भूकंप के बाद तेज हवा व बारिश से लोगों में भय

Updated at : 29 Apr 2015 12:50 AM (IST)
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भूकंप के बाद तेज हवा व बारिश से लोगों में भय

मोतिहारी : भूकंप जैसी आपदा में अनहोनी की आशंका से भयभीत लोग मंगलवार को आयी तेज आंधी-तूफान से सहम गये. तेज हवा की रफ्तार के साथ आसमान में उड़ते धूल को देख लोगों के मन में फिर से दूसरी आपदा का खौफ छा गया. सोमवार की शाम आयी भूकंप का हल्का झटका (जिसका एहसास बहुत […]

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मोतिहारी : भूकंप जैसी आपदा में अनहोनी की आशंका से भयभीत लोग मंगलवार को आयी तेज आंधी-तूफान से सहम गये. तेज हवा की रफ्तार के साथ आसमान में उड़ते धूल को देख लोगों के मन में फिर से दूसरी आपदा का खौफ छा गया.
सोमवार की शाम आयी भूकंप का हल्का झटका (जिसका एहसास बहुत कम लोगों को हुआ) से अभी लोग उबर नही पाये थे कि इस बीच मौसम के बदले मिजाज ने लोगों को एकबार फिर सोचने को मजबूर कर दिया. कल तक लोगों में धरती कांपने की भय से सहमे लोग आज आसमान को देख प्राकृतिक के बदलते रूप को समझने का प्रयास कर रहे थे. इस बीच भारी बारिस भी शुरू हो गयी. तेज आंधी ने जहां कई घरों के छप्पड़ उड़ा ले गया, वही बारिस से आम जन-जीवन पूरी तरह प्रभावित रहा. मौसम के बदले मिजाज को देख लोग घर को लौट आये.
आंधी ने मचायी तबाही
आंधी का असर जिला के कुछेक प्रखंडों में ज्यादा ही रहा. यहां हवा की तेज रफ्तार ने काफी तबाही मचायी है. कही मकान के छज्जा गिर गये है तो कही चहार दिवारी क्षति ग्रस्त हो गयी है. आंधी ने गरीबों के आशियाना को बर्बाद कर दिया है. इसके चपेट में आकर कई झोपड़ी गिर गये है. विशाल काय पुराने पेड के कई जगह गिर जाने की भी सूचनाएं है. देहाती क्षेत्रों में इससे काफी क्षति हुआ है.
आम व लीची को नुकसान
आंधी से बगीचा में लगे आम व लीची की फसल को भारी क्षति हुआ है. तेज हवा के कारण पेड़ में लगे फल काफी संख्या में गिर गये है. जिससे किसानों को आर्थिक क्षति हुयी है. अनुमान के मुताबिक आंधी के प्रकोप से आम व लीची फल का लाखों में नुकसान हुआ है. जानकारी बताते है कि इस साल जिले में आम व लीची की उत्पादन पर इसका काफी प्रभाव पडेगा. बताया जाता है कि उत्पादन प्रभावित होने से लीची एवं आम का बाजार गर्म रहेगा.
प्रकृति की मार से परेशान हैं किसान
हरसिद्धि : आकाश में काली बादल देख किसानों के रोंगटे खड़े हो गये है. अभी तक किसानों का गेहूं कि कटाई और दवनी बाकी है. मौसम का मिजाज ठीक नही देख कर किसान एक दम हैरान है. आज मौसम सुबह ठीक -ठाक था तो किसान गेहूं की कटनी के लिए मजदूर को अपने खेतों में भेजा. मजदूर गेंहूं काट ही रहा था कि आकाश में काले बादल आ गये.
किसानों गेंहू को अपने घर लाने में परेशान दिख रहे है. अब प्राकृतिक की मार किसान नही ङोल पायेगे. पहले हुई वर्षा में किसान उबरे नही है कि फिर बरबार्दी का कहर सामने दिख रहा है. किसानों के सामने अपने परिवार का भरन पोषण का अब चिंता सताये जा रही है. एक तो गेहू के बाली में दाना नही आया दूसरी ओर वर्षा के कारण गेहूं खेत में भीगकर सड़ जायेगा. किसान क्या करे क्या न करे इसकी चिंता है प्रखंड में लगभग 60 प्रतिशत गेहूं अभी किसानों के खेत और खलिहानी में पड़ा है.
गेहू वैसा फसल है कि थोड़े सी पानी में भिगने पर हम जा रहा है. किसानों के सामने तो मजदूरी व दौनी देने की मन भी नही कर रहा है क्योंकि गेहूं के बाली में दाना नही है सिर्फ भुसा काम आयेगा. प्रति कटठा 25 से 30 किलों गेहू निकल रहा है. खर्च को जोड़ा जायेगा तो खेती में कोई फायदा नही है.
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