धान की कटाई कर जल्द करें गेहूं की बुआई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2015 8:00 PM
धान की कटाई कर जल्द करें गेहूं की बुआई आलू की अनुशंसित किस्मों की करें बुआई दरभंगा . किसानाें के लिए जारी समसामयिक सुझाव में मौसम वैज्ञानिक ने कहा है कि पिछात धान की कटाई कर जल्द से जल्द गेहूं की बुआई करें. सिंचित एवं सामान्य समय पर बुआई के लिए पीबीडब्लू 343, पीबीडब्लू- 443, […]
धान की कटाई कर जल्द करें गेहूं की बुआई आलू की अनुशंसित किस्मों की करें बुआई दरभंगा . किसानाें के लिए जारी समसामयिक सुझाव में मौसम वैज्ञानिक ने कहा है कि पिछात धान की कटाई कर जल्द से जल्द गेहूं की बुआई करें. सिंचित एवं सामान्य समय पर बुआई के लिए पीबीडब्लू 343, पीबीडब्लू- 443, एचडी- 2733, एचडी- 2967, एचडी-2824, के-9107, के-307, एचयूडब्लू-206 किस्में अनुशंसित है. बीज को बुआई से पहले 2़5 ग्राम बेबीस्टीन सेे प्रति किलो ग्राम बीज को उपचारित करें. बुआई के समय 60 किलो ग्राम नेत्रजन, 60 किलो ग्राम फॉस्फोरस एवं 40 किलो ग्राम पोटास प्रति हेक्टेयर डालें. छिटकबां विधि से बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 125 किलो ग्राम तथा सीड ड्रील से पंक्ति में बुआई के लिए 100 किलो ग्राम बीज का व्यवहार करें. बीज के अच्छे जमाव के लिए खेत में नमी का होना आवश्यक है. रबी मक्का की बुआई 30 नवम्बर तक सम्पन्न कर लें. अन्यथा उपज प्रभावित होगी. बुआई के लिए संकर किस्में जैसे शक्तिमान 1, शक्तिमान 2, शक्तिमान 3, शक्तिमान 4, गंगा 11, राजेन्द्र संकर मक्का 1, राजेन्द्र संकर मक्का 2 एवं संकुल किस्में जैसे देवकी सफेद, लक्ष्मी सफेद, सुआन पीला आदि किस्में इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित है. बीज को बुआई से पहले कैप्टॉन या थीरम नामक दवा के 2़5 ग्राम मात्रा से प्रति किलो ग्राम बीज को उपचारित कर बुआई करें. अगात बोये गये मक्का में निकौनी कर खरपतवार निकाले.आलू की कुफरी चन्द्रमुखी, कुफरी अशोका, कुफरी पुखराज, कुफरी बादशाह, कुफरी लालीमा, कुफरी ज्योति तथा राजेन्द्र आलू 2 आदि अनुशंसित किस्मों की बुआई करें. गत माह के लगाये गये आलू के पौधों की उॅचाई 15झ्र22 सेमी हो जाने पर आलू में निकौनी कर मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें. आवश्यकतानुसार सिंचाई करें.चना की बुआई करें. चना के लिए उन्नत किस्म पूसा-256, केपीजी-59(उदय), केडब्लूआर-108, पूसा 372 अनुशंसित है. बुआई से पूर्व बीज को बेबीस्टीन 2़5 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से उपचारित करें. कजरा पिल्लू से बचाव के लिए क्लोरपाईरीफॉस 8 मिली प्रति किलो ग्राम की दर से 24 घंटा बाद बीज में मिलावें. पुन: 24 घंटे छाया में रखने के बाद राईजोबीयम कल्चर पांच पैकेट प्रति हेक्टेयर की दर से उपचारित करें. मसूर एवं मटर की बुआई यथाशीघ्र सम्पन्न करने का प्रयास करें. मसूर की अरुण, पंत एल-406, केएलएस-218,एचयूएल-57 किस्में इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित है. सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. चारे के लिए जई तथा बरसीम की बुआई करें. जई के लिए 80-100 किलो ग्राम बीज तथा बरसीम के लिए 25-30 किलो ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर का व्यवहार करें. राई-तोरी-सरसों की बोने के 20-25 दिनों बाद प्रथम निकौनी एवं बछनी कर लें. पशुओं को रात में खुले स्थान पर नहीं रखें. पशुओं को खाने में एक चम्मच नमक का मिश्रण सुबह-शाम दें.
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