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किसान संगठन ने कहा- तंबाकू नियंत्रण नीतियां बनाते समय स्थानीय उद्यमों और किसानों का रखा जाना चाहिये ध्यान

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नयी दिल्ली : किसानों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर्स एसोसिएशंस (एफएआईएफए) ने सरकार से कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित तंबाकू किसानों की वित्तीय बदहाली के प्रति संवेदनशील होने का शुक्रवार को आग्रह किया. संगठन ने कहा कि देश में तंबाकू नियंत्रण की नीतियों पर प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल' (स्थानीय उत्पादों के प्रति मुखर होने) के आह्वान को अमल में लाया जाना चाहिये.

इसके साथ ही संगठन ने कहा कि सरकार को पश्चिमी दुनिया की नकल करने से बचना चाहिये और भारत में तंबाकू के सेवन के प्रारूप को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने चाहिये. एफएआईएफए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात के वाणिज्यिक फसलों के किसानों का प्रतिनिधि होने का दावा करता है.

संगठन ने सिगरेट पर कर की दरों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहले के स्तर तक कम करने की भी मांग की. उसने कहा कि ऐसा करने से विदेशी ब्रांडों की तस्करी पर लगाम लगेगी और प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल की तर्ज पर भारतीय उद्यमों व किसानों को लाभ मिलेगा.

एफएआईएफए के अध्यक्ष जवारे गौड़ा ने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ‘टोबैको कंट्रोल पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन (जम्बाकू नियंत्रण पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन) के प्रभाव में, सरकार ने कठोर नियमों को लागू किया है जैसे कि सिगरेट पैकेट पर छापे जाने वाले चित्रात्मक चेतावनियों का आकार बढ़ाना, वर्ष 2012-13 के बाद से सिगरेट पर दंडात्मक कराधान को तीन गुना करना तथा निर्यात लाभों को समाप्त करना जैसे कठोर नियमों को लागू किया है.

उन्होंने कहा कि ये नीतियां, पिछली सरकारों द्वारा पश्चिमी दुनिया की विरासत के नकल का परिणाम हैं, जहां भारत की तुलना में सिगरेट के रूप में 91 प्रतिशत तंबाकू का उपभोग होता है, जबकि भारत में तम्बाकू की कुल खपत का करीब नौ प्रतिशत सिगरेट के जरिये होता है

Posted By : Mohan Singh

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