सरकारी-गैर सरकारी बिल्डिंग में आग से बचाव की तैयारी नहीं

Updated at : 30 Aug 2017 10:18 AM (IST)
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सरकारी-गैर सरकारी बिल्डिंग में आग से बचाव की तैयारी नहीं

लापरवाही. सरकारी नियमों की अनदेखी बन सकती है बड़े हादसे का सबब फायर व लाइफ सेफ्टी के अनुपालन को लेकर गंभीर नहीं जिले के अग्रणी संस्थान औरंगाबाद सदर : जिले के सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों में भवन की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह के मापदंड का पालन नहीं किया जा रहा है. इन भवनों […]

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लापरवाही. सरकारी नियमों की अनदेखी बन सकती है बड़े हादसे का सबब
फायर व लाइफ सेफ्टी के अनुपालन को लेकर गंभीर नहीं जिले के अग्रणी संस्थान
औरंगाबाद सदर : जिले के सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों में भवन की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह के मापदंड का पालन नहीं किया जा रहा है. इन भवनों में अग्निशमन यंत्र व पानी की व्यवस्था नहीं है. नियमानुसार सभी सार्वजनिक संस्थानों व बहुमंजिला निजी भवनों में अग्निशमन यंत्र का होना जरूरी है.
इसके लिए सरकार ने कड़े नियम भी बनाये हैं व कई तरह के मानदंड निर्धारित किये हैं. औरंगाबाद शहर में ऐसे सैकड़ों भवन हैं, जिनमें अग्निसुरक्षा के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. इतना ही नहीं अग्निसुरक्षा के नियमों की भी अनदेखी की जा रही है. राष्ट्रीय भवन कोड द्वारा फायर एंड लाइफ सेफ्टी के अनुपालन को लेकर अस्पतालों व नर्सिंग होम के लिए भी गाइड लाइन जारी की गयी है. सरकार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार इन भवनों में अग्निशमन पदाधिकारी की नियुक्ति भी होनी चाहिए.
नियुक्त करना है अग्निशमन पदाधिकारी : केंद्र सरकार के एनबीसी पार्ट चार 2016 के अनुसार किसी भी अस्पताल सेनोटोरिया, कास्टोडियल संस्थान व मेंटल संस्थानों में जिनकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक हो, उनमें तीन वर्ष अनुभव वाले अग्निशमन पदाधिकारी की नियुक्ति करनी है, ताकि अग्निसुरक्षा का समुचित प्रबंध हो सके. जिले में इस तरह की कोई नियुक्ति नहीं की गयी है.
प्रत्येक माह स्वमूल्यांकन करने का है नियम : फायर सेफ्टी को लेकर सरकार ने भवन मालिकों को प्रत्येक माह स्वमूल्यांकन करने की गाइड लाइन जारी करते हुए कहा है कि किसी भी हादसे के लिए संबंधित भवन के मालिक या पदाधिकारी जिम्मेवार होंगे. 12 अगस्त, 2017 को जारी निर्देश के अनुसार सभी व्यावसायिक, शैक्षणिक व सांस्थिक भवनों में फायर सेफ्टी का अनुपालन करना है, ताकि किसी भी तरह के हादसे से बचा जा सके. हालांकि जिले के संस्थानों में इसका पालन नहीं किया जा रहा है. वहीं विभाग भी सुस्त पड़ा हुआ है. ऐसे भवन हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं.
प्रत्येक तल पर अग्निशमन यंत्र व हॉज बॉक्स की करनी है व्यवस्था
बहुमंजिली इमारतों सहित अन्य सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में फायर सेफ्टी के तहत सभी तलों पर फायर इक्स्टिंगग्विशर व हॉज बॉक्स की व्यवस्था करनी है, ताकि आग लगने की सूरत में अविलंब इन उपकरणों के माध्यम से उस पर काबू पाया जा सके और लोगों के जीवन व भवन को बचाया जा सके. इन भवनों में फायर कंट्रोल रूम का भी निर्माण किये जाने का नियम है, ताकि वहां से फायर सेफ्टी के लिए सुविधाजनक तरीके से कार्य किया जा सके.
फायर अलार्म जरूरी
अस्पतालों सहित अन्य सरकारी भवनों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों व बहुमंजिली निजी भवनों में भी फायर अलार्म सिस्टम लगाना जरूरी है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में फायर अलार्म के माध्यम से जानकारी मिल सके और उस पर अविलंब कार्रवाई की जा सके.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
ऐसी बिल्डिंग्स की जांच की जाती है. गड़बड़ी पाये जाने पर कार्रवाई की जाती है. जिले के सभी पीएचसी की जांच की गयी, जहां आग से बचाव के उपाय बताये गये थे.
इसके अलावा शहर के निजी अस्पतालों की जांच भी की जायेगी. विभाग के नियमों और फायर सेफ्टी का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है. किसी भी विभाग में अब तक अग्निशमन पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं की गयी है. हालांकि अग्निशमन विभाग द्वारा समय-समय पर आग से बचाव के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता है.
पंचानन सिंह, जिला अग्निशमन पदाधिकारी, औरंगाबाद
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