शादी हुए हो गये 50 साल, अब भी पगडंडी से होता है ससुराल आना-जाना

Updated at : 04 Dec 2019 9:27 AM (IST)
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शादी हुए हो गये 50 साल, अब भी पगडंडी से होता है ससुराल आना-जाना

विष्णुदेव झा बेदी, अररिया : जोकीहाट प्रखंड अंतर्गत केसर्रा पंचायत के थुवड़ी गांव में गांव के निर्माण के समय से ही नक्शे पर सड़क नहीं है. यह गांव खुट्टी चौक से दक्षिण सिसवा मालोपारा जाने वाली सड़क के किनारे स्थित है. इस गांव में करीब दो हजार से अधिक की आबादी बसती है. इनमें सर्वाधिक […]

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विष्णुदेव झा बेदी, अररिया : जोकीहाट प्रखंड अंतर्गत केसर्रा पंचायत के थुवड़ी गांव में गांव के निर्माण के समय से ही नक्शे पर सड़क नहीं है. यह गांव खुट्टी चौक से दक्षिण सिसवा मालोपारा जाने वाली सड़क के किनारे स्थित है. इस गांव में करीब दो हजार से अधिक की आबादी बसती है. इनमें सर्वाधिक आबादी दलित समुदाय के पासवान परिवार की है. गांव में सड़क का आलम यह है कि गांव की बसाहट के समय से ही आवागमन के लिए खेतों के मेड़ के सहारे ही ग्रामीण आना-जाना करते हैं.
सूखे के समय में तो ग्रामीण मेड़ के सहारे गांव से बाहर निकलकर प्रखंड मुख्यालय समेत अन्य जगह आवागमन कर लेते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी बारिश के समय में होती है. बरसात के समय में यह गांव टापू में तब्दील हो जाता है. गांव के चारों ओर बांसझाड़ी है. यहां एक आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 126 का भी संचालन होता है. गांव में एक स्कूल भी है, बच्चे पढ़ाई के लिए स्कूल भी जाते हैं. इन सबके बावजूद यहां मुख्य सड़क तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है.
अपनी बानगी सुनाती हुई गांव की ही एक वृद्ध महिला जानकी देवी ने बताया कि उनकी शादी हुए करीब 50 वर्ष बीत गये, लेकिन जब से वे शादी के बाद मायके से अपनी ससुराल आयी हैं, तभी से वे गांव के खेत के मेड़ से ही आना-जाना कर रही हैं. आज तक ग्रामीणों के लिए एक सड़क नहीं बन पायी है. यह गांव खुट्टी व धर्मेश्वरगछ मौजा के बीच बसा है.
विधायक-पूर्व सांसद का प्रयास रहा विफल: विधायक शाहनवाज आलम व पूर्व सांसद सरफराज आलम ने लोगों से बैठक कर गांव में सड़क निर्माण के लिए अनुरोध किया था. इस सड़क के लिए ग्रामीणों को जमीन देने की अपील भी की थी.
इसका मुआवजा सरकार से दिला देंगे. इस पर सहमत हुए लोगों के विश्वास पर विधायक शाहनवाज आलम व पूर्व सांसद सरफराज आलम ने एनएच 327-ई से गांव तक सड़क निर्माण का शिलान्यास भी किया. काले पत्थर में शिलान्यास की तिथि, प्राक्कलित राशि भी अंकित की गयी.
इससे गांव के लोगों में उत्साह था. लेकिन शिलालेख जमीन पर गिर पड़ा, लेकिन सड़क का निर्माण नहीं हो पाया. सबसे अहम यह कि उसी गांव के नागेश्वर पासवान वर्तमान में केसर्रा पंचायत के मुखिया भी हैं.
कोई भी ग्रामीण नहीं देना चाहते जमीन
ग्रामीण व पंचायत के मुखिया ने सड़क नहीं होने के बाबत कहा कि यही तो अफसोस की बात है. नक्शे में गांव में सड़क है ही नहीं. कोई भी ग्रामीण जमीन देना नहीं चाहते हैं. सड़क निर्माण के लिए मुआवजे की राशि भी आ गयी थी. लेकिन जमीन नहीं मिलने की वजह से सरकारी खजाने में लौट गयी.
वर्तमान सांसद ने भी भरोसा दिया है कि गांव तक सड़क का निर्माण चाहे जैसे भी हो करायेंगे जरूर. उन्होंने कहा कि अभी तो सुखाड़ का समय है. खेत के मेड़ से भी लोग चौक-चौराहे पर आ जा रहे हैं. लेकिन बरसात के समय इस गांव में कोई आना नहीं चाहता. कुटुंब-परिजन भी इस गांव में आने से परहेज करते हैं.
बरसात के दिनों में कोई बीमार पड़ता है तो उसे गोदी में उठाकर, कंधे पर लादकर सड़क पर लाया जाता है. इस पीड़ा को कब तक सहेगा यह गांव, यह हमें भी मालूम नहीं. लेकिन गांव के लोग इस मामले को लेकर आक्रोशित हो रहे हैं. विधानसभा चुनाव में वोट बहिष्कार का मन बना रहे हैं.
खुट्टी चौक से दक्षिण सिसवा मालोपारा जाने वाली सड़क किनारे स्थित है थुवड़ी गांव, गांव में बसती है दो हजार की आबादी
सड़क निर्माण के लिए ग्रामीणों से जमीन खरीदने को मुआवजे की राशि भी आयी, जमीन नहीं मिलने से लौट गयी राशि
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