संतान की कामना के साथ कमला में लगायी डुबकी

Published at :05 Nov 2017 6:45 AM (IST)
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संतान की कामना के साथ कमला में लगायी डुबकी

सदर : कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शनिवार को गौसाघाट में कमला नदी तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. कमला स्नान के साथ पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु जुटे थे. सभी ने कमला नदी में पवित्र स्नान किया. इस दौरान भगतई भी होती रही. बुरी साया से निजात के लिए लोग भगत की […]

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सदर : कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शनिवार को गौसाघाट में कमला नदी तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. कमला स्नान के साथ पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु जुटे थे. सभी ने कमला नदी में पवित्र स्नान किया. इस दौरान भगतई भी होती रही. बुरी साया से निजात के लिए लोग भगत की शरण में जुटे नजर आये. करीब एक लाख लोगों ने इस मौके पर आस्था की डुबकी इस स्थल पर लगायी. श्रद्धालुओं ने अहले सुबह से ही डुबकी लगानी शुरु कर दी थी.

जुटी भीड़ के बीच विधि-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए पुलिस महकमा के कर्मियों को पसीना बहना पड़ा. इस अवसर पर आस-पास के विभिन्न जिलों के अतिरिक्त नेपाल तक से कमला नदी में स्नान करने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जत्था पहुंचा. मेले में ओझा द्वारा बुरे साया को भगाने को लेकर लाठी भी भांजा गया. वहीं नि:संतान महिलाओं को संतान के लिये कोखिया गुहार भी कराया गया. बकड़े, कबूतर एवं मईया की चढ़ावा भी पानी में अर्पित किया गया.

नि:संतान दंपती का इस मेले में अधिक जुटान होता है. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन कमला नदी में स्नान करने एवं कमला मईया से मन्नत मांगने पर मईया उसे जरुर पूरा करती हैं. अगर कोई भूत-प्रेत के साया की चपेट में है तो यहां ओझा द्वारा दूर कर दिया जाता है. यहां गठजोरी कर नदी में स्नान करने पहुंचते हैं. परंपरा के अनुसार पहले पति-पत्नी गौसाघाट से चार किलोमीटर दूर जीवछ घाट में कमला नदी में स्नान किया. वहां से गेठजोरी कर दोनों पैदल चलकर यहां पहुंचे. पति-पत्नी दोनों ने एकसाथ डुबकी लगायी. इस क्रम में पानी के भीतर कुछ खोजते रहे. इसमें जो कुछ भी मिला उसे मईया का प्रसाद समझकर रख लिया. मालूम हो कि इसे वे ग्रहण करेंगे. कहा जाता है कि इसे खाने से संतान की उत्पति होती है. इधर, मन्नतें पूरी होने के बाद संतान के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने बच्चे का इस अवसर पर मुंडन कराया. मालूम हो कि दम्पती को मन्नत पूरी होने के बाद मुंडन कराने आने की परंपरा है. पुत्र हो या पुत्री दोनों के मुंडन कराया जाता है. ओझा द्वारा धूमधाम से मईया की पूजा अर्चना कर चढ़ावा चढ़ाया गया. चार किलोमीटर की दूरी में लगे मेले में प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद रही. गौसाघाट से लेकर कवरिया तक इस मेले में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चुस्त नजर आ रही थी. इसमें महिला पुलिस बल को भी तैनात किया गया था. सदर थानाध्यक्ष रविशंकर प्रसाद खुद सुरक्षा बल के साथ मुआयना में लगे नजर आ रहे थे. इधर समाज कल्याण समिति के बबलू गुप्ता अपने सदस्यों के साथ शांति व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुविधा में लगे रहे.

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