बिना पूंजी के कारोबारी हो रहे मालामाल

Published at :31 Dec 2015 7:37 AM (IST)
विज्ञापन
बिना पूंजी के कारोबारी हो रहे मालामाल

औरंगाबाद (सदर) : औरंगाबाद के अदरी नदी का स्वरूप बदलते जा रहा है. दरअसल नदी के तट की लगातार हो रही अवैध कटाई के कारण इसका अस्तित्व संकट में है. अवैध तरीके से तट को खोद कर मिट्टी का उठाव कर खुलेआम इसका सौदा किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक यह खेल नया तो […]

विज्ञापन

औरंगाबाद (सदर) : औरंगाबाद के अदरी नदी का स्वरूप बदलते जा रहा है. दरअसल नदी के तट की लगातार हो रही अवैध कटाई के कारण इसका अस्तित्व संकट में है. अवैध तरीके से तट को खोद कर मिट्टी का उठाव कर खुलेआम इसका सौदा किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक यह खेल नया तो नहीं पर कोई निगरानी नहीं होने के कारण मिट्टी के अवैध कारोबारियों को इसमें मजा आने लगा है. बिना पूंजी लगाये पैसे कमाने की लत इन्हें खूब जम रही है.

जिला प्रशासन के अधिकारी इस बात से अंजान भी नहीं, पर उन्हें कोई सूचना चाहिए होता है ताकि अवैध कारोबारियों की शिकायत मिलने पर उन्हें मौके पर पकड़ा जा सके. भला ये रिस्क कोई क्यों ले. इसलिये अवैध मिट्टी के कारोबारी की चांदी कट रही है. यही नहीं नदी के अस्तित्व को खतरे में डालने से पीछे नगर पर्षद भी है. शहर का सारा कचरा नदी के तट पर ही फेंका जाता है. वह भी वैसे स्थान पर जो नदी के सौंदर्य से जुड़ा है और कुछ वैसे स्थान हैं जहां नदी तट के किनारे लोग निवास करते हैं. हर रोज नदी की सुंदरता व स्वच्छता नगर पर्षद के इस कार्य से प्रभावित हो रही है.

कहीं खनन विभाग भी तो नहीं शामिल ?

जानकार बताते हैं कि इस नदी की खुदाई कोई आसान काम नहीं. इसमें खनन विभाग के अधिकारी की मिलीभगत भी होती है. नदी की मिट्टी नये मकान बनाने के दौरान भराई, खेतों की भराई व ईंट भट्ठों में उपयोग के लिए किये जाते हैं.

हालांकि खनन विभाग के पदाधिकारी बताते हैं कि उनकी जानकारी में अब तक कोई भी नहीं जो अवैध तरीके से मिट्टी की कटाई कर रहा है. इनका यह भी कहना है कि ईंट भट्ठों से नदी की मिट्टी का राजस्व वसूला जाता है. उनकी रॉयाल्टी कटती है. इसलिये वे गलत नहीं हैं. परंतु ईंट भट्ठों के अलावे भी अगर कोई अवैध कटाई करता है तो उसकी सूचना मिलने पर जरूर कार्रवाई की जायेगी.

नदी को बचाने के लिए प्रयास नहीं

लगातार अदरी नदी तट पर हो रही कटाई को रोकने का प्रयास स्थानीय स्तर पर कोई संगठन या जिला प्रशासन नहीं कर रहा. ऐसे में आखिर कौन नदी की सुरक्षा का बीड़ा उठाये, ये एक सवाल बना हुआ है.

नदियों को सुरक्षित व स्वच्छ रखने का बीड़ा तो सरकार ने उठा रखा है, पर छोटी नदियों को भी सुरक्षित करने का प्रयास बेहद जरूरी है. समाजसेवी कहते हैं कि जिला प्रशासन अगर जागरूकता कार्यक्रम शुरू करे तो इस मुहिम से हर समाजसेवी संगठन जुड़ सकते हैं. छोटी नदियों की भी एक अपनी कहानी होती है. नदियां शुरू से ही मानव जीवन की सभ्यता व संस्कृति का हिस्सा रही है, इसलिये इसे सहेजना बहुत जरूरी है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन