कृषि कानूनों की वापसी सही फैसला

Published by :Ashutosh Chaturvedi
Published at :22 Nov 2021 7:46 AM (IST)
विज्ञापन
कृषि कानूनों की वापसी सही फैसला

छोटे किसानों के समक्ष संकट है, क्योंकि खेती लाभकारी काम नहीं रह गयी है, लेकिन किसानों को भी अपने तौर-तरीके बदलने होंगे.

विज्ञापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है. इन कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसान लगभग पिछले एक साल से विरोध कर रहे थे. किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई कई चरणों की बातचीत से भी कोई समाधान नहीं निकल सका था. यही वजह है कि केंद्र सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं. प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है.

आगामी संसद सत्र में हम इन कानूनों को रद्द करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर देंगे. हमारी सरकार किसानों, खास कर छोटे किसानों के कल्याण के लिए देश व कृषि के हित में, गांव-गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए पूरी सत्य निष्ठा और नेक नीयत से ये कानून लेकर आयी थी. हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाये. कृषि अर्थशास्त्रियों, वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए सभी विषयों पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने के लिए एक कमिटी का गठन किया जायेगा, जिसमें केंद्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, किसान, कृषि वैज्ञानिक तथा कृषि अर्थशास्त्री होंगे. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य भी एक बड़ा सवाल है.

उस पर भी कानून बन जाए, क्योंकि किसान जो फसल बेचता है, वह कम कीमत पर बेचता है, जिससे बड़ा नुकसान होता है. हालांकि कृषि कानूनों की वापसी पर पक्ष-विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं. ऐसा भी माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि उसे किसानों की नाराजगी के कारण आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक नुकसान की आशंका थी.

यह सच है कि खासकर छोटे किसानों के समक्ष संकट है, क्योंकि खेती लाभकारी काम नहीं रह गयी है. छोटी जोत के सामने संकट बड़ा है. उन्हें उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है. उनका उत्पाद तो मंडियों तक भी नहीं पहुंच पाता है, बीच में ही बिचौलिये उन्हें औने-पौने दामों में खरीद लेते हैं. छोटे व मझौले किसान अपनी फसल में जितना लगाते हैं, उसका आधा भी नहीं निकल पाता. यही वजह है कि आज किसान कर्ज में डूबा हुआ है.

किसानों पर बैंक से ज्यादा साहूकारों का कर्ज है. यह सही है कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में खासी वृद्धि की है, लेकिन खेती में लागत भी बढ़ गयी है. अन्य व्यावहारिक समस्याएं भी हैं, जैसे सरकारें बहुत देर से खरीद शुरू करती हैं, तब तक किसान आढ़तियों को उपज बेच चुके होते हैं.

भूमि के मालिकाना हक को लेकर भी विवाद पुराना है. जमीनों का एक बड़ा हिस्सा बड़े किसानों, महाजनों और साहूकारों के पास है, जिस पर छोटे किसान काम करते हैं. ऐसे में अगर फसल अच्छी नहीं होती, तो छोटे किसान कर्ज में डूब जाते हैं. दूसरी ओर, बड़े किसान प्रभावशाली हैं, वे सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ भी लेते हैं और राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित करते हैं, लेकिन यह भी सच है कि किसानों को भी अपने तौर-तरीकों को बदलना होगा.

पुराने तरीकों से वे कभी लाभ की स्थिति में नहीं आ सकेंगे. उन्हें मिट्टी की जांच व सिंचाई की ड्रिप तकनीक जैसी नयी विधाओं को अपनाना होगा. गेहूं व धान के अलावा अन्य नगदी फसलों की ओर भी ध्यान देना होगा. ऐसी फसलों के बारे में भी सोचना होगा, जिनके लिए कम पानी की जरूरत होती है. कई राज्यों में सोया, सूरजमुखी और दालों की खेती कर किसान अच्छा लाभ कमा रहे हैं. किसानों को खेती के अलावा मछली, मुर्गी और पशुपालन से भी अपने आपको जोड़ना होगा, तभी यह फायदे का सौदा बन पायेगी.

सौभाग्य से बिहार और झारखंड में कृषि के बड़े संस्थान हैं, जहां उच्च कोटि के अनुसंधान हो रहे हैं, लेकिन चिंता यही है कि ये संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र बन कर न रह जाएं, क्योंकि इनका फायदा इस क्षेत्र के किसानों को मिलता नजर नहीं आ रहा है. एक और संकट है कि नयी पीढ़ी खेती में नहीं जा रही है. छोटे किसानों को तो छोड़िए, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के समृद्ध किसानों के बच्चे भी इसमें आगे नहीं आ रहे हैं. उन्हें नौकरी व अन्य काम-धंधे ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं.

कुछ समय पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी अखिल भारतीय ऋण और निवेश सर्वेक्षण की रिपोर्ट से यह चौंकाने वाली बात सामने आयी कि 2019 में 50 फीसदी से अधिक किसान परिवारों पर कर्ज था तथा उन पर प्रति परिवार औसतन 74,121 रुपये कर्ज था. सर्वे में बताया गया है कि कर्ज में से केवल 69.6 फीसदी बैंक, सहकारी समितियों और सरकारी एजेंसियों जैसे संस्थागत स्रोतों का था, जबकि 20.5 फीसदी कर्ज सूदखोरों से लिया गया था.

इसके अनुसार कुल कर्ज में से 57.5 फीसदी ऋण कृषि उद्देश्य से लिये गये थे. सर्वे के अनुसार, प्रति कृषक परिवार की औसत मासिक आय 10,218 रुपये थी, जिसमें मजदूरी से प्राप्त प्रति परिवार औसत आय 4,063 रुपये, फसल उत्पादन से 3,798 रुपये, पशुपालन से 1,582 रुपये, गैर-कृषि व्यवसाय से 641 रुपये और भूमि पट्टे से 134 रुपये की आय हुई थी. सर्वे से पता चलता है कि 83.5 फीसदी ग्रामीण परिवारों के पास एक हेक्टेयर से कम जमीन है, जबकि केवल 0.2 फीसदी के पास 10 हेक्टेयर से अधिक जमीन है.

जब भी किसान आंदोलन होता है, तो विमर्श में स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें जरूर आती हैं. किसानों की समस्याओं का अध्ययन करने के लिए हरित क्रांति के जनक प्रो एमएस स्वामीनाथन की अगुवाई में नवंबर, 2004 में एक कमेटी बनी थी, जिसने अक्तूबर, 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस कमेटी की सबसे प्रमुख सिफारिश थी कि कृषि को राज्यों की सूची के बजाय समवर्ती सूची में लाया जाए, ताकि केंद्र व राज्य दोनों किसानों की मदद के लिए आगे आएं और समन्वय बनाया जा सके.

कमेटी ने यह भी सुझाव दिया था कि किसानों को अच्छी क्वालिटी का बीज कम-से-कम दाम पर मुहैया कराया जाए और उन्हें फसल की लागत से पचास प्रतिशत ज्यादा दाम मिले. कमेटी ने सिफारिश की थी कि किसानों के कर्ज की ब्याज दर चार प्रतिशत तक लायी जाए. इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती है कि किसानों के हित के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को आगे आना होगा और ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जिनसे किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके.

विज्ञापन
Ashutosh Chaturvedi

लेखक के बारे में

By Ashutosh Chaturvedi

मीडिया जगत में तीन दशकों से भी ज्यादा का अनुभव. भारत की हिंदी पत्रकारिता में अनुभवी और विशेषज्ञ पत्रकारों में गिनती. भारत ही नहीं विदेशों में भी काम करने का गहन अनु‌भव हासिल. मीडिया जगत के बड़े घरानों में प्रिंट के साथ इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का अनुभव. इंडिया टुडे, संडे ऑब्जर्वर के साथ काम किया. बीबीसी हिंदी के साथ ऑनलाइन पत्रकारिता की. अमर उजाला, नोएडा में कार्यकारी संपादक रहे. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साथ एक दर्जन देशों की विदेश यात्राएं भी की हैं. संप्रति एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्य हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola