जिले में पांच साल से होल्ड है सरकारी राशि
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बैंक व निबंधन के साथ कोषागार के कर्मी व अधिकारी जुटेेे हैं मिलान में सरकारी राशि के मिलान में सबके छूट रहे पसीने प्रधान सचिव ने तीन बिंदुओं पर दिये स्पष्ट निर्देश मोतिहारी : भूमि निबंधन के बाद चालान की राशि व व चालान समय से बैंकों के द्वारा ट्रेजरी में न जमा किये जाने […]
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बैंक व निबंधन के साथ कोषागार
के कर्मी व अधिकारी जुटेेे हैं
मिलान में
सरकारी राशि के मिलान में सबके छूट रहे पसीने
प्रधान सचिव ने तीन बिंदुओं पर दिये स्पष्ट निर्देश
मोतिहारी : भूमि निबंधन के बाद चालान की राशि व व चालान समय से बैंकों के द्वारा ट्रेजरी में न जमा किये जाने का मामला गंभीर हो गया है.
नियमानुसार चालान को निबंधन के अगले या उसके अगले दिन तक ट्रेजरी में दे देना है, लेकिन ऐसा न
कर विभिन्न बैंकों के द्वारा सरकारी राशि को होल्ड रख बैंकों की उपलब्धि
जांच में दिखाने की बात सामने आ रही है.
निबंधन में चालान का क्या है नियम
जिला कोषागार के अनुसार जमीन का निबंधन चालान के आधार पर होता है. चालान मतलब राशि जमा. एक चालान पार्टी को, दूसरा निबंधन कार्यालय में और तीसरा चालान बैंक के माध्यम से ट्रेजरी को भेज दिया जाता है. अमुक निबंधन की इतनी राशि खाते में जमा हो गयी, बैंकों से प्राप्त सूची को महालेखाकार पटना को माह के प्रत्येक पांच तारीख को प्रति हेडबार भेजने का नियम है. इसमें आय व व्यय की सूची भी जाती है,
लेकिन चालान की सूची समय से देने में कई बैंकों के द्वारा लापरवाही कर राशि को बैंक में होल्ड रखा गया. उक्त राशि की सूद बैंक को मिली, लेकिन सरकार को नहीं. जो अब डीएम के द्वारा गठित जांच टीम से सामने आ रही है.
31 जनवरी 16 तक की चालान राशि की हो रही जांच
जांच को टीम गठित
विभागीय प्रधान सचिव के निर्देश के बाद डीएम अनुपम कुमार ने बैंक व निबंधन अधिकारियों के साथ बैठक कर पांच सदस्यीय टीम का गठन किया है. टीम में डीएम के अलावे जिला अवर निबंधक सुशील कुमार सुमन, कोषागार अधिकारी रामबाबू प्रसाद, अवर निबंधक छौड़ादानो संजय कुमार, ढाका के डाॅ यशपाल शामिल हैं.
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