इस साल नहीं हो सका अहल्या गौतम महोत्सव

Updated at :18 Dec 2015 6:51 PM
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इस साल नहीं हो सका अहल्या गौतम महोत्सव

इस साल नहीं हो सका अहल्या गौतम महोत्सवकमतौल. अहल्यास्थान में अक्षय नवमी पर होने वाले अहल्या-गौतम महोत्सव के माध्यम से मालिनी अवस्थी, तृप्ति शाक्या जैसे नामचीन गायक की गायकी के कायल लोग इस वर्ष उदित नारायण को देखने -सुनने के मंसूबे पाल रखे थे. जो विभागीय जिला प्रशासन और न्यास समिति की उदासीनता की भेंट […]

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इस साल नहीं हो सका अहल्या गौतम महोत्सवकमतौल. अहल्यास्थान में अक्षय नवमी पर होने वाले अहल्या-गौतम महोत्सव के माध्यम से मालिनी अवस्थी, तृप्ति शाक्या जैसे नामचीन गायक की गायकी के कायल लोग इस वर्ष उदित नारायण को देखने -सुनने के मंसूबे पाल रखे थे. जो विभागीय जिला प्रशासन और न्यास समिति की उदासीनता की भेंट चढ़ रही है. 27-29 दिसंबर को अहल्या-गौतम महोत्सव की प्रस्तावित तिथि पर शुक्र वार तक अधिकारिक रूप से मुहर नहीं लगने से लोगों का उत्साह बढ रही गुलाबी ठंढ के साथ ठंडा पड़ने लगा है. परन्तु महोत्सव की याद को तरोताजा करने के लिए लोग जिला प्रशासन और न्यास समिति पर भी अंगुली उठाने से बाज नहीं आते. लोगों द्वारा आपस में किये जाने वाले सवाल-जबाब तथा विभागीय स्तर पर पत्राचार किये जाने और राशि आने पर दूसरी तिथि निर्धारित किये जाने की चर्चा से छन कर आने वाली आवाज इस बात की ओर इशारा करते है, की इस वर्ष 2015 में महोत्सव आयोजित होने के आसार कम ही नजर आ रहे है. न्यास से जुडे सूत्रों की मानें तो पत्राचार के बाद राशि निर्गत हो भी गया, तो नये वर्ष में ही महोत्सव का आयोजन संभव हो सकेगा. हालाकि जिला प्रशासन पत्राचार और न्यास समिति किसी तारणहार के भरोसे इसी वर्ष महोत्सव आयोजित करवाने की जुगाड़ में लगा है.अग्रहन विवाह पंचमी पर धार्मिक तीर्थ स्थल में शुमार अहल्यास्थान में ग्रामीणों के सहयोग और सिया-पिया निवास के महंत बजरंगी शरण के प्रयास से प्रतिवर्ष होने वाले सीता-राम विवाहोत्सव के सफल आयोजन के बाद गुरूवार से स्थानीय तथा आसपास के गांव में अक्षय नवमी पर होने वाले राजकीय महोत्सव का दर्जा प्राप्त अहल्या-गौतम महोत्सव के होने या नहीं होने की चर्चा तेज हो गयी है. कोई विभागीय जिला प्रशासन की उदासीनता तो कोई न्यास समिति की उदासीनता की बात कह रहा है, तो कई लोग जिनकी संख्या ज्यादा थी, विभागीय उदासीनता से ज्यादा न्यास समिति की निष्क्रि यता पर सवाल उठाने लगे हैं. लोग कह रहे थे की महोत्सव के समय नजदीक आने पर न्यास के सदस्य सक्रि य नजर आने लगते है. महोत्सव के बाद फिर अगले महोत्सव आने तक सभी सदस्य कुम्भकर्णी निद्रा में सो जाते हैं. पुनगर्ठित न्यास समिति द्वारा पहली बैठक में प्रत्येक दो माह पर बैठक आयोजित करने का निर्णय के बावजूद कतिपय कारणों से दूसरी बैठक का नहीं होना भी चर्चा में शामिल रहा.

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