पृथ्वी से हमारा जुड़ाव

Published at :07 Sep 2016 6:51 AM (IST)
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पृथ्वी से हमारा जुड़ाव

हमारा भौतिक शरीर बुनियादी रूप से धरती, जल, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों का एक मेल है. धरती इन पांचों तत्वों में सबसे बुनियादी और स्थायी तत्व है. अधिकतर लोग वास्तव में अपने शरीर और मन का ही अनुभव करते हैं. पृथ्वी तत्व को अपने भीतर से जानना और महसूस करना भी योगिक प्रकिया का […]

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हमारा भौतिक शरीर बुनियादी रूप से धरती, जल, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों का एक मेल है. धरती इन पांचों तत्वों में सबसे बुनियादी और स्थायी तत्व है. अधिकतर लोग वास्तव में अपने शरीर और मन का ही अनुभव करते हैं. पृथ्वी तत्व को अपने भीतर से जानना और महसूस करना भी योगिक प्रकिया का हिस्सा है. जब भी आप खाना खाते हैं, तो आप धरती के एक हिस्से को निगल रहे होते हैं.

यानी जैसा व्यवहार हम अपने शरीर के साथ करेंगे, वैसा ही व्यवहार हम अपनी धरती के साथ भी करेंगे. यह देखना सबसे महत्वपूर्ण है कि हमारे शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक कल्याण में धरती तत्व क्या भूमिका अदा करती है. अगर यह तत्व आपका सहयोग न करे, तो आप कहीं नहीं बढ़ सकते. जब तक आप खुद को अपने भौतिक अस्तित्व से पूरी तरह से अलग नहीं कर पाते, तब तक यह तत्व आपके जीवन की हर चीज को निर्धारित करता रहेगा.

अब सवाल है कि पृथ्वी के साथ संबंध कैसे स्थापित किया जाये? हरेक जीव-जंतु ने बोध का अपना एक स्तर तय किया हुआ है, उसी के अनुसार वे जीवन को एक खास तरह से अनुभव करते हैं. जानवर धरती से काफी हद तक जुड़े होते हैं, क्योंकि उनके पास वैसी बुद्धिमत्ता और जागरूकता नहीं होती, जैसी इनसानों के पास होती है. इनसानों के अस्तित्व पर उनकी मनावैज्ञानिक चेतना हावी हो जाती है. अगर आप किसी मछली को पानी से निकालेंगे, तो वह तुरंत वापस उसी पानी में जाना चाहेगी. ऐसा सिर्फ उनके जीवन-रक्षा की वजह से नहीं है, बल्कि अपने प्राकृतिक निवास से एक खास तरह का परिचय भी एक कारण होता है.

उस संदर्भ में वे धरती के साथ अपने संबंधों को जानते हैं. लेकिन जब वे धरती या पानी में होते हैं, तो उनमें इनके प्रति जागरूकता नहीं होती. प्रकृति ने हमें बुद्धि व जागरूकता के एक अलग स्तर तक विकसित कर दिया है, लेकिन हम लोग इसको स्वीकारने से मना कर रहे हैं. जाहिर है कि आप हवा, पानी या धरती के बिना नहीं रह सकते. अगर कोई इनमें से एक भी चीज आपसे लेने की कोशिश करता है, तो आप बुरी तरह से उसे वापस पाने की कोशिश करते हैं.

-सद्गुरु जग्गी वासुदेव

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