नैक के निरीक्षण से पहले रिहर्सल में जुटा सन्हिा कॉलेज

Published at :28 Nov 2015 7:55 PM (IST)
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नैक के निरीक्षण से पहले रिहर्सल में जुटा सन्हिा कॉलेज

नैक के निरीक्षण से पहले रिहर्सल में जुटा सिन्हा कॉलेज गुणवत्ता के मानदंडों को पूरा करने की कवायद तेज (फोटो नंबर-22)कैप्शन- सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज परिसर में छात्रों की चहलकदमी औरंगाबाद (सदर) सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय नैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडेटेशन कांउसिल) के निरीक्षण से पूर्व कॉलेज के तमाम चीजों को दुरुस्त करने में जुटा है. नैक […]

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नैक के निरीक्षण से पहले रिहर्सल में जुटा सिन्हा कॉलेज गुणवत्ता के मानदंडों को पूरा करने की कवायद तेज (फोटो नंबर-22)कैप्शन- सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज परिसर में छात्रों की चहलकदमी औरंगाबाद (सदर) सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय नैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडेटेशन कांउसिल) के निरीक्षण से पूर्व कॉलेज के तमाम चीजों को दुरुस्त करने में जुटा है. नैक संस्थान के गुणवत्ता की मानदंडों को पूरा करने के लिए सिन्हा कॉलेज रिहर्सल कर रहा है. जैसा कि कॉलेज प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी तीन से पांच दिसंबर तक नैक की टीम सिन्हा कॉलेज का निरीक्षण करेगी और कॉलेज के विधि व्यवस्था व छात्रों की सुविधाओं से संबंधित हर तरह के जरूरी सेवाओं को भांपेगी. नैक की गुणवत्ता के मानदंडों पर खरा उतरने के लिए कॉलेज हर स्तर पर तैयार हो रहा है. कॉलेज के पठन-पाठन व प्रयोगशाला की व्यवस्था को ठीक किया जा रहा है. वहीं कॉलेज के ऑडोटोरियम का सौंदर्यीकरण व कॉलेज कैंपस का रंगो रोगन किया जा रहा है. छात्र-छात्राओं के ड्रेस कोड को भी कॉलेज प्रशासन सख्ती से लागू किये हुए है. सिन्हा कॉलेज की स्थापना 1944 में हुई थी. तब से लेकर अब तक सिन्हा कॉलेज में बहुत से परिवर्तन हुए है. कई प्राचार्य आये और चले भी गये, अब तक कॉलेज का शैक्षणिक कार्य पारंपरिक तरीके से ही चलता रहा है. पर, कॉलेज का भौगोलिक विकास व शिक्षा व्यवस्था में नवीनीकरण का प्रयास प्राचार्य डाॅ ओमप्रकाश सिंह द्वारा ही संभव हो पाया. कॉलेज प्रशासन व छात्र भी मानते हैं कि पहले से कई गुणा बेहतर शिक्षा व्यवस्था हुई है और कॉलेज का कायाकल्प भी. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से छात्र-छात्राओं के लिए महाविद्यालय के अंतरिक श्रोत से छात्रावास, विज्ञान भवन, व्याख्यान कक्ष, छात्र कॉमन रूम, जीव विज्ञान प्रयोगशाला, आइटी प्रयोगशाला, एमसीए प्रयोगशाला, भौतकी प्रयोगशाला, लाइब्रेरी भवन व स्वर्ण जयंती द्वारा का निर्माण कराया गया है. इसका सौंदर्यीकरण व नवीनीकरण प्राचार्य श्री सिंह द्वारा किया जा रहा है. कॉलेज की सुंदरता के लिए कॉलेज परिसर में गार्डेन बनाये गये है और अब छात्रों के शारीरिक विकास के लिए कॉलेज तके जिम की स्थापना की जा रही है, जो दो से तीन दिनों में बन कर तैयार हो जायेगा. जानकारी के अनुसार, हाल के वर्षों में परीक्षफल के आंकड़े बताते हैं कि महाविद्यालय के सभी विषयों में औसतन 70 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने प्रथम श्रेणी के अंक प्राप्त किये हैं. वहीं विश्वविद्यालय स्तर के प्रतियोगी परीक्षा व खेल-कूद में भी कॉलेज अग्रणी रहा है. बेहतर नतीजों से जहां एक ओर छात्र-छात्रों का मनोबल बढ़ा है वहीं सिन्हा कॉलेज का कद भी पहले से और ऊंचा हुआ है. अब एक बार फिर नैक की नजर में सिन्हा कॉलेज नंबर वन बनने की तैयारी कर रहा है. क्या हैं नैकनैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडेटेशन कांउसिल) राष्ट्रीय मूल्यांकन व प्रत्यायन (मान्यता) परिषद. इसकी स्थापना 1994 में हुई. इसका मुख्यालय बेंगलुरू है. सरकार की यह स्वतंत्र इकाई किसी भी शैक्षिक संस्था की गुणवत्ता की स्थिति को समझने के लिए प्रयोग किया जाता है. वास्तव में यह मूल्यांकन यह निर्धारित करता है कि कोई भी शैक्षिक संस्था या विश्वविद्यालय प्रमाणन एजेंसी द्वारा निर्धारित गुणवत्ता के मानकों के किसी स्तर तक पूरा कर रहा है. गुणवत्ता के मानदंड के अंतर्गत शैक्षिक प्रक्रियांओ में संस्था का प्रदर्शन, पाठयक्रम चयन व कार्यान्वयन, शिक्षण अधिगम, मूल्यांकन व त्रों के परिणाम, संकाय सदस्यों का अनुसंधान कार्य व प्रकाशन बुनियादी, सुविधाएं तथा संसाधनों की स्थिति, संगठन, प्रशासन व्यवस्था, आर्थिक स्थिति व छात्र सेवाएं आदि आती हैं.

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