बरतें एहतियात, नहीं सूखेंगे धान के बिचड़े

गया: जिले के प्रखंडों में धान के बोये गये बिचड़े सूखने लगे हैं. ऐसा कृषि पदाधिकारियों के क्षेत्र भ्रमण के बाद खुलासा हुआ है. किसान भी बिचड़े सूखने की शिकायत लेकर आ रहे हैं. बिचड़े सूखने की बीमारी की शिकायत खेत के किनारे हिस्से से शुरू हो रही है और फिर पूरे खेत में फैल […]
गया: जिले के प्रखंडों में धान के बोये गये बिचड़े सूखने लगे हैं. ऐसा कृषि पदाधिकारियों के क्षेत्र भ्रमण के बाद खुलासा हुआ है. किसान भी बिचड़े सूखने की शिकायत लेकर आ रहे हैं. बिचड़े सूखने की बीमारी की शिकायत खेत के किनारे हिस्से से शुरू हो रही है और फिर पूरे खेत में फैल जा रही है. बिचड़ा ऊपर की तरफ से पीला होकर सूखने लग रहा है. कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी ने किसानों को इससे बचाव व नियंत्रण के कई उपाय सुझाये हैं.
उन्होंने बताया है कि जिन किसानों ने अभी अपने खेतों में बिचड़े तैयार करने के लिए बीज नहीं बोये हैं, वह पहले रसायनों से बीजों को उपचारित करें, फिर उसकी बुआइ खेतों में करें. रसायनों में स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 10 ग्राम बीज की दर से तीन ग्राम, कार्बोडाजिम 50 प्रतिशत-प्रति किलो बीज में दो ग्राम, क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत-प्रति किलो बीज की दर से दो ग्राम मिलाकर बीज खेतों में डालें. इसके अलावा जिन किसानों के खेत में बिचड़े में ऊपरोक्त शिकायत मिल रही है, वह अपने बिचड़े वाले खेत की नमी बनाये रखें.
ऐसी परिस्थिति में खेत में यूरिया व जिंक का प्रयोग कभी न करें. इस तरह की बीमारी से बचाव व नियंत्रण के लिए किसान 14 लीटर पानी में दो ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन नामक बैक्ट्रीया नाशक व 50 ग्राम कॉपर आकसीक्लोराइड 50 प्रतिशत का अविलंब सुबह-शाम बिचड़ों पर छिड़काव करें. अधिकारी ने कहा है कि जब तापमान ज्यादा हो तो खेत में दिन में पानी जमा नहीं होने दें.
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