इस वर्ष हो चुकी हुई हैं चार शादियां

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अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन के रूप में सरकार दे रही एक लाख रुपये अररिया : दहेज उन्मूलन को लेकर वर्ष 1961 में सख्त कानूनी प्रावधान प्रभावी होने के बावजूद इस पर अंकुश का अब तक सिफर ही रहा है. कानूनी तौर पर दहेज लेना और देना दोनों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. […]

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अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन के रूप में सरकार दे रही एक लाख रुपये

अररिया : दहेज उन्मूलन को लेकर वर्ष 1961 में सख्त कानूनी प्रावधान प्रभावी होने के बावजूद इस पर अंकुश का अब तक सिफर ही रहा है. कानूनी तौर पर दहेज लेना और देना दोनों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके बाद भी दहेज गंभीर सामाजिक बुराई के रूप में हमारे समाज में लगातार अपनी जड़ें मजबूत करता जा रहा है. इस कुप्रथा से तंग आज की युवा पीढ़ी तेजी से अंतरजातीय विवाह की और उन्मुख हुए हैं, जो अब तक दहेज उन्मूलन की दिशा में एक कारगर हथियार का रूप लेने लगा है. दहेज उन्मूलन की दिशा में इसकी महत्ता को समझते हुए सरकार ने ऐसी शादियों को प्रोत्साहित करने के लिए अपने स्तर से प्रोत्साहन राशि के रूप में एक लाख रुपये दिये जाने की घोषणा कर रखी है. वर्ष 2016 से लेकर अब तक ऐसे 19 शादियों का रिकार्ड जिला निबंधन कार्यालय में दर्ज है. इसमें चार शादियां तो इसी साल हुई है.
अंतरजातीय विवाह करने वाले ग्यारह दंपतियों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान की जानकारी है. अमूमन जब दो अलग जाति के लड़का व लड़की आपसी प्रेम व लगाव के कारण एक साथ जीवन बिताने का संकल्प लेकर वैवाहिक रिश्ते में बंधने का निर्णय लेते हैं, तो इसे अंतरजातीय विवाह की श्रेणी में रखा जाता है. वैसे ऐसी शादियों को हमारा समाज नीची नजर से देखता है. लेकिन धीरे-धीरे समाज के इस नजरिया में काफी बदलाव आया है. इस कारण दहेज प्रथा रूपी सामाजिक बुराई को अंतरजातीय विवाह हर कदम पर मात देने लगी है.
शादी के दो साल तक प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन देना जरूरी
अंतरजातीय विवाह के दो साल के भीतर प्रोत्साहन राशि के लिए समाज कल्याण विभाग को आवेदन दिया जा सकता है. आवेदन कर्ता दंपति को अलग-अलग फॉर्म भर कर इसके साथ जाति प्रमाणपत्र संलग्न किये जाने अनिवार्य है.
संबंधित प्रखंड के बीडीओ आवेदनकर्ता के दावे की जांच कर निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को सौंपते हैं. इसके बाद आवेदनकर्ता नव दंपती को प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया जाता है.
प्रोत्साहन राशि के रूप में पहले मिलते थे महज 25 हजार
समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी अनुसार 14 अप्रैल 2014 से पूर्व अंतरजातीय विवाह करने वालों को प्रोत्साहन राशि के रूप में महज 25 हजार का भुगतान किया जाता था. बाद में प्रोत्साहन राशि के रूप में देय राशि को बढ़ा कर 50 हजार कर दिया गया. दहेज उन्मूलन की दिशा में इसकी महत्ता को स्वीकारते हुए सरकार ने इसमें फिर से बदलाव करते हुए दो दिसंबर 2015 से प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जाने वाली राशि को बढ़ा कर एक लाख रुपये कर दिया गया. अंतरजातीय विवाह की बड़ी संख्या मंदिरों में संपन्न होती है. वर व वधू पक्ष के लोगों के सामंजस्य से की जाने वाली ऐसी अधिकांश शादियां मंदिरों में संपन्न होती है. अगर वर-वधू के परिजन शादी के पक्ष में नहीं होते ऐसी दशा में भी चोरी छिपे मंदिरों में शादी को प्राथमिकता दी जाती है. मंदिरों में शादी से पूर्व वर-वधू के उम्र को ज्यादा महत्व दिया जाता है. हालांकि मंदिरों में होने वाली शादियों में परिजनों की मौजूदगी को अनिवार्यता दी जाती है.
11 लोगों को मिली है प्रोत्साहन राशि
समाज कल्याण विभाग को अंतरजातीय विवाह करने वाले 19 दंपतियों ने प्रोत्साहन राशि के लिए अपना आवेदन दिया था. इसमें कुल 11 लोगों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया गया है. शेष आठ नव दंपतियों को भी जल्द ही प्रोत्साहन राशि के भुगतान का आश्वासन उन्होंने दिया.
प्रणव कुमार, बाल संरक्षण पदाधिकारी
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