रेल प्रशासन ने सही जानकारी दी होती, तो नहीं बिगड़ती बात
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 May 2018 7:07 AM (IST)
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गया : रेल प्रशासन यदि यात्रियों के साथ सूचनाओं का समन्वय बना कर रखती तो मानपुर में हुई घटना को टाला जा सकता था. जानकार सूत्रों की मानें तो दानापुर रेल मंडल द्वारा मानपुर कोडरमा के बीच मेगा ब्लॉक लेकर रेल मरम्मती का काम कराया जा रहा था. इस कारण 13023 अप हावड़ा गया एक्सप्रेस […]
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गया : रेल प्रशासन यदि यात्रियों के साथ सूचनाओं का समन्वय बना कर रखती तो मानपुर में हुई घटना को टाला जा सकता था. जानकार सूत्रों की मानें तो दानापुर रेल मंडल द्वारा मानपुर कोडरमा के बीच मेगा ब्लॉक लेकर रेल मरम्मती का काम कराया जा रहा था. इस कारण 13023 अप हावड़ा गया एक्सप्रेस लगभग एक घंटा विलंब से गया रेलवे स्टेशन दोपहर 12.20 बजे पहुंची जबकि इस ट्रेन का 12.20 का टाइम गया से 13024 डाउन गया- हावड़ा बन कर गंत्वय को रवाना होने का है.
मेगा ब्लॉक के कारण इस ट्रेन को छूटने के लिए दानापुर रेल मंडल द्वारा दाेपहर 1.15 बजे समय निर्धारित किया गया जिसे बढ़ा कर 3:00 बजे कर दिया गया. बाद में पुनः खुलने के समय को बढ़ा कर 5:30 बजे किया गया. इस दौरान उक्त ट्रेन पर एक हजार से ज्यादा यात्री सवार थे. भीषण गर्मी से बेहाल यात्रियों ने बराबर रेल प्रशासन से जानकारी लेनी चाहिए कि ट्रेन कब तक छोड़ी जायेगी लेकिन रेल प्रशासन स्पष्ट जानकारी रेल यात्रियों को नहीं दे पा रहा था. दानापुर रेल मंडल ने मानपुर में लिये गये मेगा ब्लॉक को साेमवार की शाम 5:54 बजे रद्द कर दिया.
इसके बाद यह ट्रेन दानापुर रेल मंडल के द्वारा ब्लॉक कार्य को रद्द करते हुए शाम 5:56 बजे खुलने का समय निर्धारित किया गया. ट्रेन को 5:56 बजे प्लेटफार्म से गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया. गया जंक्शन से यह ट्रेन खुल कर शाम 6:07 बजे मानपुर रेलवे स्टेशन पहुंची. उक्त ट्रेन मानपुर में करीब तीन घंटे से अधिक खड़ी रही. इस बीच यात्रियों के सब्र का बांध टूट गया और गुस्सा उबाल मारने लगा और हंगामा शुरू हो गया. यात्रियों के हंगामे की भेंट सियालदह राजधानी एक्सप्रेस चढ़ गयी. उसके ऊपर जबर्दस्त तरीके रोड़ेबाजी की गयी. करीब छह घंटे तक गया कोडरमा रेलखंड के बीच ट्रेनों का परिचालन मध्य रात्रि 00:58 बजे तक पूरी तरह से प्रभावित रहा.
इसके बाद रेल प्रशासन के द्वारा काफी मशक्कत के बाद स्थिति सामान्य हुई. तब जाकर रेल परिचालन शुरू किया गया. जानकारों ने बताया कि रेलवे के पास विशेषज्ञ इंजीनियरों की विशेष टीम होती है. अनुभव के आधार पर यह टीम कौन से मरम्मत कार्य में कितना समय लग सकता है. इस बात का सहजता से अनुमान लगा सकते हैं. बावजूद इसके ट्रेन के खुलने के समय में कई बार बदलाव क्यों किये गये. यह चूक क्यों हुई व किसके स्तर से हुई, इसका खुलासा उच्च स्तरीय जांच के बाद ही हो सकता है.
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