तकनीशियन है, पर लैब नहीं

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तकनीशियन है, पर लैब नहींफोटो: सीटी वन व टू, महावीर इंटर कॉलेज व अनुदेशक रामइकबाल प्रसाद.हाल महावीर इंटर कॉलेज व प्लस टू जिला स्कूल के व्यावसायिक पाठ्यक्रम काकोर्स को एनसीवीटी नहीं देती मान्यतासंवाददाता, गयासूबे की सरकार द्वारा स्वरोजगार के लिए हाइस्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम चलाये गये. शुरुआती दौर में इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों ने खूब […]

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तकनीशियन है, पर लैब नहींफोटो: सीटी वन व टू, महावीर इंटर कॉलेज व अनुदेशक रामइकबाल प्रसाद.हाल महावीर इंटर कॉलेज व प्लस टू जिला स्कूल के व्यावसायिक पाठ्यक्रम काकोर्स को एनसीवीटी नहीं देती मान्यतासंवाददाता, गयासूबे की सरकार द्वारा स्वरोजगार के लिए हाइस्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम चलाये गये. शुरुआती दौर में इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों ने खूब रूचि दिखायी. काफी भीड़ रही, लेकिन धीरे-धीरे इसके प्रति सभी का रुझान खत्म होता चला गया. गया में भी महावीर इंटर कॉलेज व प्लस टू जिला स्कूल में कोर्स शुरू किये गये. उसके हिसाब से संसाधन (मानव संसाधन भी) भी लगाये गये. लेकिन, लैब व कुछ संसाधनों की कमी रह गयी. हालांकि, शिक्षक व तकनीशियनों की नियुक्ति कर ली गयी. यह स्थित लंबे तक चली, इसका नतीजा हुआ कि इन कोर्सों का भाव कम हो गया. वर्तमान हालत यह है कि कई कोर्सों में कई वर्षों से एक भी छात्र ने नामांकन नहीं लिया है. गौरतलब है कि 1984 में दोनों जगह युवाओं को स्वरोजगार की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा कोर्स शुरू कराया गया था. दो साल के कोर्स में एक साल अपरेंटिस करना जरूरी है, पर सरकार द्वारा अपरेंटिस की व्यवस्था नहीं की जा सकी. जैसे-तैसे कोर्स करने के बाद प्रमाणपत्र तो मिल जाते हैं, पर स्वरोजगार के लिए किसी तरह की जानकारी नहीं मिल पाती है. 31 वर्ष गुजर जाने के बाद भी कोर्स को एनसीवीटी (नेशनल कौंसिल फोर वोकेशनल ट्रेनिंग) से मान्यता नहीं मिल सकी है. इसके कारण यहां से कोर्स करनेवाले विद्यार्थियों के प्रमाणपत्रों को केंद्र सरकार व बिहार से बाहर किसी अन्य राज्य में मान्यता नहीं मिलती. कभी भर नहीं पाती हैं सीटें प्लस टू जिला स्कूल में एमएलटी (मेडिकल लैब तकनीशियन), ऑफिस मैनेजमेंट व इलेक्ट्रिशियन कोर्स का संचालन किया जाता है. महावीर इंटर कॉलेज में ऑटोमोबाइल्स इंजीनियरिंग, माइनिंग एंड जियोलॉजी व रेडियो एंड टीवी का कोर्स कराया जाता है. दोनों स्कूलों में सभी कोर्सों के लिए 25-25 सीटें निर्धारित हैं. माइनिंग एंड जियोलॉजी, रेडियो एंड टीवी व एमएलटी में एक भी छात्र कई वर्षों से नामांकन नहीं कराया है, जबकि जिला स्कूल में ऑफिस मैनेजमेंट में 10, इलेक्ट्रिशियन में 12 व महावीर कॉलेज में चलनेवाले कोर्स ऑटोमोबाइल्स इंजीनियरिंग में महज आठ विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है.खोला गया स्वरोजगार के लिए, चाहते हैं नौकरीकोर्स की शुरुआत लोगों को स्वरोजगार के लिए की गयी. पर, यहां से कोर्स करनेवाले विद्यार्थी इसके प्रमाणपत्र पर सरकारी नौकरी पाने की लालसा रखने लगे. नौकरी नहीं मिलने के बाद लगभग कोर्स में विद्यार्थियों ने नामांकन कराना बंद कर दिया. कोर्स को एनसीवीटी बोर्ड से मान्यता नहीं मिल सकी है. कोर्स को सुचारु ढंग से चलाने के लिए लैब व अपरेंटिस कराने की व्यवस्था नहीं की जा सकी है. प्राइवेट में एनसीवीटी से मान्यता लेकर कई संस्थानों द्वारा इन कोर्सों में शिक्षण की व्यवस्था की गयी है. इस कारण भी यहां विद्यार्थियों की संख्या कम हो गयी.राम इकबाल प्रसाद, अनुदेशक, महावीर इंटर कॉलेज

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