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विंग कमांडर अभिनंदन को मां से विरासत में मिली है वीरता

Updated at : 04 Mar 2019 7:23 AM (IST)
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विंग कमांडर अभिनंदन को मां से विरासत में मिली है वीरता

चेन्नई : पाकिस्तान से भारत वापस आये अभिनंदन के साहस, उनकी वीरता और धैर्य की हर ओर तारीफ हो रही है. भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को ये गुण अपनी मां डॉक्टर शोभा से मिले हैं. डॉक्टर शोभा भारतीय वायुसेना में सर्जन रही हैं. बेटे की वापसी पर उनकी अगुवाई के लिए जब शुक्रवार […]

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चेन्नई : पाकिस्तान से भारत वापस आये अभिनंदन के साहस, उनकी वीरता और धैर्य की हर ओर तारीफ हो रही है. भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को ये गुण अपनी मां डॉक्टर शोभा से मिले हैं. डॉक्टर शोभा भारतीय वायुसेना में सर्जन रही हैं.
बेटे की वापसी पर उनकी अगुवाई के लिए जब शुक्रवार की रात वह पति के साथ चेन्नई से िदल्ली जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट मेें सवार हुईं थीं, तब साथी यात्रियों ने उत्साह पूर्वक उनका स्वागत किया.
उनमें से कुछ ऐसे लोग थे, जो उन्हें अच्छे से जानते थे. उन लोगों ने डॉ शोभा को देखते ही उनकी धैर्यता और बहादुरी को विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से जोड़ लिया. डॉ शोभा ने दूर-दराज के युद्ध ग्रस्त देशों और दुनिया के कुछ खतरनाक इलाकों में घायलों को ठीक किया है. सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ के गणपति ने कहा, वह जैसी हैं वैसी ही दिखती हैं. डॉ गणपति डॉ शोभा के बैचमेट और उनके पारिवारिक मित्र भी. उन्होंने कहा, डॉ शोभा बहुत ही प्यारी और बुद्धिमान छात्रा थीं.
डॉ शोभा ने मद्रास मेडिकल कॉलेज से 1973 में एमबीबीएस किया. उसके बाद उन्होंने अनीस्थिया की ट्रेनिंग ली. फिर रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड चली गयीं. अपने करियर में उन्होंने मेडेकिंस सैंस फ्रंटियर्स (एमएसएफ) के लिए स्वेच्छा से काम किया और आइवरी कोस्ट, नाइजीरिया, लाइबेरिया, इराक और ईरान आदि देशा के खतरनाक इलाकों में दूर-दूर जाकर सेवा की.
इरान-इराक सीमा व हैती में किया है काम
भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट रहे ग्रुप कैप्टन तरुण कुमार सिन्हा अभिनंदन के परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं. उन्होंने कहा कि डॉ शोभा ने ईरान-इराक सीमा पर एमएसएफ के मेडिकल डायरेक्टर के रूप में भी काम किया और 2010 के विनाशकारी भूकंप के बाद हैती में स्वास्थ्य सेवाएं देने में भी वह शामिल थीं.
ऑपरेशन स्माइल में बच्चों के लिए दीं सेवाएं
एमएसएफ के अलावा उन्होंने ऑपरेशन स्माइल के लिए भी स्वेच्छा से काम किया है. ऑपरेशन स्माइल वह संस्था है, जिसमें बच्चों के कटे ओंठ और तालू की फ्री में सर्जरी की जाती है. इतना ही नहीं, डॉ शोभा ने बाल यौन शोषण के दोषियों की सजा बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से ऑनलाइन अभियान भी चलाया था.
परिवार का दायित्व निभाने के साथ ही की मानवता की सेवा
देश सेवा और बहादुरी में अभिनंदन की मां डाॅ शोभा वर्दमान का भी कुछ कम योगदान नहीं है. अपने परिवार और बच्चों के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने के साथ ही उन्होंने मानवता की सेवा में भी अपना पूरा जीवन लगा दिया. वह दुनियाभर में मुफ्त में चिकित्सा सेवाएं देने वाले स्वयंसेवकों में शामिल रही हैं.
मद्रास मेडिकल कॉलेज से स्नातक की डिग्री लेने के बाद डाॅ शोभा ने रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ इंग्लैंड से स्नातकोतर की उपाधि ली. इसके बाद वह युद्धरत देशों में हजारों माताओं को प्रसव के बाद होने वाली दिक्कतों से उबारने में मदद करती रही हैं. अपनी जान जोखिम में डाल कर अपने देश और मानवता की सेवा को तत्पर एक मां के बेटे का जिगर ही ऐसा हो सकता है.
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