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भागलपुर में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर चालकों की जांच शुरू, Driving Licence के लिए ऐसे पास करें टेस्ट

Updated at : 03 Sep 2022 3:29 AM (IST)
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भागलपुर में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर चालकों की जांच शुरू, Driving Licence के लिए ऐसे पास करें टेस्ट

Driving Licence: भागलपुर पथ परिवहन निगम परिसर में लगभग 75 लाख की लागत से बने ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर बड़े वाहनों के साथ दोपहिया वाहनों का टेस्ट शुरू हो गया है.

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भागलपुर: पथ परिवहन निगम परिसर में लगभग 75 लाख की लागत से बने ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर बड़े वाहनों के साथ दोपहिया वाहनों का टेस्ट शुरू हो गया है. 13 अगस्त को जिलाधिकारी के ट्रैक निरीक्षण के बाद जिला परिवहन पदाधिकारी ने प्रवेज अख्तर ने इस नये ट्रैक पर गाड़ियों का टेस्ट शुरू कर दिया था.

ट्रैक पर वाहनों का टेस्ट ड्राइव शुरू

बीते 16 अगस्त से इस ट्रैक पर वाहनों का टेस्ट ड्राइव शुरू कर दिया गया था. अब परिवहन विभाग को गाड़ियों के टेस्ट के लिए इधर-इधर चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि एलएमवी और दो पहिया वाहनों का ड्राइविंग टेस्ट शुरू किया गया है. मोटर यान निरीक्षक अनिल कुमार की निगरानी में ड्राइविंग टेस्ट का काम हो रहा है.

तीन MVI की होगी नियुक्ती

मोटर यान निरीक्षक ने बताया कि नये ट्रैक पर मंगलवार और शुक्रवार को टेस्ट हो रहा है. सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक टेस्ट लिया जायेगा. अभी एजेंसी द्वारा बने ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक को विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है. जल्द ही एजेंसी द्वारा हैंड ओवर किया जायेगा. तीन और एमवीआइ की जल्द ही भागलपुर परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति होगी.

क्या है ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक

सामान्य लाइसेंस जारी करने से पहले ड्राइविंग जांच की परीक्षा जो मैनुअल व कंप्यूटर से होती है, यह तरीका पूरी तरह पारदर्शी और उपयोगी नहीं है. इसका लाभ कई बिचौलिये उठाते हैं. लेकिन इस ट्रैक के निर्माण के बाद लर्निंग लाइसेंस और फाइनल लाइसेंस जारी करने से पहले इस टेस्टिंग ट्रैक में उन्हें टेस्ट देना अनिवार्य होगा. इसके प्रभारी एमवीआइ होंगे जो चालकों के ड्राइविंग क्षमता की जांच करेंगे. बिना यहां के जांच के कोई भी ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं होगा.

ऐसे होती है जांच

इस ट्रैक पर चालकों को गाड़ी चलाकर दिखना होगा, ट्रैक के विभिन्न तरीके मोड़ बने होंगे. यहां परिवहन विभाग की एक टीम फील्ड में खड़ा होकर उन्हें देखेगी, तो दूसरी टीम एक सीसीटीवी से इसकी निगरानी करेगी कि चालक के गाड़ी की स्पीड और बैलेंस क्या है. उन्हें रोड संबंधित साइनएज का ज्ञान है या नहीं. ट्रैक पर जगह जगह कैमरे लगे होंगे, जो चालक के गाड़ी चलाने के पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखेंगे. जिसमें एक-एक स्टेट पर अंक तय होगा, निर्धारित से कम अंक मिलने पर उन्हें दोबारा टेस्ट के लिए आना होगा. यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. इसे पास करने के बाद ही चालक को लर्निंग व फाइनल लाइसेंस जारी होगा.

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