रैनबसेरे से नहीं मिल रहा शहरी बेघरों को फायदा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Aug 2017 10:07 AM (IST)
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आरा : रैन बसेरों का लाभ नगर के गरीबों को नहीं मिल रहा है. बेघरवों के लिए रैन बसेरा का सहारा था, पर हालात यह है कि रैन बसेरों में या तो ताला लटका रहता है या फिर दूसरे लोग कब्जा जमाये रहते हैं. नगर निगम द्वारा गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए नगर […]
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आरा : रैन बसेरों का लाभ नगर के गरीबों को नहीं मिल रहा है. बेघरवों के लिए रैन बसेरा का सहारा था, पर हालात यह है कि रैन बसेरों में या तो ताला लटका रहता है या फिर दूसरे लोग कब्जा जमाये रहते हैं. नगर निगम द्वारा गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए नगर में दो रैन बसेरों का निर्माण कराया जा चुका है.
जबकि तीसरे रैन बसेरा का निर्माण किया जा रहा है. वहीं वित्तीय वर्ष 2017-18 में दो रैन बसेरों के निर्माण का प्रस्ताव है, पर नगर निगम की लापरवाही के कारण रैन बसेरा की स्थिति दयनीय है. सदर अस्पताल परिसर स्थित रैन बसेरा कई जगह खराब हो चुका है. प्लास्टर जहां-तहां टूट रहा है. वहीं पिलर भी कई जगह टूट चुका है.
दो रैन बसेरों का गरीबों को नहीं मिल रहा लाभ : नगर में बने दो रैन बसेरों का लाभ नगर के बेघर गरीबों को नहीं मिल पा रहा है. कुव्यवस्था का आलम यह है कि सदर अस्पताल परिसर स्थित रैन बसेरा में अनधिकृत लोगों का दबदबा रहता है. गरीब उसमें नहीं रह पाते हैं.
कभी-कभी तो स्थिति ऐसी होती है कि उसे रिक्शा तथा टमटम पड़ाव के रूप में उपयोग किया जाने लगता है. नगर निगम की लापरवाही के कारण कई गरीबों को बरसात के मौसम में भी सड़क किनारे सो कर रात गुजारनी पड़ती है. वहीं मौलाबाग में कहने को दो मंजिला भवन बनाया गया है, पर उसमें कोई गरीब नहीं रह पाता है. नगर निगम द्वारा रैन बसेरा की देखरेख के लिए कर्मी की नियुक्ति की गयी है, पर अधिकतर समय उसमें ताला ही लटका रहता है. गरीबों को कभी भी रैन बसेरा का लाभ नहीं लेने दिया जाता है. इससे रैन बसेरा के निर्माण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है.
दो रैनबसेराें के निर्माण का है प्रस्ताव
नगर निगम द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 में दो रैनबसेराें के निर्माण का प्रस्ताव है. पर अब तक वित्तीय वर्ष के लगभग पांच माह बीत जाने के बाद भी स्थल का चयन नहीं किया जा सका है. इससे इसके निर्माण पर संशय उत्पन्न होने लगा है. गरीबों के प्रति उदासीन नगर निगम की कार्यप्रणाली का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है.
आठ लाख की लागत से बना है रैनबसेरा
मौलाबाग स्थित रैनबसेरा लगभग आठ लाख की लागत से बनाया गया है. जबकि सदर अस्पताल परिसर स्थित रैन बसेरा लगभग तीन लाख की लागत से बनाया गया है. पर इतनी राशि खर्च होने के बाद भी रैनबसेरों का लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रहा है.
क्या कहते हैं नगर आयुक्त
रैन बसेरे का निर्माण बेघर गरीबों के लिए कराया गया है, ताकि उन्हें रहने के लिए एक छत मिल सके. निगम द्वारा इसकी जांच की जायेगी कि रैन बसेरों में गरीबों को आश्रय मिल रहा है या नहीं. इसके बाद उस पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
प्रमोद कुमार, नगर आयुक्त
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