उमंगा की पहाड़ी का हो विकास पर्यटन की हैं असीम संभावनाएं
Updated at : 06 Jan 2018 6:02 AM (IST)
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हरे-भरे पेड़ों से गुलजार यह पहाड़ी हैं आकर्षण का केंद्र दो से पांच किमी क्षेत्र में फैले इस पहाड़ी पर हैं कई पिकनिक स्पॉट मदनपुर : सूबे की सरकार एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नित नयी योजनाएं संचालित कर रही है. वहीं दूसरी ओर मदनपुर थाना क्षेत्र के उमंगा पहाड़ी और […]
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हरे-भरे पेड़ों से गुलजार यह पहाड़ी हैं आकर्षण का केंद्र
दो से पांच किमी क्षेत्र में फैले इस पहाड़ी पर हैं कई पिकनिक स्पॉट
मदनपुर : सूबे की सरकार एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नित नयी योजनाएं संचालित कर रही है. वहीं दूसरी ओर मदनपुर थाना क्षेत्र के उमंगा पहाड़ी और सीताथापा में पर्यटन की असीम संभावनाओं के बावजूद कोई ध्यान नहीं दे रही है. छोटे-बड़े किसी भी त्योहार के मौसम में यह पहाड़ी सैलानियों से गुलजार रहता है. मदनपुर या आसपास की जगहों पर कोई भ्रमण स्थल या मनोरंजन स्थल नहीं है. उमंगा पहाड़ी और सीताथापा ही एक ऐसी जगह है जहां घूमने के भरपूर संसाधन हैं. हरे-भरे पेड़ों से गुलजार यह पहाड़ी आनेवाले लोगों को आकर्षित करता है. लगभग 2 से 5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले इस पहाड़ी पर कई आकर्षक पिकनिक स्पॉट भी है. उमंगा पहाड़ के पास की सड़क दक्षिण दिशा के गांव की ओर निकल जाती है, जहां से हरी-भरी वादियों का लुत्फ उठाया जा सकता है.
पहाड़ पर कई देवी-देवताओं के मंदिर
इस पहाड़ी पर मां उमंगेश्वरी मंदिर है, जिनके नाम से पहाड़ प्रसिद्ध है. इसके अलावे सूर्य मंदिर, बजरंगबली मंदिर, गौरी- शंकर मंदिर, फुटलकी मठ , बाबा मटूक भैरव नाथ मंदिर सहित 52 मंदिर हैं. इसके अलावा एक यज्ञ मंडप भी है, जहां यदाकदा धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होता है.
औषधीय पौधों से भरा है जंगल
कई आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि इस पहाड़ी पर कई असाध्य रोगों के उपचार की दवा मौजूद है. कमजोर हृदय, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एक्जिमा समेत कई रोगों के उपचार की दवा मौजूद है. यदि सरकार इस ओर ध्यान देकर अनुसंधान करावे तो कई असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों को इसका समुचित लाभ मिल सकता है.
कई मनोरंजक स्पॉट हैं मौजूद
उबड़-खाबड़ पहाड़ पर बच्चों को खेलने और घूमने के कई स्पॉट हैं. पास में हनुमानगढ़ी तालाब के साथ 52 बिगहा में फैला तालाब उस जगह को और मनोरंजक बना देता है.
कब बढ़ते हैं सैलानी
किसी भी छोटे-बड़े त्योहार के अलावे 25 दिसंबर, 31 दिसंबर, 1 जनवरी, 14 जनवरी के साथ-साथ माघ श्रीपंचमी को लगने वाले मेले के अलावा अन्य धार्मिक अनुष्ठान के समय पहाड़ पर लोग घूमने आते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
वन विभाग मदनपुर के रेंजर शिव कुमार राम ने बताया कि सरकार की मनसा है कि इसे संरक्षित किया जाये. इसके अलावा यदि पर्यटन पर ध्यान दिया जाये, तो इससे सरकार को राजस्व की भी प्राप्ति हो सकती है.
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