुंच चुके हैं. इन दिनों बैंकों में समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण परदेशी ग्राहकों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. बैंकों से निकलने वाली राशि भी चिंता का विषय है. बैंक से निकलने वाली राशि लौट कर पुन: नहीं आ रही, यह चिंता का विषय है.
संजय कुमार अभय
गोपालगंज : यह बात चौकाने वाली है, लेकिन सोलह आने सच है. बैंक का खजाना तेजी से खाली हो रहा है. करेंसी के अभाव में ग्राहकों को घंटों बैंक में लाइन लगा कर इंतजार करना पड़ रहा है. इसके पीछे का सच आपको भी परेशान कर देगा. गोपालगंज के विभिन्न बैंकों से लगभग 500 करोड़ रुपये की निकासी प्रति महीने हो रही है. बैंक से निकलने वाली राशि आमतौर पर मार्केट से घूमते हुए पुन: बैंक में आनी चाहिए, जो गोपालंज में नहीं हो रही. महज 22 फीसदी राशि बैंक को वापस लौट रही. बैंक से निकलने वाली राशि आखिर कहां जा रही.
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार सिंह का मानना है कि बैंक से निकलने वाली राशि में से कम से कम 70 प्रतिशत राशि किसी माध्यम से बैंकों में वापस लौटना चाहिए. गोपालगंज में पिछले दो वर्षों से यहां स्थिति विपरीत है. 22 फीसदी राशि ही वापस लौट रही है.
हवाला के कारोबारियों का खेल तो नहीं : बैंक से निकलने वाली मोटी रकम आखिर कहां जा रही यह प्रशासन और सरकार के लिए भी चिंता का विषय है. हवाला से जुड़े कारोबारी विदेशों से कही मोटी रकम मंगा कर दूसरे प्रदेशों में नोटों की खपत तो नहीं कर रहे. बैंक भी इस बिंदु पर मथन कर रहा कि आखिर उतनी राशि कहा जा रही. वैसे तो पूरे राज्य में गोपालगंज में सर्वाधिक विदेशी करेंसी बैंकों को प्राप्त होता है. यहां के लगभग 96290 युवा विभिन्न देशों में काम करते हैं. विदेश से जुड़े साइबर अपराधियों का नेटवर्क भी यहां मजबूत है, जो जांच का विषय बना हुआ है.
ग्राहकों को लगानी पड़ रही लंबी कतार : बैंक से भुगतान लेना भी काफी मुश्किल दिख रहा है. डिमांड के अनुरूप बैंक भुगतान नहीं कर पा रहा. इसके कारण ग्राहकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा. ग्राहकों को भुगतान नहीं मिलने से शादी-विवाह, इलाज एवं आवश्यक काम भी छूट जा रहा है, जिससे ग्राहक बैंकों को कोसने पर विवश है. मुंबई-दिल्ली और बड़े शहरों में रहने वाले लोग गांव पहुंचे हैं. पैसा तो वे बड़े शहरों में जमा किया है, सिर्फ निकासी यहां कर रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
एटीएम हड़ताल के कारण बंद हैं. जब तक हड़ताल समाप्त नहीं होती तब तक जो एटीएम हैं उसी से काम चलाना होगा. पैसे की कमी है, लेकिन उसे किसी तरह मैनेज किया जा रहा है.
अजय कुमार सिंह, मुख्य शाखा प्रबंधक, स्टेट बैंक
हड़ताल के कारण 22 एटीएम में लटके ताले
स्टेट बैंक से जुड़ी प्राइवेट एजेंसी बीएलए जिले की 22 एटीएम की देखभाल करती है. यानी इस एटीएम की जिम्मेवारी इस कंपनी को है. इस कंपनी के कर्मी पिछले चार अप्रैल से हड़ताल पर हैं.
हड़ताल पर जाने के कारण 22 एटीएम शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बंद पड़े हैं, जिसके कारण ग्राहकों का लोड महज चंद एटीएम पर है. एकाद एटीएम को छोड़ दे तो दावा 24 घंटे सेवा उपलब्ध का किया जाता है, लेकिन बैंक बंद होने के साथ एटीएम खुलती और बंद होती है. बीच में भी पैसा खत्म हो जाये तो शटर गिरा दिया जाता.
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