आत्मिक कल्याण की दिशा

आनेवाले वक्त में इंसान कई रूपों में इस तरह से सशक्त होगा, जिसकी पहले कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. इसकी वजह होगी कुछ खास तरह की टेक्नोलॉजी का विकास. अगर इंसान विज्ञान और टेक्नोलॉजी के विकास का लाभ उठाना चाहता है, तो यह बेहद महत्वपूर्ण है कि इसे संभालने के लिए वो […]
आनेवाले वक्त में इंसान कई रूपों में इस तरह से सशक्त होगा, जिसकी पहले कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. इसकी वजह होगी कुछ खास तरह की टेक्नोलॉजी का विकास. अगर इंसान विज्ञान और टेक्नोलॉजी के विकास का लाभ उठाना चाहता है, तो यह बेहद महत्वपूर्ण है कि इसे संभालने के लिए वो भीतरी तौर पर तैयार हो. अगर ऐसा नहीं होगा, तो यह विकास अपने आप में विनाशकारी साबित होगा.
मैंने सोचा कि इस दिशा में हमें कुछ न कुछ करना चाहिए, क्योंकि हम दूसरे बहुत से लोगों से कई मायनों में ज्यादा शिक्षित, जानकार और बेहतर हालत में हैं कि इस दिशा में कुछ समाधान पेश कर सकें. हर देश अपने यहां एक खास तादाद में इंजीनियर, डॉक्टर, सैनिक, कारोबारी या खिलाड़ी तैयार करने की योजना बनाता है. लेकिन उस देश के लिए ऐसे लोगों को तैयार करना भी जरूरी हो जाता है, जो वैज्ञानिक तरीके से समाज के आत्मिक कल्याण के लिए कुछ कर सकें.
एक बच्चे को जन्म देना किसी औरत के लिए एक बड़ा अनुभव होता है, क्योंकि वह जिंदगी की रचना भले ही नहीं कर रही हो, लेकिन नयी जिंदगी लाने का जरिया जरूर बन रही है. इसी तरह से एक शिक्षक के तौर पर आपके जरिये भौतिक चीजों की अपेक्षा कहीं अधिक बुनियादी चीज आकार ले रही होती है. आज भारत के ऊपर ऐसे शिक्षक तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी है, जो इंसान के आत्मिक कल्याण की दिशा में काम कर सकें.
।। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ।।
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