बांका में जल्द होगी ड्रम सीडर से धनखेती की शुरुआत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jul 2018 6:11 AM (IST)
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केवीके की पहल पर बिंडी, मेड़ा व करजना में होगी ड्रम सीडर से सीधी बुआई बिना पेट्रोल, डीजल के खेत में दौड़ेगा ड्रम सीडर बांका : परंपरागत धान की खेती का समय अब ढलते जा रहा है. किसान कम लागत व पूंजी की रक्षा करते हुए धनखेती को सफलीभूत बनाने की मंशा रखते हैं. इसी […]
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केवीके की पहल पर बिंडी, मेड़ा व करजना में होगी ड्रम सीडर से सीधी बुआई
बिना पेट्रोल, डीजल के खेत में दौड़ेगा ड्रम सीडर
बांका : परंपरागत धान की खेती का समय अब ढलते जा रहा है. किसान कम लागत व पूंजी की रक्षा करते हुए धनखेती को सफलीभूत बनाने की मंशा रखते हैं. इसी कड़ी में कई पद्धतियां आती चली जा रही है. धान की सीधी बुआई से एक नयी कड़ी ड्रम सीडर यंत्र नाम से जुड़ने जा रही है. जी हां, बांका में पहली बार ड्रम सीडर से धान की सीधी बुआई की जायेगी. इस यंत्र की खासियत यह है कि इसे चलाने में किसी प्रकार का इंधन यानि डीजल व पेट्रोल की आवश्यकता नहीं पड़ती है. एक मात्र किसान तैयार खेत में इसे खींच कर चला सकता है. जानकारी के मुताबिक कृषि विज्ञान केन्द्र, बांका ड्रम सीडर से धान की बुआई की तैयारी में है. इसके लिए केवीके ने प्रमुख रुप से मेड़ा, बिंडी, व करजना गांव का चयन किया है. ड्रम सीडर यंत्र की आपूर्ति केवीके में हो चुका है. इस यंत्र की कीमत चार से पांच हजार के करीब है. ड्रम सीडर यंत्र से धान की बुआई पर किसान को काफी कम लागत लगता है. कई दूसरे प्रांत में यह यंत्र किसानों के घर-घर में पाया जाता है.
ड्रम सीडर से खेती के पूर्व बीज को करें अंकुरित
वैज्ञानिक के मुताबिक ड्रम सीडर यंत्र से धान की सीधी बुआई करने से 24 घंटा पूर्व धान बीज को भिगो देना होता है. जब बीज अंकुरित हो जाता है, तब खेत में इसकी बोआई यंत्र के माध्यम से कर दी जाती है. ज्ञात हो कि इस यंत्र की वजह से बिचड़ा तैयार करने से भी किसानों को मुक्ति मिल जाती है. इस यंत्र के आ जाने से किसानों को बहुत ही राहत मिलेगी.
ड्रम सीडर से श्रम, समय व लागत की बचत
ड्रम सीडर मशीन आधुनिक सोच का जन्म है. ड्रम सीडर मशीन में बने बॉक्स में धान का बीज रख दिया जाता है. मशीन खींचने के दौरान यह संयंत्र एक दूसरे से संपर्क कर स्वत: काम करने लगता है. डब्बे में रखे बीज अनुपात के मुताबिक खेत में गिर जाता है. ड्रम सीडर से श्रम, समय व लागत तीनों की बचत होती है. जानकारी के मुताबकि ड्रम सीडर से एक दिन में एक हेक्टेयर धान की बुआई आसानी से की जा सकती है.
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