फिर बिगड़ सकता है मौसम का मिजाज, पढ़ें ला नीना का देश पर क्या पड़ेगा असर

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दुनिया के कुछ हिस्सों में सूखे और अन्य में भारी वर्षा और बाढ़ आने की संभावना जाहिर की गयी है. इसका असर दुनिया भर के तापमान पर भी पड़ेगा. दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य तापमान से नीचे रिकॉर्ड होने की संभावना है जबकि उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य तापमान हो सकती है.

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एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है. मौसम वौज्ञानिकों ने इसी तरफ इशारा किया है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने गुरुवार को स्पष्ट तौर पर संकेत दिया है कि कमजोर ला नीना के लगातार दूसरे वर्ष सितंबर और नवंबर के बीच उभरने की संभावना है.

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दुनिया के कुछ हिस्सों में सूखे और अन्य में भारी वर्षा और बाढ़ आने की संभावना जाहिर की गयी है. इसका असर दुनिया भर के तापमान पर भी पड़ेगा. दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य तापमान से नीचे रिकॉर्ड होने की संभावना है जबकि उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य तापमान हो सकती है. यह आमतौर पर अल नीनो के रूप में मौसम और जलवायु पर विपरीत प्रभाव डालता है, जो तथाकथित अल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) का गर्म चरण है.

भारी बारिश, बाढ़ और सूखे जैसे मौसम और जलवायु पैटर्न पर ENSO का प्रभाव पड़ता है. भारत में अल नीनो सूखे या कमजोर मानसून से जुड़ा है जबकि ला नीना मजबूत मानसून और औसत से अधिक बारिश और ठंडी सर्दियों से जुड़ा है.डब्ल्यूएमओ के अनुसार, सितंबर-नवंबर में ईएनएसओ-न्यूट्रल और ला नीना स्थितियों के लिए 40% मौका है. इसके उभरने का अनुमान अक्टूबर-दिसंबर और नवंबर-जनवरी में है.

WMO के अनुसार, भारत, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना थोड़ी बढ़ गई है. अपने बयान में विश्व मौसम विभाग ने बताया है कि एशिया, दक्षिण अमेरिका के चरम उत्तरी भागों, दक्षिण पश्चिम प्रशांत में इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के भूमध्यरेखीय भागों और न्यूजीलैंड के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है.

देश में वर्तमान मानसून वर्षा की कमी 7% कम हो जाएगी. मध्य भारत में वर्तमान में वर्षा में 7% की कमी है और 10% की कमी है; उत्तर पश्चिम भारत में 14% की कमी; पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 10% की कमी और दक्षिण प्रायद्वीप में 13% अधिक होने का अनुमान लगाया गया है. “ला नीना के वर्षों के दौरान, ठंडी मध्य अक्षांशीय पश्चिमी हवा अंतर्देशीय में प्रवेश करती हैं.

समझें क्या है ला नीना

ये स्पैनिश भाषा एक शब्द है, जिसका अर्थ है छोटी बच्ची. पूर्वी प्रशांत महासागर क्षेत्र के सतह पर निम्न हवा का दबाव होने पर ये स्थिति पैदा होती है. इससे समुद्री सतह का तापमान काफी कम हो जाता है.

इसका सीधा असर दुनियाभर के तापमान पर होता है और वो भी औसत से ठंडा हो जाता है.ला नीना से चक्रवात पर भी असर होता है. ये अपनी गति के साथ उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की दिशा को बदल देती है.

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