तीन कमरों में पढ़ते हैं नौवीं से इंटर तक के स्टूडेंट्स

Published at :05 Jan 2016 6:52 PM (IST)
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तीन कमरों में पढ़ते हैं नौवीं से इंटर तक के स्टूडेंट्स

तीन कमरों में पढ़ते हैं नौवीं से इंटर तक के स्टूडेंट्स किसान इंटर विद्यालय में संसाधनों की कमी छात्रों की पढ़ाई भगवान भरोसे, इंटर साइंस में एक भी शिक्षक नहीं(फोटो नंबर-11)कैप्शन-किसान इंटर विद्यालय जगदीशपुर(कैंपस पेज के लिये) औरंगाबाद (नगर)सदर प्रखंड के राजकीयकृत किसान इंटर विद्यालय जगदीशपुर में संसाधनो की घोर कमी है. इसे विभाग की […]

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तीन कमरों में पढ़ते हैं नौवीं से इंटर तक के स्टूडेंट्स किसान इंटर विद्यालय में संसाधनों की कमी छात्रों की पढ़ाई भगवान भरोसे, इंटर साइंस में एक भी शिक्षक नहीं(फोटो नंबर-11)कैप्शन-किसान इंटर विद्यालय जगदीशपुर(कैंपस पेज के लिये) औरंगाबाद (नगर)सदर प्रखंड के राजकीयकृत किसान इंटर विद्यालय जगदीशपुर में संसाधनो की घोर कमी है. इसे विभाग की लापरवाही कहा जाये या फिर अनदेखी. इस विद्यालय का दर्जा तो भले ही इंटर का मिल गया, लेकिन संसाधन एक प्राइमरी स्कूल से भी कम है. किसान इंटर विद्यालय जगदीशपुर का भले ही क्षेत्रफल बड़ा हो लेकिन भवन व शिक्षकों की कमी से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है. विद्यालय नौवीं से इंटर तक के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है. हालांकि इस इंटर विद्यालय के आस-पास लगभग पांच-सात किलोमीटर में कोई इंटर विद्यालय नहीं है. तभी भी छात्र किसान इंटर विद्यालय छोड़ दूसरे विद्यालय या फिर जिला मुख्यालय स्थित विद्यालय में पढ़ाई करने जाने को विवश हैं. इंटर विद्यालय जगदीशपुर की स्थापना वर्ष 1971 में की गयी थी, लेकिन उस समय छात्रों की संख्या काफी कम थी. आज छात्रों की संख्या में भले ही इजाफा हो रहा है लेकिन संसाधन नहीं बढ़ाये जाने के कारण इसकी परेशानी छात्र ही नहीं बल्कि प्रबंधन को भी हो रही है. यहां मात्र तीन कमरों में ही नौवीं से इंटर के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है. वह भी 11 शिक्षकों के भरोसे. माध्यमिक में शिक्षकों की संख्या तो कुछ ठीक-ठाक है, पर उच्च माध्यमिक के साइंस में एक भी शिक्षक नहीं हैं. इस तरह की व्यवस्था से छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. इस विद्यालय में इंटर में 24 शिक्षकों का पद हैं पर चार ही शिक्षक नियुक्त हैं. किसान इंटर विद्यालय जगदीशपुर के प्राचार्य अर्जुन प्रजापत ने बताया कि इस विद्यालय में नौवीं से इंटर तक के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती है. पर विभाग की अनदेखी के कारण आज सब कुछ बेकार है. कमरों की कमी को देखते हुए वर्ष 2009 में तत्कालीन विधायक रामाधार सिंह ने भवन बनाने की नीव रखी थी. पर वो भी पूरा नही हो सका. भवन का अधूरे निर्माण करा कर छोड़ दिया गया है. 2015 में आयी भूकंप के दौरान कार्यालय भी क्षतिग्रस्त हो गया. इस पर भी अब तक कोई पहल नहीं की गयी. इस विद्यालय में संसाधनों की घोर अभाव है. भवन के अलावे शिक्षकों व कई बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है.

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