कैम्पस :::::गाइड की कमी से पीजी छात्रों का रिसर्च प्रभावित
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Nov 2015 6:52 PM
कैम्पस :::::गाइड की कमी से पीजी छात्रों का रिसर्च प्रभावितफोटो ::: डीएमसीएच से संबंधित तस्वीर लगा देंगेप्रोफेसर व सह प्राध्यापक की भारी कमी110 छात्रों के लिए मात्र 52 हैं रिसर्च गाइडएमसीआई की भी लटक रही तलवारप्रतिनिधि, दरभंगा.सूबे के दो चिकित्सा संस्थानों में रिसर्च की सुविधा प्राप्त है. इसमें एक पीएमसीएच जबकि दूसरा डीएमसीएच है. यहां […]
कैम्पस :::::गाइड की कमी से पीजी छात्रों का रिसर्च प्रभावितफोटो ::: डीएमसीएच से संबंधित तस्वीर लगा देंगेप्रोफेसर व सह प्राध्यापक की भारी कमी110 छात्रों के लिए मात्र 52 हैं रिसर्च गाइडएमसीआई की भी लटक रही तलवारप्रतिनिधि, दरभंगा.सूबे के दो चिकित्सा संस्थानों में रिसर्च की सुविधा प्राप्त है. इसमें एक पीएमसीएच जबकि दूसरा डीएमसीएच है. यहां 50 साल से अधिक से पीजी छात्रों के लिए रिसर्च की सुविधा है. पर अब छात्रों के रिसर्च पर असर पड़ रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण है डॉक्टरों की प्रोन्नति नहीं होना. तय मानक के अनुसार डॉक्टरों की प्रोन्नति नहीं हो रही है. वहीं दूसरी ओर लगातार चिकित्सक अवकाश ग्रहण करते जा रहे हैं. नई बहाली भी पूरी तरह से बंद है. जिससे रिसर्च गाइड की भारी किल्लत हो गयी है. यही वजह है कि एमसीआइ की भी तलवार इस चिकित्सा महाविद्यालय पर लटकने लगी है. एक प्रोफेसर दो पीजी छात्रों को करा सकते हैं रिसर्चएमसीआइ के मानक के अनुसार एक प्रोफेसर को दो पीजी छात्र और एक सह प्राध्यापक को एक पीजी छात्र को रिसर्च कराने की मान्यता है. वह भी एक सत्र में मात्र एक या दो पीजी छात्रों को ही रिसर्च करा सकते हैं. एमसीआइ पहले भी कर चुकी है अगाहएमसीआइ की टीम ने निरीक्षण के दौरान पहले भी इस बात के प्रति आगाह किया था. निरीक्षण रिपोर्ट में कई बार इन बिन्दुओं को रेखांकित करते हुए कहा है कि रिसर्च गाइड की कमी के कारण पीजी छात्र प्रभावित हो रहे हैं. एमसीआइ ने पीजी डिग्री पर भी सवाल उठा दिया था. ऐसा नहीं है कि यह कमी एक दो सालों से है. बल्कि पिछले दस साल से रिसर्च गाइड की कमी इस संस्थान में बनी हुई है.वर्तमान में महज 23 प्रोफेसर हैं कार्यरतएमसीआइ के मानक के अनुरूप वर्तमान में 110 पीजी छात्रों को रिसर्च कराने के लिए महज 23 प्रोफेसर कार्यरत हैं. शेष 87 छात्रों के लिए कुल 29 सह प्राध्यापक हैं. इस हिसाब से रिसर्च गाइडों की भारी कमी है. इसके चलते यहां के पजी छात्रों का रिसर्च कैसे होगा. यह सवाल उठ गया है. मेडिसिन छात्रों को होती है सर्वाधिक परेशानीरिसर्च गाइड की कमी का असर सर्वाधिक मेडिसिन, सर्जरी, गायनिक शिशु रोग के पीजी छात्रों को होती है. मेडिसिन, गायनिक, शिशु रोग विभाग में प्रोफेसर के दो दो और सर्जरी विभाग में तीन पद रिक्त हैं. इसके अलावा माइक्रो बॉयोलॉजी, पीएसएम, आंख रोग, हड्डी रोग, एनेशथेसिया, चर्मरोग, रेडियोलॉजी और दंत रोग विभाग में प्रोफेसर के एक-एक पद रिक्त हैं. डीएमसीएच में प्रोफेसर के 40 पद स्वीकृत हैं जिसमें महज 23 कार्यरत हैं.सह प्राध्यापक की भी है कमीडीएमसीएच में सह प्राध्यापक के 89 पद स्वीकृत हैं. जबकि यहां पर मात्र 29 सह प्राध्यापक ही कार्यरत हैं. अब तक कुल 60 डॉक्टरों के पद खाली हैं. इसमें सबसे अधिक सर्जरी विभाग में 9 रिसर्च गाइड की कमी है. इसके अलावा मेडिसिन में 6, पैथोलॉजी में 5, गायनिक, शिशु रोग और निश्चेतना विभाग में चार-चार रिसर्च गाइड की कमी है. इसके साथ ही एनाटॉमी, माइक्रोबॉयोलॉजी, आंख व इएनटी में तीन-तीन और फिजियोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री,एफएमटी, रेडियोलॉजी एवं टीवी एंड चेस्ट विभागों में दो-दो रिसर्च गाइड की कमी है.बॉक्स::::::::::::::::::::::::::रिसर्च पर साढ़े चार लाख मासिक होता है खर्चसरकार की ओर से डीएमसीएच के 110 पीजी छात्रों के रिसर्च पर मासिक 4.62 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च किया जाता है. इस खर्च में से ऐसे पीजी छात्रों को हरेक माह करीब 42 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है. इसके अलावा हरेक साल रिसर्च के लिए मशीन, उपकरणों पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं.कोट::::::::::::::::::::::कहते हैं प्राचार्य यहां रिसर्च गाइड की कमी है. इस कमी को पूरा करने के लिए पांच साल के अनुभव प्राप्त सहायक शिक्षकों से गाइड के रूप मेें काम लिया जाता है.डा. आरके सिन्हा, प्राचार्य, डीएमसी
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