गुरु के बिना ईश्वर का ज्ञान संभव नहीं : साध्वी
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ज्ञान से होती है गुरु की पहचान कंठी व गेरूआ वस्त्र देख न बनायें गुरु मोतिहारी : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम श्रीरामचरितमानस एवं गीता विवेचना के अंतिम दिन सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या श्री मादवेंद्रानंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि जीव ईश्वर का अंग है. गुरु […]
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ज्ञान से होती है गुरु की पहचान
कंठी व गेरूआ वस्त्र देख न बनायें गुरु
मोतिहारी : दिव्य ज्योति जागृति संस्थान दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम श्रीरामचरितमानस एवं गीता विवेचना के अंतिम दिन सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या श्री मादवेंद्रानंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि जीव ईश्वर का अंग है. गुरु के बिना ईश्वर का ज्ञान संभव नहीं है. ये बातें सभी जानते हैं. लेकिन प्रश्न उठता हैै कि कैसा गुरु. यदि आज के परिदृश्य में तथाकथित गुरुओं की दशा देखी जाये तो बड़ी निंदनीय है. समाज के नामी-गिरामी धर्मगुरु ही अनैतिकता और चरित्रहीनता के ज्वलंत उदाहरण बने दिखते है. ऐसे में एक ईश्वर पिपासु किस गुरु के पास जाये. जहां उसकी श्रद्धा न ठगी जाये. आज यदि श्रद्धाएं ठगी जा रही है तो इसके जिम्मेदार हम स्वयं भी है. समस्त शास्त्र ग्रंथ कहते है कि पूर्ण गुरु की पहचान है ब्रह्मज्ञान,
जो गुरू दीक्षा के समय ही ईश्वर का दर्शन करवा दे, उसे ही पूर्ण सत्गुरू कहा जाता है. आप जिस भी आश्रम, डेरा, दरबार में जाये तो सच्ची कसौटी साथ लेकर जाये. उस कसौटी पर उस संत को कसकर देखे. गुरु की पहचान कोई गेरूआ वस्त्र भीड़, मंत्र, माला, कंठी नहीं गुरु की पहचान ज्ञान है. ज्ञान के आभाव में संत के वेश में रावण के द्वारा सीता ठगी गयी. ईश्वर की प्रत्यक्ष अनुभूति प्राप्त कर आप भी सही मायने में धार्मिक बन सकते है. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का यह आह्वान है. कार्यक्रम की प्रस्तुति में मंच से साध्वी सुश्री अमृता भारती, सरिता भारती, खुशबू भारती, गोपाल जी एवं प्रवेश कुमार आदि ने सहयोग किया. कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने संस्थान के तरफ से समस्त श्रोता बंधुओं, कार्यकर्ताओं एवं सभी प्रकार के सहयोगी को धन्यवाद दिया.
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