20 की जगह हैं नौ बच्चे

Published at :07 Nov 2015 9:27 PM (IST)
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20 की जगह हैं नौ बच्चे

20 की जगह हैं नौ बच्चेबांका पोषण पुनर्वास केंद्र में नहीं पहुंचते हैं बच्चेक्षेत्र से कुपोषण के शिकार बच्चों की नहीं है कमीप्रचार प्रसार के अभाव में नहीं ले पाते हैं लाभ- पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की कमी. – सृष्टि इंटरनेशनल पटना द्वारा सदर अस्पताल में केंद्र का होता है संचालन- सचिव आरके सिन्हा […]

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20 की जगह हैं नौ बच्चेबांका पोषण पुनर्वास केंद्र में नहीं पहुंचते हैं बच्चेक्षेत्र से कुपोषण के शिकार बच्चों की नहीं है कमीप्रचार प्रसार के अभाव में नहीं ले पाते हैं लाभ- पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की कमी. – सृष्टि इंटरनेशनल पटना द्वारा सदर अस्पताल में केंद्र का होता है संचालन- सचिव आरके सिन्हा आइसीडीएस को इसके लिए ठहराते हैं जिम्मेवार. – क्षेत्र के कुपोषित बच्चे आंगनबाड़ी के माध्यम से ही पहुंचते हैं केंद्र तक – पोषण पुनर्वास पर 20 बच्चों के रहने का है इंतजाम – केंद्र के कर्मी व आंगनबाड़ी की लापरवाही से बच्चों की उपस्थिति है कम – कागजी खानापूर्ति कर योजना के रुपये की होती है लूट फोटो 07 बांका 10 सदर अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र की तसवीर प्रतिनिधि, बांकासरकार ने कुपोषित बच्चों की देखरेख व उसके समुचित इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र पर समुचित सुविधा मुहैया करायी है, लेकिन प्रचार-प्रसार व इससे संबंधित विभाग की लापरवाही से क्षेत्र के बच्चों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार पुनर्वास केंद्र पर वर्तमान में फुल्लीडुमर प्रखंड क्षेत्र के तीन, धौरैया प्रखंड के एक, बाराहाट के तीन, अमरपुर के एक व बांका प्रखंड क्षेत्र के एक, कुल नौ बच्चे हैं, जबकि यहां 20 बच्चों के लिए सरकार सारी व्यवस्था करती है. केंद्र पर बच्चों को लाने का कार्य आईसीडीएस के आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका पर है. इन्हें अपने पोषक क्षेत्र में कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर केंद्र तक पहुंचने का दायित्व सौंपा गया है, लेकिन इनकी लापरवाही के कारण केंद्र की क्षमता के 50 प्रतिशत बच्चे भी यहां नहीं पहुंच पाते हैं. संबंधित पदाधिकारी व कर्मी मामले में मौन हैं. पुनर्वास केंद्र के कर्मी द्वारा भी प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता है. सबों की मिली भगत से योजना की राशि की बंदर बांट कर ली जाती है. इसका नतीजा है कि क्षेत्र में कुपोषित बच्चों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है तथा लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं है. जरूरत है पोषण पुनर्वास केंद्र पर मिलने वाली सुविधाओं के प्रचार-प्रसार की. संबंधित कर्मी व पदाधिकारी के इमानदारी बरतने की. तभी क्षेत्र के कुपोषित बच्चों से मुक्त किया जा सकता है. इस संबंध में सृष्टि इंटरनेशनल पोषण पुनर्वास केंद्र के सचिव आरके सिन्हा ने बताया कि बच्चों को केंद्र तक लाने की जिम्मेवारी आइसीडीएस को सौंपी गयी है. अगर केंद्र पर बच्चे कम हैं, तो इनकी ही लापरवाही मानी जायेगी.

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