आइपीएल का नशा

Updated at : 24 May 2018 12:31 AM (IST)
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आइपीएल  का नशा

क्रिकेट भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है, फिर भी इसके प्रति लोगों की दीवानगी और युवाओं का जुनून देखते ही बनता है. अघोषित रूप से आज क्रिकेट ही भारत का राष्ट्रीय खेल बन गया है. चाहे शहर हो या गांव, मैदान में क्रिकेट का बल्ला लेकर रन बनाने को दौड़ते हुए बच्चे और जवान मिल […]

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क्रिकेट भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है, फिर भी इसके प्रति लोगों की दीवानगी और युवाओं का जुनून देखते ही बनता है. अघोषित रूप से आज क्रिकेट ही भारत का राष्ट्रीय खेल बन गया है.
चाहे शहर हो या गांव, मैदान में क्रिकेट का बल्ला लेकर रन बनाने को दौड़ते हुए बच्चे और जवान मिल जायेंगे. जिस दिन किसी दमदार टीम की भिड़ंत होती है, उस दिन तो मैच देखने के लिए लोग टीवी से चिपक जाते हैं. 2008 से इंडियन प्रीमियर लीग शुरू होने के बाद से तो क्रिकेट का नशा सर चढ़ कर बोल रहा है.
युवा वर्ग पर आइपीएल का प्रभाव सबसे ज्यादा है. इस टूर्नामेंट का जो क्रेज और ग्लैमर अपने देश में है, वैसा किसी दूसरे देश में नहीं. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न देशों के खिलाड़ी कंधे से कंधा मिलाकर भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए जी-जान लगाते हैं. हर साल प्रतिभावान युवा खिलाड़ी सामने आते हैं. उन्हें अनुभवी खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है.
अनित कुमार राय टिंकू, बाघमारा, धनबाद
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