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Coronavirus Pandemic: घर पर ही ठीक हो सकते हैं 90% मरीज, ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की कब जरूरत? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

By Prabhat khabar Digital
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चर्चा में शामिल, डॉ रणदीप गुलेरिया, डॉ नरेश त्रेहन, डॉ नवीत विग और डॉ सुनील कुमार.
चर्चा में शामिल, डॉ रणदीप गुलेरिया, डॉ नरेश त्रेहन, डॉ नवीत विग और डॉ सुनील कुमार.
ANI

नयी दिल्ली : कोरोना (Corona) से संक्रमित सभी मरीजों को न तो ऑक्सीजन (Oxygen) की जरूरत है और न ही अस्पताल में भर्ती होने की. चिकित्सक की सलाह अपनाते हुए और कुछ दवाइयों का सेवन कर घर पर रहकर भी अधिकतर लोग ठीक हो सकते हैं. ये भारत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नयी दिल्ली के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया (Dr. Randeep Guleria) ने कही. उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर (Ramdesivir) को जादुई गोली नहीं है. यह केवल अस्पताल में भर्ती गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर ही इस्तेमाल होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार सभी मरीजों को ऑक्सीजन की भी जरूरत नहीं है. कुछ प्राणायाम और पेट के बल लेटकर अपना ऑक्सीजन लेवल बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने चिकित्सकों और आम लोगों से अपील की है कि घबराएं नहीं. घबराहट में ऑक्सीजन और दवाओं को बर्बाद न करें. जिन्हें उसकी ज्यादा जरूरत है, उन्हें ही दी जानी चाहिए. डॉ गुलेरिया के साथ समाचार एजेंसी एएनआई के फेसबुक पेज पर हो रही चर्चा में मेदांता अस्पताल के अध्यक्ष डॉ नरेश त्रेहन, एम्स के प्रोफेसर डॉ नवीत विग और स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक डॉ सुनील कुमार भी मौजूद थे.

क्या कहते हैं मेदांता के डॉ नरेश त्रेहन

मेदांता के चेयरमैन डॉ नरेश त्रेहन का कहना है कि जैसे ही आपकी आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, मेरी सलाह होगी कि आप अपने स्थानीय डॉक्टर से सलाह लें, जिसके साथ आप संपर्क में हैं. सभी डॉक्टर कोविड प्रोटोकॉल जानते हैं और उसी के अनुसार आपका इलाज शुरू करेंगे. समय पर सही दवा दी जाए तो 90 प्रतिशत मरीज घर पर ठीक हो सकते हैं.

क्या कहते हैं महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ सुनील कुमार

डॉ सुनील कुमार कहते हैं कि समाचारों आदि पर ज्यादा ध्यान केंद्रित न करें, केवल चुनिंदा समाचार देखें. एक व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी चल रही है. इस पर बिलकुल भी ध्यान न दें. कोविड 19 प्रोटोकॉल का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते पालन करें. मीडिया और डॉक्टरों को भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना होगा. उन्होंने कहा कि 2020 में एक नया वायरस हमारे देश में आया और हम तैयार नहीं थे. सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए टेस्टिंग को काफी बढ़ाया.

डॉ सुनील कहते हैं कि हमें विश्वास होना चाहिए कि हमारी सरकार, डॉक्टरों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, महामारी विज्ञानियों के सुझावों के साथ ठोस और वैज्ञानिक कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि टीकों को लेकर भी कई अफवाह फैलाये जा रहे हैं. बता दें कि वैक्सीन के कोई गंभीर दुष्परिणाम नहीं है, बल्कि यह नगण्य है. वैक्सीन और कोविड को लेकर ​​उपयुक्त व्यवहार दो चीजें हैं जो हमें श्रृंखला को तोड़ने में मदद करेंगी.

क्या कहते हैं एम्स के विशेषज्ञ डॉ नवीत विग

एम्स के मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ नवीत विग ने कहा कि अगर हमें बीमारी को हराना है तो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बचाना होगा. कई स्वास्थ्य कार्यकर्ता कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं. अगर हम स्वास्थ्य कर्मचारियों को बचाते हैं तो वे रोगियों को बचाने में सक्षम होंगे. अगर हम दोनों को बचाएंगे, तभी हम अर्थव्यवस्था को बचा पाएंगे. यह एक दूसरे से जुड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा कि अन सभी चीजों को बचाने के लिए हमें श्रृंखला को तोड़ना होगा. हमें रोगियों की संख्या को नीचे लाना होगा. हमारा एकमात्र लक्ष्य श्रृंखला को तोड़ना होना चाहिए. हम भारत में सकारात्मकता दर को 5 फीसदी से भी कम कर सकते हैं. अगले 3 हफ्तों में अगर हम सभी जिम्मेदारी लेते हैं और COVID के खिलाफ उचित व्यवहार करते हैं तो यह संभव है.

Posted By: Amlesh Nandan.

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