ठंड में उल्टी-दस्त को न करें नजरअंदाज

Updated at : 11 Jan 2018 5:21 AM (IST)
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ठंड में उल्टी-दस्त को न करें नजरअंदाज

ठंड में तमाम बीमारियां प्रभावी हो जाती हैं बक्सर : बढ़ती ठंड हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है. तमाम बीमारियां ठंड में प्रभाव दिखाना शुरू कर देती हैं. कारण तापमान कम और हवा में नमी का होना है. इसमें मरीज को सिरदर्द, थकान, बुखार होने के साथ ही नाक से स्राव होता है. गले […]

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ठंड में तमाम बीमारियां प्रभावी हो जाती हैं

बक्सर : बढ़ती ठंड हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है. तमाम बीमारियां ठंड में प्रभाव दिखाना शुरू कर देती हैं. कारण तापमान कम और हवा में नमी का होना है. इसमें मरीज को सिरदर्द, थकान, बुखार होने के साथ ही नाक से स्राव होता है. गले में खराश तो सर्दियों में आम बात है, जो महज वायरस से होनेवाली बीमारी है. ठंड के मौसम में आमतौर पर सर्दी-जुकाम के साथ ही नीमोनिया, ब्रांकाइटिस जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं. सर्दियों में स्वस्थ रहना है तो अपना खान-पान ठीक रखें, पूरी नींद लें और थोड़ा व्यायाम करें. सर्दियों का प्रभाव ज्यादातर बच्चे एवं बुजुर्गों पर दिखता है. इन पर थोड़ी असावधानी होने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं हावी हो जाती हैं. सदर अस्पताल के आयुष चिकित्सक पीसी प्रसाद ने ठंड में होने वाली बीमारी एवं बचाव पर विस्तार से चर्चा की
बीमारी व बचाव के उपाय
जुकाम एवं खांसी : ठंड में हमारे शरीर के तापमान में भी गिरावट आती है, जिससे जुकाम, खांसी एवं गले में खराश हो जाता है. ऐसे में कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम खाने से खांसी और बढ़ सकती है. साइनस की समस्या हो तो धूल-मिट्टी से बचें. ठंड में बाहर जाते समय गर्म कपड़ा पहनने के साथ सिर और गला हमेशा ढक कर रखें.
ब्रांकाइटिस : पांच साल से कम उम्र के बच्चों में ब्रांकाइटिस की समस्या अधिक होती है. ऐसे में मरीज को सांस लेने में तकलीफ के साथ खांसी भी होती है, जो कई हफ्तों तक रहती है. बच्चों में ब्रांकाइटिस के कारण बुखार भी हो जाता है. बुखार के साथ ही सिने में दर्द और खांसते समय मुंह से खून आता है. ऐसे में चिकित्सक से मिलने में देर नहीं करना चाहिए.
सिरदर्द : सर में ठंड लग जाने एवं शरीर में पानी की कमी से सरदर्द हो सकता है. सर्दियों में या ठंडी जगह पर यात्रा करने के दौरान सिर को ढक कर रखें. सर्दियों में भी कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीयें.
दमा या अस्थमा : ठंडी हवाएं दमा के लक्षणों को गंभीर बना सकती हैं, जैसे सांस लेने में बहुत तकलीफ होना. दमा के मरीजों को अपने साथ हमेशा इसकी दवा रखनी चाहिए.
गठिया या हड्डियों में दर्द : जिन लोगों को गठिया होता है, उन्हें ठंड में अधिक परेशानी होती है. ऐसे में सर्दियों से बचाव और थोड़ा व्यायाम कारगर साबित हो सकता है.
हृदयाघात : हृदयाघात या हार्ट अटैक की समस्या सर्दियों में ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने के कारण आती है. ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हृदयाघात का खतरा बना रहता है.
इन्फ्लूएंजा : छह महीने से दो साल तक के बच्चों में इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है. इसके कारण बच्चों में थकान, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होती है. इन्फ्लूएंजा की गंभीर स्थितियों में निमोनिया भी हो सकता है.
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