विभाग से पंजीकृत दुकान कृषि यंत्र पर वसूलते हैं ज्यादा रकम

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अररिया : गुरुवार को जिला कृषि कार्यालय में आयोजित दूसरे कृषि यांत्रिकरण मेला में किसानों की मौजूगदी नगण्य रही. देर दोपहर तक मेला का विधिवत उद्घाटन तक नहीं हो सका. इस बीच विभागीय अधिकारी व मेला में पहुंचे गिने-चुने किसान इधर उधर भटकते नजर आये. मेला में आये किसानों से जब प्रभात खबर ने किसानों […]

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अररिया : गुरुवार को जिला कृषि कार्यालय में आयोजित दूसरे कृषि यांत्रिकरण मेला में किसानों की मौजूगदी नगण्य रही. देर दोपहर तक मेला का विधिवत उद्घाटन तक नहीं हो सका. इस बीच विभागीय अधिकारी व मेला में पहुंचे गिने-चुने किसान इधर उधर भटकते नजर आये. मेला में आये किसानों से जब प्रभात खबर ने किसानों की कम उपस्थिति के कारणों को जानना चाहा.
तो किसानों ने कई रोचक तथ्यों का खुलासा किया. दियारी मजगामा के किसान दिनेश कुमार ने कृषि योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाने की बात कही. उन्होंने कहा मार्च 2016 में उन्होंने विभाग को 12 सौ रुपये अदा कर हाइब्रिड धान का बीज खरीदा था. बीज की खरीदारी पर शतप्रतिशत अनुदान था. लेकिन इसका भुगतान अब तक नहीं हो सका है. गैयारी के किसान हरेंद्र यादव ने कहा कि किसानों को योजनाओं की कोई जानकारी नहीं है. विभागीय अधिकारी की किसानों तक पहुंच सीमित है.
उन्होंने कहा कि बीते साल कृषि यंत्र बिक्री व अनुदान वितरण में जिस तरह के मामले सामने आये. इससे कृषि यंत्र की खरीदारी करने से किसान डर रहे हैं. जब तक यांत्रिकरण घोटाले की जांच कर दोषी पर उचित कार्रवाई नहीं होती है. तो इस स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं हो सकता है. गैयारी वार्ड संख्या 16 के किसान मो शहनवाज ने कहा कि कृषि संबंधी सभी योजना में डीबीटी सिस्टम लागू है. लेकिन अगर किसान खाद, बीज व यंत्र की खरीदारी करते हैं.
तो अनुदान प्राप्त होने में सालों लग जाता है. इस बीच किसान विभाग का चक्कर लगाते थक जाते हैं. बांसबाड़ी पंचायत के किसान नौशाद आलम के मुताबिक किसानों को अनुदान लाभ के लिए सालों विभाग का चक्कर लगाना पड़ता है. यंत्र खरीदारी के लिए मेला पहुंचे नौशाद ने कहा कि विभाग से पंजीकृत दुकान यंत्र पर बाजार दाम से ज्यादा मूल्य वसूल रहे हैं. पंजीकृत दुकानों की जानकारी किसानों को नहीं है. ऐसे में वह कौन से दुकान से किसी यंत्र की खरीदारी करे इसे लेकर किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
बांसबाड़ी गरगद्दी के किसान वसीकुर्रहमान ने कहा कि गांव के किसानों को मेला की कोई जानकारी नहीं है. पंचायत समिति ने मेला की जानकारी दी तो मेला में आये हैं. किस दुकान से यंत्र खरीदे इसका पता नहीं चल रहा है. योजना के क्रियान्वयन में उन्होंने पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया. बांसबाड़ी के मो युनूस ने कहा कि यंत्र की खरीदारी पर विभाग से संबद्ध दुकानदार बाजार मूल्य से 12 प्रतिशत अधिक दाम वसूल रहे हैं. नगर परिषद वार्ड संख्या पांच के बिनु मंडल की समस्या इससे अलग थी. उन्होंने कहा कि मोबाइल मैसेज में परमिट जारी करने की सूचना मिली है.
मेला में परमिट के लिए पहुंचने पर संबंधित अधिकारी के नहीं आने की बात कही जा रही है. हृदयपुर के ही किसान सुनील मेहता ने कहा कि मैने पंप सेट के लिए छह माह पहले ऑनलाइन आवेदन किया था. मेरे बाद आवेदन करने वाले किसान पंपसेट का उठाव कर चुके हैं. लेकिन मुझे अब तक परमिज नहीं मिल पाया है.
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