ब्रिटेन में मोदी

Updated at : 13 Nov 2015 5:49 AM (IST)
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ब्रिटेन में मोदी

भारत में दीवाली के पटाखे फूट चुके हैं, लेकिन ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के लाखों लोग 13 नवंबर की शाम भी पटाखे जलाएंगे, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन के वेम्बले स्टेडियम में अप्रवासी भारतीयों के बड़े हुजूम को संबोधित करेंगे. ‘ओलिंपिक स्टाइल’ में होनेवाले इस बहुप्रतीक्षित आयोजन में 60 हजार से अधिक लोगों की […]

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भारत में दीवाली के पटाखे फूट चुके हैं, लेकिन ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के लाखों लोग 13 नवंबर की शाम भी पटाखे जलाएंगे, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन के वेम्बले स्टेडियम में अप्रवासी भारतीयों के बड़े हुजूम को संबोधित करेंगे.
‘ओलिंपिक स्टाइल’ में होनेवाले इस बहुप्रतीक्षित आयोजन में 60 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी की उम्मीद है. ब्रिटेन एवं तुर्की की पांच दिवसीय यात्रा के लिए प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार को लंदन पहुंच चुके हैं. उनके दौरे की अहमियत को ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के इन शब्दों में पढ़ा जा सकता है- ‘यह सिर्फ एक ऐतिहासिक यात्रा नहीं है; एक ऐतिहासिक अवसर भी है.
यह इतिहास, लोगों और मूल्यों से बंधे दो देशों के लिए एक मौका है, हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों पर काबू पाने के लिए एक साथ काम करने का. प्रधानमंत्री मोदी और मैं दोनों हाथों से उस मौके को पकड़ना चाहते हैं, ऐसा करके हम दुनिया के दो बड़े देशों को और बड़ा बना सकते हैं.’
ब्रिटेन की तीन दिनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का फोकस दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर होगा. इस दौरान 18 अरब डॉलर के द्विपक्षीय करार पर हस्ताक्षर की उम्मीद है. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा की उम्मीद है.
मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब करीब एक माह पहले ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इंगलैंड यात्रा हुई है. जिनपिंग की यात्रा को चीन और इंगलैंड के बीच व्यापार बढ़ाने के एक बड़े अवसर के रूप में सराहा गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में ब्रिटिश मीडिया में मोदी के दौरे और भारत-ब्रिटेन संबंधों को लेकर व्यापक उम्मीदें जतायी गयी हैं.
इसी कड़ी में ‘संडे टाइम्स’ में प्रकाशित अपने एक लेख में प्रधानमंत्री मोदी ने भी लिखा है कि ‘एक साझा इतिहास, द्विपक्षीय सहयोग का एक समृद्ध अनुभव, साझा मूल्यों, राजनीतिक व्यवस्था की समानता और बहुलतावाद में आम विश्वास, ये भारत-ब्रिटेन रिश्तों की अडिग नींव हैं.’ ब्रिटेन दौरे के बाद प्रधानमंत्री जी20 देशों के सम्मेलन में भाग लेने तुर्की जाएंगे. हालांकि, जी20 के देशों में से ब्रिटेन भारत में सर्वाधिक निवेश करनेवाला देश है.
ऐसे में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के शब्दों की जुगलबंदियां यह उम्मीद तो जगा ही रही हैं कि मोदी के इस दौरे से भारत-ब्रिटेन के रिश्तों में मजबूती का एक नया दौर शुरू हो सकता है. जाहिर है, देश को उनके इस दौरे से आनेवाले शुभ समाचारों का इंतजार है.
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