ranchi

  • Jan 19 2020 1:08AM
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आजीवन कारावास की सजा काट रहे 139 कैदी होंगे रिहा

आजीवन कारावास की सजा काट रहे 139 कैदी होंगे रिहा
  •  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की अनुशंसा को दी मंजूरी
  • पांच केंद्रीय, एक मंडल कारा व एक  खुला जेल में बंद कैदी को किया जायेगा रिहा
रांची  : मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे 139 कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया है. राज्य के पांच केंद्रीय कारागार, एक मंडल कारा व एक  खुला जेल सह पुनर्वास कैंप से 139 बंदियों को रिहा करने की राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री ने शनिवार को स्वीकृति दे दी. एक-दो दिनों में कैदियों को रिहा करने की कार्रवाई की जायेगी. 
 
आजीवन कारावास की सजा पाये बंदियों जिनकी लंबी सजा अवधि बीत गयी है और कारागार में बेहतर आचरण है, उनके उम्र और उनके किये गये अपराध की प्रकृति आदि पर राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद विचार करती है और अपनी अनुशंसा करती है. मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलते ही अब ये सभी बंदी अपने परिवारवालों के साथ रह सकेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा है कि अपराधी के जीवन में समाज हित में बदलाव लाना ही सजा का ध्येय होता है. 
 
बता दें कि नवंबर 2019 में राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक में कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया गया था. लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण जेल मुख्यालय का प्रस्ताव गृह विभाग के जरिये मुख्यमंत्री के पास नहीं भेजा जा सका था. इस वजह से कैदियाें को रिहा करने में विलंब हुआ. 
 
समाज के लिए सकारात्मक कार्य करें : मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी शुभकामनाएं रिहा हो रहे बंदियों के साथ हैं. 
 
उन्होंने अपील की है कि रिहा हो रहे बंदी नये सिरे से अपनी जिंदगी को शुरू करते हुए देश, राज्य, समाज और अपने परिवार के प्रति अपनी महती जिम्मेदारी का निर्वहन करें. उन्होंने कहा कि मेरे लिये शासन एक जिम्मेदारी का अहसास है. रिहा हो रहे बंदी भी अपने जिम्मेदारी बोध के साथ समाज के लिए सकारात्मक कार्य करें. 
 
 
किस कारागार से कितने बंदी होंगे रिहा 
झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद द्वारा बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार से 62, लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग से 26, केंद्रीय कारा दुमका से 29, केंद्रीय कारा घाघीडीह (जमशेदपुर) से 14, केंद्रीय कारा मेदिनीनगर (पलामू) से चार, मंडल कारा चाईबासा से तीन  और खुला जेल-सह-पुनर्वास कैंप हजारीबाग से एक आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी को रिहा किया जायेगा.
 
नवंबर में परिषद की बैठक में कैदियों को जेल से रिहा करने का हुआ था निर्णय
पांच सेंट्रल जेलों में बंद हैं 5860 कैदी, सैकड़ों ने नहीं की है अपील
 
रांची : राज्य के सभी जेलों में कुल 18,729 बंदी हैं. इनमें से सेंट्रल जेलों में एक फरवरी 2020 तक 5860 सजायाफ्ता कैदी हैं, जबकि अंडर ट्रायल 12,869 आरोपी हैं. अभी स्थिति यह है कि सैकड़ों सजायाफ्ताअों की अोर से अब तक अपील दायर नहीं की गयी है.
 
लिहाजा वैसे कैदियों की पहचान के लिए  झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अॉथोरिटी (झालसा) की अोर से 26 जनवरी से सर्च अभियान शुरू किया जायेगा, जो 29 फरवरी तक चलेगा.  इस दाैरान किसी भी कारणों से अपील दायर नहीं करनेवाले सजायाफ्ताअों को  खोज कर उनकी अोर से अपील दायर करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जायेगी.  
 
उनसे जरूरी दस्तावेज व वकालतनामा पर हस्ताक्षर लेकर झालसा की तरफ से  अधिवक्ता मुहैया कराया जायेगा, ताकि वह हाइकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील  दायर कर सकें. अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि झारखंड राज्य में एक भी  ऐसा सजायाफ्ता नहीं रहना चाहिए, जिसकी अोर से अपील दायर नहीं की गयी हो.
 
अभियान को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार व  जिला प्रशासन द्वारा  बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल होटवार रांची,  लोक  नायक जयप्रकाश नारायण सेंट्रल जेल हजारीबाग, पलामू सेंट्रल जेल, दुमका  सेंट्रल जेल, घाघीडीह सेंट्रल जेल जमशेदपुर, गिरिडीह सेंट्रल जेल व देवघर सेंट्रल जेल में टीमें भेजी  जायेगी. टीम के सदस्य सभी सजायाफ्ताअों (कैदियों) से मिल कर उनके केस  (अपील) के विषय में जानकारी हासिल कर आवश्यक अग्रेतर कार्रवाई करेंगे.
 
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