बढ़े दर से मुआवजे की कर रहे मांग

Updated at : 06 Jul 2015 7:51 AM (IST)
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बढ़े दर से मुआवजे की कर रहे मांग

आइसीपी को जोड़ने वाली बाइपास के लिए जमीन अधिग्रहण रक्सौल : इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को जोड़ने वाली बाइपास सड़क के निर्माण में आने वाली अड़चन कम होने का नाम नहीं ले रही है. जमीन अधिग्रहण के बदले जो किसान आसानी से अपना पैसा उठा कर काम करने के लिए जमीन को छोड़ दिये, अब वे […]

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आइसीपी को जोड़ने वाली बाइपास के लिए जमीन अधिग्रहण
रक्सौल : इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को जोड़ने वाली बाइपास सड़क के निर्माण में आने वाली अड़चन कम होने का नाम नहीं ले रही है. जमीन अधिग्रहण के बदले जो किसान आसानी से अपना पैसा उठा कर काम करने के लिए जमीन को छोड़ दिये, अब वे काम को बाधित करने की योजना बना रहे हैं.
ऐसे किसानों का कहना है कि बाइपास सड़क निर्माण के लिए 7.3 किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया. उस वक्त जो किसान अपने जमीन का मुआवजा नहीं लिये, आज उन्हें हमलोगों की तुलना में काफी पैसा मिल रहा है. ऐसे में हमलोगों को भी उतना ही रुपया मिलना चाहिए. जब एक ही योजना के लिए एक ही बार जमीन अधिग्रहण किया गया तो हमलोगों को कम पैसा क्यों मिला. ऐसे लगभग 150 किसानों ने रविवार को प्रखंड क्षेत्र के कनना गांव स्थित मठ पर बैठक हुई.
बैठक में किसानों ने वर्तमान दर से मुआवजा दिया गया है, उसी दर से वे अपनी जमीन का भुगतान चाहते हैं और सरकार से मांग करेंगे कि पहले जो पैसा दिया गया है, उसे घटा कर शेष पैसा उनलोगों को दिया जाये. बैठक में शामिल किसान मो जफिर आलम, लाल साहेब सिंह, मो लालबाबू, मो सैफुल्लाह अंसारी, मनोज कुमार सिंह, शिवकली देवी, यशोदा देवी, चंपा देवी, सुलतान मियां, राजू प्रसाद आदि का कहना था कि हमलोग नये दर से भुगतान के लिए आंदोलन करेंगे. साथ ही उच्च न्यायालय के शरण में जाकर न्याय की गुहार लगायेंगे.
नया व पुराना दर
एक ही योजना के लिए जो लोग पहले मुआवजा ले चुके हैं, उन्हें 2012 में प्रति कट्ठा सात लाख रुपया के हिसाब से कनना मौजा में भुगतान किया गया है. जबकि उसी मौजा में 2015 में उसी योजना में सात लाख चार हजार प्रति कट्ठा का भुगतान सरकार द्वारा किया जा रहा है.
वहीं सिंहपुर हरैया मौजा के किसानों ने बताया कि पूर्व में दो लाख 98 हजार रुपया प्रति कट्ठा के हिसाब से भुगतान मिला था. अब गजट से छूटे हुए किसानों को छह लाख 10 हजार रुपये प्रति कट्ठा के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है.
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