भागलपुर में सालों इंतजार के बाद भी नहीं बन सका स्थायी बस स्टैंड, राशि आकर चली गई वापस

Updated at : 07 Oct 2020 11:58 AM (IST)
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भागलपुर में सालों इंतजार के बाद भी नहीं बन सका स्थायी बस स्टैंड, राशि आकर चली गई वापस

भागलपुर शहर अब तक कई चुनाव देख चुका है, लेकिन एक स्थायी, सुसज्जित और सभी सुविधाओं से लैस स्थायी बस स्टैंड नहीं देख पाया. पिछले छह वर्षों में स्थायी बस स्टैंड के लिए तीन अलग-अलग स्तर से तीन बार प्रशासनिक पहल हुई. हर बार की गयी पहल फिसड्डी साबित हुई. फाइलें समेट कर रख दी गयीं. डिक्शन मोड़ पर बस स्टैंड कुव्यवस्थाओं के बीच संचालित हो रहा है और शहर में बस संचालन की वजह से जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है.

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भागलपुर: भागलपुर शहर अब तक कई चुनाव देख चुका है, लेकिन एक स्थायी, सुसज्जित और सभी सुविधाओं से लैस स्थायी बस स्टैंड नहीं देख पाया. पिछले छह वर्षों में स्थायी बस स्टैंड के लिए तीन अलग-अलग स्तर से तीन बार प्रशासनिक पहल हुई. हर बार की गयी पहल फिसड्डी साबित हुई. फाइलें समेट कर रख दी गयीं. डिक्शन मोड़ पर बस स्टैंड कुव्यवस्थाओं के बीच संचालित हो रहा है और शहर में बस संचालन की वजह से जाम की समस्या जस की तस बनी हुई है.

2014 से नहीं सुलझ सका मामला 

पहली बार वर्ष 2014 में बुडको के माध्यम से बस स्टैंड बनाने का प्रोजेक्ट तैयार हुआ, पर जमीन मिलने को लेकर मामला अटका रहा. फिर वर्ष 2016 में स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से तिलकामांझी स्थित सरकारी बस स्टैंड परिसर में स्थायी निजी बस संचालन के लिए स्टैंड का निर्णय हुआ, लेकिन परिवहन निगम से जमीन ट्रांसफर का मामला सुलझ नहीं पाया. तीसरी बार इस साल सात फरवरी को बाइपास के किनारे जमीन तलाश भी ली गयी, लेकिन स्टैंड नहीं बन सका.

पहली असफलता : बुडको को मिला था 395.50 लाख रु

बुडको को बस स्टैंड बनाने के लिए वर्ष 2014 में 395.50 लाख रुपये मिला था. 19.11.2014 को राशि की प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल गयी. 04.02.2015 को निविदा की तिथि तय की गयी थी. लेकिन जगह की तलाश प्रशासनिक स्तर से नहीं हो सकी और आखिरकार नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव ने राशि वापस करने का निर्देश दे दिया.

दूसरी असफलता : स्मार्ट सिटी योजना से बनना था तिलकामांझी में बस स्टैंड

स्मार्ट सिटी कंपनी ने वर्ष 2016 में यह निर्णय लिया कि तिलकामांझी सरकारी बस स्टैंड परिसर में खाली पड़े बड़े भूखंड पर निजी बस संचालन के लिए स्टैंड का निर्माण कराया जायेगा. तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त अजय कुमार चौधरी के स्तर से परिवहन निगम को जमीन पर एनओसी के लिए लिखा गया, ताकि स्टैंड बनाया जा सके. लेकिन न एनओसी मिली और न यहां बस स्टैंड के लिए आगे पहल ही की जा सकी.

तीसरी बार अब तक असफल : बाइपास किनारे एक अप्रैल से शुरू होना था बस स्टैंड

गत सात फरवरी को जिला प्रशासन ने निर्णय लिया कि भागलपुर शहर का नया बस स्टैंड बाइपास के किनारे बनेगा. इसका निर्माण बाइपास की निर्माण एजेंसी के कैंप कार्यालय परिसर (बाइपास बनने के बाद बंद) में किया जायेगा. जगदीशपुर अंचल में पड़नेवाली यह जमीन एक एकड़ 75 डिसमिल में है. डीएम ने पदाधिकारियों के साथ बैठक कर यह भी फैसला लिया कि इसी वर्ष एक अप्रैल से नये बस स्टैंड का संचालन मूलभूत सुविधाओं के साथ शुरू कर दिया जायेगा. लेकिन एक अप्रैल को बीते छह माह हो चुके, पर बस स्टैंड नहीं खुल पाया.

क्यों जरूरी है शहर से बाहर एक बस स्टैंड

– शहर को चाहिए जाम से मुक्ति

– लोहिया पुल पर बड़ी बसें लगाती है जाम

– शहर में बड़ी बसों से हादसे की रहती है आशंका

– घनी आबादी वाले क्षेत्र में है बस स्टैंड, यातायात की हो रही गंभीर समस्या

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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