Infrastructure की कमी से Digitisation को अपनाने में भारतीय कंपनियां पीछे, जानिये क्यों?

सिंगापुर : विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से भारतीय कंपनियां डिजिटलीकरण को अपनाने में पीछे हैं. यह स्थिति तब है, जब ज्यादातर प्रौद्योगिकी नवोन्मेषण और समाधान भारत में विकसित किये जा रहे हैं. एसपी जैन स्कूल ऑफ ग्लोबल मैनेजमेंट में लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के प्रोफेसर और ग्लोबल […]
सिंगापुर : विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से भारतीय कंपनियां डिजिटलीकरण को अपनाने में पीछे हैं. यह स्थिति तब है, जब ज्यादातर प्रौद्योगिकी नवोन्मेषण और समाधान भारत में विकसित किये जा रहे हैं. एसपी जैन स्कूल ऑफ ग्लोबल मैनेजमेंट में लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति शृंखला प्रबंधन के प्रोफेसर और ग्लोबल एमबीए के प्रमुख डॉ राजीव असेरकर ने कहा कि लगभग सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भारत में प्रौद्योगिकी लैब स्थापित की हैं. यह कुछ ऐसी स्थिति है कि प्रौद्योगिकी समाधान का विकास भारत में हो रहा है, जब इनका इस्तेमाल दुनिया में अन्य देशों के लोग कर रहे हैं.
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वैश्विक प्रबंधन सलाहकार कंपनी एक्सेंचर के प्रबंध निदेशक साइरिल वित्जास ने कहा कि भारत में बदलाव लाने वाली प्रौद्योगिकियों के प्रबंधन को लेकर बेहतर स्थिति में है. भारत के पास युवा प्रतिभाएं हैं, जो नवोन्मेषण और स्टार्टअप्स के जरिये नये विचारों को आगे बढ़ा रही हैं. एक्सेंचर स्ट्रैटेजी का बेंगलुरु में विशिष्टता केंद्र है.
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विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर नवोन्मेषण और समाधान भारत में बनी प्रयोगशालाओं से आ रहे हैं. ऐसे में भारतीय कंपनियां डिजिटल प्रौद्योगिकी को तेजी से कम लागत में अपनाने को लेकर लाभ की स्थिति में हैं. असेरकर कहते हैं कि अभी तक भारतीय कंपनियां ढांचे की कमी की वजह से डिजिटलीकरण को अपनाने में पीछे हैं.
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