सदर अस्पताल में निगरानी का छापा
Updated at : 18 Jun 2017 4:28 AM (IST)
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फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने का मामला मोतिहारी : दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में निगरानी की विशेष टीम ने शनिवार को सदर अस्पताल में छापेमारी की. इस दौरान कागजातों को खंगाला और सिविल सर्जन से पूछताछ कर जानकारी ली. इस कार्रवाई से िदव्यांग प्रमाणपत्र बनानेवालों में हड़कंप है. मामले को लेकर चिकित्सक व कर्मी […]
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फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने का मामला
मोतिहारी : दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में निगरानी की विशेष टीम ने शनिवार को सदर अस्पताल में छापेमारी की. इस दौरान कागजातों को खंगाला और सिविल सर्जन से पूछताछ कर जानकारी ली. इस कार्रवाई से िदव्यांग प्रमाणपत्र बनानेवालों में हड़कंप है. मामले को लेकर चिकित्सक व कर्मी पर गाज गिर सकती है. तत्काल सिविल सर्जन डाॅ प्रशांत कुमार ने कर्मी ओमप्रकाश से स्पष्टीकरण की मांग की है. जानकारी के अनुसार, मोतिहारी सदर अस्पताल की ओर से टिकारी गया की
सदर अस्पताल में…
शोभा कुमारी व शरतचंद्र को दिव्यांगप्रमाणपत्र निर्गत किया है. नियमानुसार िदव्यांग प्रमाणपत्र अपने (जहां घर है) ही जिले का होना चाहिए. मोतिहारी से निर्गत प्रमाणपत्र पर दोनों गया जिले में सरकारी सेवा का लाभ उठा रहे हैं. मामले को लेकर कुछ विपक्षियों की ओर से कोर्ट में अर्जी दी गयी. इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर निगरानी की टीम ने उक्त छापेमारी कर पंजी को खंगाला.
पंजी की जांच में जो खुलासा हुआ है वह भी चौंकानेवाला है. शोभा कुमारी व शरत चंद्र ने पंजी में प्राप्ति हस्ताक्षर किया है, लेकिन किस कारण हस्ताक्षर को काटा गया है, इसकी भी जांच निगरानी कर रही है. मामले में वैसे बिचौलियों की भी तलाश की जा रही है, जो मोटी रकम लेकर फर्जी िदव्यांग प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार आंख, नाक व गला के िदव्यांग प्रामाणपत्र बनवाने में फर्जी खेल ज्यादा होता है.
विभाग का कहना है कि उक्त प्रमाणपत्र 2005 में जब निर्गत हुआ उस समय सिविल सर्जन डाॅ गोपाल प्रसाद थे और प्रभारी सिविल-सर्जन के रूप में डाॅ एसएन चौधरी का हस्ताक्षर है, जो अभी मुजफ्फरपुर में कार्यरत हैं. क्लर्क के रूप में ओमप्रकाश का हस्ताक्षर है, जो अभी भी यहीं पर कार्यरत हैं.
मोतिहारी से बने हैं गया टेकारी
के दो फर्जी िदव्यांग प्रमाणपत्र
वर्ष 2005 में जारी हुआ है दोनों फर्जी प्रमाणपत्र
कोर्ट के आदेश पर निगरानी
की टीम ने की कार्रवाई
तत्कालीन क्लर्क ओमप्रकाश से जवाब-तलब
फर्जी प्रमाण पत्र पर दोनों सरकारी सेवा में हैं कार्यरत
प्रमाणपत्र से संबंधित सभी संचिकाओं की जांच तेज कर दी गयी है. कैसे और क्यों दूसरे जिले का प्रमाणपत्र यहां से निर्गत हुआ. इन सब बिंदुओं पर जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जायेगी.
डॉ प्रशांत कुमार, सिविल सर्जन मोतिहारी
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