विफल रही है आईलीग, लेकिन आईएसएल को मिली सफलता: भूटिया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Dec 2015 1:25 PM (IST)
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नयी दिल्ली : पूर्व कप्तान और अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) के मौजूदा सलाहकार बाईचुंग भूटिया ने स्वीकार किया है कि आठ साल पुराना आईलीग फुटबाल टूर्नामेंट विफल रहा है और उनका मानना है कि ‘सफल’ इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के आईलीग के साथ संभावित विलय से पहले आईएसएल को कुछ और सत्र देने चाहिए. […]
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नयी दिल्ली : पूर्व कप्तान और अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) के मौजूदा सलाहकार बाईचुंग भूटिया ने स्वीकार किया है कि आठ साल पुराना आईलीग फुटबाल टूर्नामेंट विफल रहा है और उनका मानना है कि ‘सफल’ इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के आईलीग के साथ संभावित विलय से पहले आईएसएल को कुछ और सत्र देने चाहिए.
वर्ष 2011 में संन्यास लेने से पहले लंबे समय तक भारतीय फुटबाल के शीर्ष स्टार रहे और 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले भूटिया ने कहा कि आईलीग दर्शकों और मीडिया को आकर्षित करने में नाकाम रही है जबकि दो सत्र पुरानी आईएसएल इसमें सफल रही है.
कल रात यहां भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भूटिया ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो आईलीग सफल नहीं थी और यही कारण है कि आईएसएल आयी. फुटबाल प्रशंसक आईलीग के मैच देखने नहीं आ रहे थे, मीडिया उन्हें (आईलीग मैच) कवर नहीं करना चाहता था.” उन्होंने कहा, ‘‘आईलीग अगर सफल होती तो आईएसएल नहीं आती. आईलीग विफल रही और इसलिए आईएसएल शुरु हुई और हमने देखा है कि अब तक यह (आईएसएल) सफल रही है.”
आईलीग और आईएसएल के संभावित विलय की चर्चाओं के बीच भूटिया से जब इस बारे में पूछा गया तो सलाहकार के अलावा एआईएफएफ की तकनीकी समिति के प्रमुख की भी भूमिका निभा रहे इस पूर्व कप्तान ने कहा कि उन्हें तुरंत इन दो लीग के विलय की संभावना नजर नहीं आती.
खेल में योगदान के लिए पिछले महीने एशियाई फुटबाल हाल अॅाफ फेम में शामिल किए गए भूटिया ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि आईएसएल हो. अगले साल मुझे लगता है कि आईएसएल में मौजूदा पांच की जगह छह भारतीय होने चाहिए। इसके बाद दो या तीन साल में विदेशी खिलाडियों की संख्या चार कर देनी चाहिए जो आईलीग में मौजूदा नियम है. इसके बाद ही हम दो लीग के विलय के बारे में सोच सकते हैं.” भूटिया ने कहा कि जब तक युवा विकास कार्यक्रम पर जोर नहीं दिया जाता तब तक देश में फुटबाल की स्थिति में सुधार नहीं होगा.
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