पहल. प्रशासनिक स्तर काटेगा सप्लाइ चेन, स्वास्थ्य विभाग भी है मुस्तैद

Published at :03 Apr 2016 6:21 AM (IST)
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पहल. प्रशासनिक स्तर काटेगा सप्लाइ चेन, स्वास्थ्य विभाग भी है मुस्तैद

शराबबंदी: दो स्तरों पर है तैयारी स्थिति से निबटने को टास्क फोर्स गठित जिले में स्वास्थ्य विभाग ने इनसे निबटने के लिए टॉस्क फोर्स का गठन किया है. टॉस्क फोर्स में सिविल सर्जन तथा सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी, प्रशिक्षित चिकित्सक, काउंसलर, स्टाप नर्स तथा लैब टेक्निशियन शामिल हैं. ऐसी […]

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शराबबंदी: दो स्तरों पर है तैयारी

स्थिति से निबटने को टास्क फोर्स गठित
जिले में स्वास्थ्य विभाग ने इनसे निबटने के लिए टॉस्क फोर्स का गठन किया है. टॉस्क फोर्स में सिविल सर्जन तथा सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी, प्रशिक्षित चिकित्सक, काउंसलर, स्टाप नर्स तथा लैब टेक्निशियन शामिल हैं. ऐसी किसी भी सूचना पर टॉस्क फोर्स तुरंत पीड़ित के पास पहुंच कर उनका इलाज शुरू करेगी. ऐसे में कोई गंभीर मामला सामने आने पर पीड़ित को अविलंब हेमोडायलिसिस हेतु रेफर करने की भी व्यवस्था की गयी है.
हेमोडायलिसिस के पूर्व पीड़ित का पीएच टेस्ट भी कराना आवश्यक होगा. इसलिए लैब टेक्निशियन/ ऑटो एनालाइजर एवं रीजेंट भी टॉस्क फोर्स के साथ रखने का आदेश दिया गया है. अन्य सामान्य मामलों में स्थानीय स्तर पर भी पीड़ित की चिकित्सा की जायेगी. इसके लिए बकायदा कैंप लगाये जायेंगे. ऐसे कैंपों में ही पर्याप्त दवाइयां रखी जायेंगी ताकि पीड़ित को इलाज के लिए कहीं अन्यत्र ले जाने की जरूरत न हो.
काउंसिलिंग पर दिया जा रहा खास जोर
शराबबंदी को लेकर स्वास्थ्य विभाग काउंसिलिंग पर खास जोर दे रहा है. विभाग का मानना है कि समुचित सलाह और प्यार से नशे की लत के आदी लोगों को सही रास्ते पर लाया जा सकता है. ज्यादा गंभीर स्थिति में उनका इलाज नशा मुक्ति केंद्र में किया जायेगा. बांका जिले में नशा पीड़ितों की काउसंसिलिंग का दर काफी बेहतर है. अब तक यहां 17 लोगों की काउंसिलिंग की जा चुकी है. एक व्यक्ति इलाज के लिए भरती हो चुका है.
नशा छोड़ने पर तत्काल हो सकती है कुछ परेशानी
शराब के नशे की लत के शिकार लोगों को होने वाले लक्षणों को लेकर भी स्वास्थ्य प्रशासन गंभीर है. शराब छोड़ने के बाद 6 से 48 घंटे के भीतर उत्पन्न होने वाले सामान्य लक्षणों में चिंता, असहजता, पसीना आना, दिल की धड़कने तेज होना, हाथ पाव कांपना, निर्णय लेने की क्षमता में कमी, असामान्य व्यवहार, कन्फ्यूजन, जी मितलाना, उलटी आदि शामिल हैं.
जबकि गंभीर मामलों में शराब छोड़ने के 24 घंटे से लेकर 96 घंटे तक के भीतर दिमाग एवं शरीर के अन्य अंगों के साथ तालमेल समाप्त हो जाना, सुनने समझने की क्षमता में ह्रास तथा मिर्गी जैसे दौरे पड़ने आदि के लक्षण सामने आ सकते हैं. इनका अविलंब इलाज करने का निर्णय स्वास्थ्य विभाग ने पूर्ण क्षमता के साथ स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था की है.
जिले में शराबबंदी को शत प्रतिशत कारगर बनाने के लिए दो स्तरों पर प्रयास चल रहा है. प्रशासनिक स्तर पर जहां शराब की सप्लाइ चेन काटने की तैयारी है, तो स्वास्थ्य विभाग की ओर मांग बाजार नष्ट करने की तैयारी की जा रही है.
बांका : शराबबंदी को शत प्रतिशत कारगर बनाने के लिए जिले में दो स्तरों पर प्रयास चल रहे हैं. सरकारी तंत्र शराब की आपूर्ति के साथ-साथ इसकी मांग के बाजार को भी पूरी तरह नष्ट करने के लिए कृत संकल्पित है.
प्रशासनिक महकमा जहां शराब की सप्लाइ चेन को काटने के लिए हर पहलु पर नजर रख रहा है, वहीं इसकी मांग बाजार को पूरी तरह खत्म कर देने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य महकमे ने संभाल रखी है. स्वास्थ्य विभाग उन पहलुओं को खासतौर से ध्यान में रख रहा है, जो शराबबंदी के बाद की स्थितियों में पैदा हो सकती हैं. इसके लिए विभागीय स्तर पर खास तैयारियां की गयी हैं.
इन तैयारियों में काउंसिलिंग, ईलाज एवं जागरूकता शामिल हैं. इनके अलावा शराबबंदी के आदेश के बाद लालची कारोबारियों द्वारा जहरीले केमिकल का उपयोग कर जानलेवा शराब बना कर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने की आशंकाओं को लेकर भी अपना वर्क प्लान तैयार कर चुकी है. इस प्लान को बांका जिले में लागू भी कर दिया गया है. साथ ही नकली शराब या जहरीले नशा की गिरफ्त में आकर अपनी जान को जोखिम में डालने वाले लोगों को बचाने के लिए भी विभाग ने एक बड़ी कार्य योजना तैयार की है.
मेथनॉल प्वाइजनिंग पर है खास नजर
राज्य में मद्य निषेध कानून लागू हो जाने के कारण शराब आपूर्ति रोक दिये जाने के बाद इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि लालची कारोबारियों तथा असामाजिक तत्वों द्वारा गैर कानूनी तरीके से जहरीले केमिकल का इस्तेमाल कर जानलेवा शराब बनायी जा सकती है. खासकर मेथनॉल और यूरिया के उपयोग से शराब बना कर चोरी छिपे लोगों को इसका आदि बनाने की कोशिश असामाजिक तत्व कर सकते हैं. ऐसे शराब का उपयोग जानलेवा साबित होगा. खास कर मेथनॉल प्वाइजनिंग/ हूक ट्रेजेडी से ऐसे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.
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