अब चावल व राशि के लिए लगा रहे चक्कर

Published at :29 Nov 2017 6:34 AM (IST)
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अब चावल व राशि के लिए लगा रहे चक्कर

परेशानी.बाढ़पीड़ितों को कराया भोजन, कम्युनिटी कीचेन मद में व्यय का नहीं हुआ भुगतान दरभंगा : बाढ़ के दौरान विस्थापित लोगों को विभागीय आदेश पर भोजन कराने के बाद अब चावल तथा राशि के लिए विद्यालय प्रधान भटक रहे हैं. यही हाल आंगनवाड़ी सेविकाओं का भी है जिन्होंने अपने विभाग के निर्देश पर पूरी राशि खर्च […]

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परेशानी.बाढ़पीड़ितों को कराया भोजन, कम्युनिटी कीचेन मद में व्यय का नहीं हुआ भुगतान

दरभंगा : बाढ़ के दौरान विस्थापित लोगों को विभागीय आदेश पर भोजन कराने के बाद अब चावल तथा राशि के लिए विद्यालय प्रधान भटक रहे हैं. यही हाल आंगनवाड़ी सेविकाओं का भी है जिन्होंने अपने विभाग के निर्देश पर पूरी राशि खर्च कर कम्यूनिटी किचेन चलाया था. विभाग इस ओर से पूरी तरह लापरवाह नजर आ रहा है.
इसका कुप्रभाव स्कूलों में चल रहे मध्याह्न भोजन पर पड़ता नजर आ रहा है. स्थिति ऐसी हो गयी है कि किसी भी दिन बच्चों का मध्याह्न भोजन बाधित हो जायेगा. हैरत की बात यह है कि एमडीएम के डीपीओ उपलब्ध संधारित सूची के आधार पर सभी विद्यालयों में चावल व राशि एक पखवाड़ा पहले ही उपलब्ध करा देने का दावा कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि इक्का-दुक्का स्थानों को छोड़ कहीं भी न तो चावल की आपूर्ति हो सकी है और न ही राशि ही मिली है.
मालूम हो कि गत अगस्त माह में आयी भीषण बाढ़ के कारण जब बाढ़ पीड़ित दो जून की रोटी के लिए तरह रहे थे, तब प्रशासन एवं विभाग ने विद्यालयों को सुरक्षित स्थान मानते हुए कम्युनिटी कीचेन चलाने का आदेश दिया था. शिक्षक भी मानवता दिखाते हुए बाढ़ पीड़ितों को एमडीएम के चावल के साथ ही अन्य मद का व्यय अपने पॉकेट से खर्च कर चलाया. इस कार्य का तीन माह बीतने को है, किंतु इस मद का चावल तथा अन्य मद खर्च की गयी राशि का भुगतान अब तक नहीं हो सका है.
जांच प्रक्रिया के नाम पर अंचल कार्यालय द्वारा अकारण देरी किये जाने की बात कही जा रही है. अब तक इस मद में केवल एक शाम का ही भुगतान होने की चर्चा शिक्षकों में है. इसे लेकर शिक्षक विभाग से लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, किंतु उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है. सबसे बड़ी बिडम्बना इस बात की है कि चावल का खर्च तो एमडीएम से हुआ, किंतु इसका प्रतिवेदन में बाढ़ में खर्च को नहीं जोड़ने को कहा जा रहा है. इस कारण इन विद्यालयों में चावल की उपलब्धता भौतिक रूप से कम है.
इसका असर अब बच्चों के निवाला पर पड़ने लगा है. वहीं एक-एक एचएम की जेब से अन्य मदों में 50-50 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि बाढ़ राहत के नाम पर मिली राशि अंचल कोष में पड़ी हैं. वहीं शहर के 24 केंद्रों के लिए मध्याह्न भोजन योजना के डीपीओ ने दो शाम भोजन देने का आदेश जारी किया था तथा शिक्षकों ने इसका अनुपालन भी किया. इसका अनुश्रवण भी जनप्रतिनिधि, जिला, अंचल प्रशासन व शिक्षा विभाग कर चुका है. बावजूद इस मद में एक टाइम की राशि देने की बात कही जा रही है. यही स्थिति कमोवेश जिले के अन्य प्रखंडों की है.
इस मुद्दे को लेकर नगर क्षेत्र के शिक्षकों ने प्रधानाध्यापकों के मासिक गोष्ठी में उठाया था, किंतु बीइओ ने इसे अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए हाथ खड़े कर दिये. मध्य विद्यालय कालीस्थान के प्रधानाध्यापक भरत लाल पोद्दार, आफताब आलम, सुधांशु कुमार आदि ने बताया कि जिस प्रकार शिक्षकों ने प्रशासन के आदेश पर अपने कर्त्तव्य का निर्वहन किया, उसी प्रकार उन्हें भी आपदा प्रबंधन के लिए प्रावधान के अनुसार भुगतान होना चाहिए.
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