सड़कों पर चलती है धूल भरी आंधी

Published at :18 Oct 2015 9:26 PM (IST)
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सड़कों पर चलती है धूल भरी आंधी

सड़कों पर चलती है धूल भरी आंधी फोटो : 18 बांका 29 व 30 : सड़कों पर उड़ती है धूल व चिकित्सक डाॅ शैलेंद्र कुमार. प्रतिनिधि, बांका 305621 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला बांका जिला जो 11 प्रखंडों में विभक्त है. कुछ वर्ष पूर्व यहां की चमचमाती सड़कों से धूल के कन नहीं उड़ते थे, […]

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सड़कों पर चलती है धूल भरी आंधी फोटो : 18 बांका 29 व 30 : सड़कों पर उड़ती है धूल व चिकित्सक डाॅ शैलेंद्र कुमार. प्रतिनिधि, बांका 305621 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला बांका जिला जो 11 प्रखंडों में विभक्त है. कुछ वर्ष पूर्व यहां की चमचमाती सड़कों से धूल के कन नहीं उड़ते थे, लेकिन इधर करीब डेढ़ साल से जिला मुख्यालय सहित अन्य प्रखंडों में कहीं भी सड़क सही सलामत बचा ही नहीं है. सभी सड़क लगभग पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बरबाद हो चुका है. जहां की सड़कों पर मानो धूल भरी आंधी चलती हो. रोड खराब होने के क्या है कारण : बांका जिले में जो सड़कें बनी थी उसमें यह नियम विभाग के द्वारा लगाया गया था कि सड़कों का मरम्मत भी लगातार होनी चाहिए. लेकिन सड़क बनने में ही इतना वक्त ठेकेदारों के द्वारा लगाया गया कि मरम्मत की समय सीमा महज कुछ माह के लिए ही बची थी. जैसे ही समय सीमा समाप्त हुए ठेकेदार वापस चले गये. इस बीच जिले के चीर, सुखनिया, डकाय, चांदन, ओढ़नी, बडुआ सहित करीब एक दर्जन से अधिक नदियों से हो रहे बालू उठाव में चल रहे भारी वाहन भी सड़कों को क्षतिग्रस्त करने के लिए काफी है. सड़कों पर 25 से 30 टन तक का भार क्षमता है लेकिन इस पर 50 से 60 टन का भारी वाहन रोजाना गुजरते है. साथ ही इनकी संख्या सैकड़ों से ज्यादा रहती है. जिस कारण हंसडीहा भागलपुर मुख्य मार्ग पूरी तरह से खराब हो गया है. धूल भरी हवा से बढ़ रही है बीमारी सड़क पर ट्रैफिक के दबाव के कारण काफी धूल उड़ती है. लोग इसी सड़कों पर मजबूरी बस अपनी यात्रा करते हैं. यात्रा के दौरान उनके शरीर में धूल कन प्रवेश करते हैं जो बीमारी का घर है. चिकित्सकों के अनुसार इस धूल से दम्मा, खांसी, एलर्जी जैसी बीमारी बढ़ रही है. एलर्जी होने से लोगों में संक्रमण, बुखार सहित सबसे ज्यादा बीमारी श्वांस से संबंधित होती है. धूल भरी हवा का असर सीधे तौर पर फेफड़े पर होता है. जिससे अनैक प्रकार की समस्या होती है.क्या कहते हैं चिकित्सक सदर अस्पताल बांका में कार्यरत चिकित्सक सह आइएमए के जिला सचिव डाॅ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि धूल वाली हवा जानलेवा है. इससे लोगों को बचना चाहिए. जब भी वह अपने घर से बाहर निकलें तो नाक व मुंह को ढक कर चलें. घर पहुंच कर किसी साफ बरतन में पानी लेकर उसमें आंखों को डबोएं, जिससे आंखों में पड़ने वाले धूल निकल जाये और आंख सुरक्षित रहें. यदि ऐसा नहीं करते हैं तो आंखों से संबंधित रोग कंजंटीभाइटिस रोग होने की प्रबल संभावना रहती है.

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