प्रशासनिक चूक की वजह से छठ घाट पर डूब कर हुई युवक की मौत
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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छठ घाट पर नहीं की गयी थी बैरीकेडिंग अररिया : छठ महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को एबीसी नहर में डूबने से हुई युवक के मौत की घटना से शहरवासी शोकाकुल हैं. महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान इस तरह की घटनाओं से पूरा जनमानस खुद को आहत महसूस करता है, जहां हजारों की भीड़ जमी हो. […]
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छठ घाट पर नहीं की गयी थी बैरीकेडिंग
अररिया : छठ महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को एबीसी नहर में डूबने से हुई युवक के मौत की घटना से शहरवासी शोकाकुल हैं. महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों के दौरान इस तरह की घटनाओं से पूरा जनमानस खुद को आहत महसूस करता है, जहां हजारों की भीड़ जमी हो. किसी अप्रिय घटना से निबटने के लिए आला प्रशासनिक अधिकारी तैनात किये गये हों. लोगों की सुरक्षा के लिए दर्जनों पुलिस जवान वहां मौजूद हों. इसके बाद भी मदद के अभाव में किसी के जान गंवाने का वाकया बेहद दुखी करने वाला है.
घटना के प्रत्यक्षदर्शी तो मौत के इस मामले में प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हैं. उनकी मानें तो लंबे समय तक युवक मदद के लिए तड़पता रहा. लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिलने पर अंत में उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी. घटना जहां घटित हुई वहां अपेक्षा से ज्यादा पानी था. दुर्घटनास्थल के करीब 30 फीट के दायरे में नहर में अवैध खनन के कारण गहरा गड्ढा था.
इसके बाद भी एहतियात के तौर पर वहां किसी तरह की कोई बैरिकेडिंग नहीं की गयी थी, जबकि महापर्व से पूर्व वरीय अधिकारी लगातार घाटों का निरीक्षण करते दिखे. लगातार घाटों पर छठ श्रद्धालुओं की सुरक्षा व लोगों की सुविधा के पुख्ता इंतजाम का दावा किया जाता रहा. इसके बाद भी ऐसी घटनाएं सीधे तौर पर प्रशासनिक इंतजाम पर सवाल खड़े करते हैं. छठ पूजा के दौरान जहां हजारों लोग प्रवाहित जल में उतरते हों वहां तो ऐसे घटना की संभावना बहुत अधिक होती है. इसके बावजूद वहां किसी प्रशिक्षित गोताखोर की तैनाती नहीं की गयी थी. नहर छठ घाट पर तो कोई मोटर बोट भी नहीं दिखा. हालांकि इसके लिए नहर में पानी कम होने का बहाना हो सकता है.
लेकिन क्या नहर में गड्ढे वाली जगह को पूर्व से ही चिह्नित नहीं किया जा सकता था. इसमें किसी के प्रवेश को रोकने के लिए इसकी उचित घेराबंदी नहीं की जा सकती थी. ऐसे हालात से निबटने के लिए वहां तैनात जवानों को लाइफ जैकेट जैसे उपकरण दिये जाने की जरूरत प्रशासन ने क्यों महसूस नहीं की. घटना के दूसरे दिन शहर वासी इस तरह के सवाल और इसका जवाब तलाशने की जुगत में लगे रहे. लोग ने सीधे तौर पर युवक की मौत के लिए प्रशासनिक चूक को जिम्मेदार बताया.
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