सोनम कपूर और राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ इसी साल रिलीज हुई थी. इस फिल्म में एक ऐसे मुद्दे को उठाया गया जिसके बारे में लोग बात करना नहीं चाहते. फिल्म में सोनम ने एक पंजाबी लड़की का किरदार निभाया था जो एक लड़की से प्यार करती है. फिल्म में समलैंगिक रिश्तों की उस सच्चाई से अवगत कराया गया था जिसे कानून ने मान्यता तो दे दी है मगर समाज अभी भी हेय दृष्टि से देखता है. इस फिल्म की कहानी को गजल धालीवाल ने लिखी थी.
बॉलीवुड की किसी फिल्म में पहली बार LGBTQ के प्यार की कहानी को दिखाया गया. गजल ने ‘लिपस्टिक अंडर माइ बुर्का’ के डायलॉग भी लिखे हैं. वे खुद भी एक ट्रांसवूमेन हैं. उनका कहना है कि वह कम्यूनिटी का प्रतिनिधित्व और सपने देखने वाले कई लोगों को प्रेरित करती हैं. वे अपने जेंडर पहचान को लेकर संतुष्ट हैं.
गजली धालीवाल बताती हैं कि जब इस साल उनकी फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ रिलीज हुई उन्हें भारत और पाकिस्तान की कई समलैंगिक महिलाओं के मैसेज आये. उन्होंने कहा,’ कई लोगों ने अपने माता-पिता के साथ इस फिल्म को देखा, इसके बाद वे अपनी बेटियों के बारे में बात करने के लिए खुलकर सामने आये.’
गजल धालीवाल के अलावा बॉलीवुड की कई ऐसी फीमेल राइटर्स हैं जिन्होंने पर्दे पर अभिनेत्रि यों को एक अलग ही अंदाज में पेश किया. कईयों ने अपनी कहानी की बदौलत समाज में बदलाव लाने की कोशिश की. वे उन विषयों को समाज में लेकर आई जिसके बारे में लोग बात करने से कतराते हैं.
पिछले कुछ सालों में, बॉलीवुड में कई सफल फीमेल राइटर्स उभरी हैं. जिनमें जूही चतुर्वेदी (अक्टूबर और पीकू), कनिका ढिल्लन (मनमर्जियां), गजल धालीवाल (एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा), निधि मेहरा और मेहूल सूरी (वीरे दी वेडिंग), जीनत लखानी (हिंदी मीडियम), भवानी अय्यर (राजी की को-राइटर) और पूजा ढाला सूरती (अंधाधुन) शामिल हैं. TOI के अनुसार, इन फिल्म के जरिये फीमेल राइटर्स ने बताया कि उनकी कहानी बतायी जाने योग्य है.’
फीमले रायटर्स की इन फिल्मों ने एक नया ट्रेंड स्थापित किया है. आज की फिल्मों में स्टार्स वैल्यू तभी मायने रखती हैं जब फिल्म की कहानी से लेकर निर्देशन तक सब सटीक हो. ‘वीरें दी वेडिंग’ फिल्म लड़कों की दोस्ती पर तो कई फिल्में बनती है लेकिन यह फिल्म चार महिला मित्रों की कहानी थी. सभी हर मुसीबत में एकदूसरे का साथ देती हैं. ये लड़कियां बोल्ड भाषा बोलती हैं, शराब पीती हैं, नाइट क्लब में भी जाती हैं लेकिन किसी का दिल नहीं दुखाना चाहतीं.
‘हिंदी मीडियम’ में कॉमेडी को राह को पकड़कर एक गंभीर बात कही गयी थी. इरफान खान और सबा कमर स्टारर इस फिल्म में समाज में मौजूद ऊंच-नीच, अंग्रेजी के प्रति समाज की आसक्ति, दो भाषाओं के बीच की पनपी खाई और स्कूलों के बोझ तले दब रहे बच्चों और अभिभावकों की मनोभावना को दिखाती है.