ग्रामीण जलापूर्ति पर पांच साल में खर्च होगा 35 हजार करोड़
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Dec 2015 6:32 PM
ग्रामीण जलापूर्ति पर पांच साल में खर्च होगा 35 हजार करोड़तीन स्तरीय योजना पर होगा कामसंवाददाता,पटनाग्रामीण इलाके में जलापूर्ति व्यवस्था पर पांच साल में लगभग 35 हजार करोड़ खर्च होगा. घर-घर शुद्ध पानी पहुंचाने का काम तीन स्तरीय होगा. सरकार के सात निश्चय में घर-घर पेयजल पहुंचाना प्राथमिकता सूची में है. राज्य में सबके लिए […]
ग्रामीण जलापूर्ति पर पांच साल में खर्च होगा 35 हजार करोड़तीन स्तरीय योजना पर होगा कामसंवाददाता,पटनाग्रामीण इलाके में जलापूर्ति व्यवस्था पर पांच साल में लगभग 35 हजार करोड़ खर्च होगा. घर-घर शुद्ध पानी पहुंचाने का काम तीन स्तरीय होगा. सरकार के सात निश्चय में घर-घर पेयजल पहुंचाना प्राथमिकता सूची में है. राज्य में सबके लिए शुद्ध पेयजल के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार संकल्पित है. गांव में हर घर में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए विभाग के अन्तर्गत चलने वाली विभिन्न योजनाओं पर काम के लिये सभी पहलुओं पर विचार करते हुये क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न मॉडलों का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. जिन इलाके में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है वहां शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए तीन स्तरीय योजना बना कर काम होगा. इसके लिए वृहद जलापूर्ति योजना, मिनी जलापूर्ति योजना व ड्वेल ट्यूब योजना के तहत पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था होगी. विभाग सालाना सात से आठ हजार करोड़ खर्च करेगी. पांच साल में लगभग 35 हजार करोड़ खर्च होगा. योजना के तहत पहले उन गांव को चिंहित किया जायेगा जहां पेयजल का संकट है. खासकर उन इलाके पर विभाग पहले ध्यान देगी जहां पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड व आयरन की मात्रा अधिक है. वहां दूषित जल पीने से लोग कई समस्याओं से जूझ रहे हैं. इन सारे योजनाओं पर 15 जनवरी तक प्रस्ताव तैयार होगा. वृहद जलापूर्ति योजना के तहत विभाग अब वाटर टावर कंसेप्ट को खत्म करने पर विचार कर रही है. इसकी जगह बोरिंग के द्वारा सीधे पाइप से घरों में पानी पहुंचाया जायेगा. विभाग का मानना है कि वाटर टावर के निर्माण से अनावश्यक खर्च बढ़ता है. समय पर वाटर टैंक की सफाई नहीं होने पर लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिलता है. महादलित टोले पर रहेगा फोकसमहादलित टोले में जलापूर्ति व्यवस्था के लिए विभाग का विशेष ध्यान रहेगा. मिनी जलापूर्ति योजना के तहत इन टोले में पाइप से घरों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था होगी. ड्वेल ट्यूब योजना से ऐसी व्यवस्था होगी जिसमें दिन में सोलर ऊर्जा से वाटर पंप चलेगा. रात में वह चापाकल का भी काम करेगा. विभाग इन तीन तरह की योजना पर मंथन कर रही है. विभाग द्वारा यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है कि योजना पर काम में कितनी राशि खर्च होगी. जिस इलाके में पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड व आयरन की मात्रा अधिक है ऐसे इलाके में ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर लोगों को शुद्ध जल पहुंचाने का काम होगा. इसके लिए चापाकल की जगह पाइप से जलापूर्ति होगी. कोटपीएचइडी मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि घर-घर पेयजल आपूर्ति करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. पांच साल में इस लक्ष्य को हासिल करना है. तीन स्तरीय याेजना बना कर घरों में शुद्ध पानी पहुंचाया जायेगा. सरकार की भी यही मंशा है. गरीब व महादलित टोले में विशेष फोकस कर योजना के तहत काम होगा. चापाकल की जगह पाइप से पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर जोर दिया जायेगा. योजना को लेकर प्रस्ताव तैयार हो रहा है. इसके बाद युद्ध स्तर पर काम होगा.
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