हिंद महासागर में दूसरे देश भी रखते हैं दावेदारी :मोदी

Published at :12 Mar 2015 8:11 PM (IST)
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हिंद महासागर में दूसरे देश भी रखते हैं दावेदारी :मोदी

पोर्ट लुई: चीन द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढाने का प्रयास करने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि दुनिया में दूसरे देश भी हैं जो इस क्षेत्र में तगडी दिलचस्पी और दावेदारी रखते हैं.मोदी ने समुद्री मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के सम्मान की भी पुरजोर वकालत […]

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पोर्ट लुई: चीन द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढाने का प्रयास करने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि दुनिया में दूसरे देश भी हैं जो इस क्षेत्र में तगडी दिलचस्पी और दावेदारी रखते हैं.मोदी ने समुद्री मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के सम्मान की भी पुरजोर वकालत की. उनके ये बयान चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर के विवादित जलक्षेत्र में प्रभाव बढाने के प्रयास की पृष्ठभूमि में आये हैं.

मोदी मेजबान प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ की मौजूदगी में मॉरीशस के लिए भारत निर्मित तटीय गश्ती जहाज के जलावतरण के बाद एक समारोह को संबोधित कर रहे थे.

हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग की जरुरत बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की हिंद महासागर के क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाने की प्रमुख जिम्मेदारी है.

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम मानते हैं कि दुनिया में अन्य देश भी हैं जो क्षेत्र में मजबूत दिलचस्पी और दावेदारी रखते हैं.’’ मोदी ने कहा, ‘‘हम हिंद महासागर के ऐसे भविष्य का आह्वान करते हैं जो ‘सागर’- :सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन: यानी :क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास: के नाम को साकार करे.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया अकसर एक बडे क्षेत्र के आसपास के देशों का क्षेत्रीय समूह परिभाषित करती है. इस लिहाज से हिंद महासागर के आसपास के देशों का एक विशेष समूह बनाने का समय आ गया है.उन्होंने कहा, ‘‘हम आने वाले सालों में नये जोश के साथ इस दिशा में काम करेंगे.’’

मोदी ने यह भी कहा कि हिंद महासागर क्षेत्रीय संघ (आईओआरए) की मेजबानी के लिए मॉरीशस से बेहतर जगह हो नहीं सकती.उन्होंने कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि आईओआरए के महासचिव भारत से हैं. फिलहाल राजदूत के वी भागीरथ महासचिव हैं.प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ संवाद, यात्राओं, अभ्यास, क्षमता निर्माण तथा आर्थिक साझेदारी के माध्यम से गहरी साझेदारी रखता है.

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद महासागर क्षेत्र हमारी नीति की प्राथमिकताओं में सबसे उपर है.’’ मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य विश्वास और पारदर्शिता तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के लिए सम्मान का माहौल बनाना है.

भारत ने हमेशा से कहा है कि गहरे समुद्रों में नौवहन की आजादी होनी चाहिए और दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद को बातचीत के जरिये सुलझाया जाना चाहिए.दक्षिण चीन सागर के क्षेत्रीय विवादों में चीन, वियतनाम और फिलीपीन समेत क्षेत्र के अनेक देशों के बीच द्वीप से जुडे तथा समुद्र से जुडे दोनों तरह के दावे शामिल हैं.

भारत को वैश्विक रुप से और अधिक एकीकृत बताते हुए मोदी ने कहा कि यह पहले से ज्यादा हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्र पर निर्भर करेगा.उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसके भविष्य को साकार करने के लिए अपनी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए। इसलिए, हिंद महासागर क्षेत्र हमारी नीति की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है.’’

मोदी ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत का दृष्टिकोण हमारे क्षेत्र में सहयोग बढाने पर तथा हमारे साझा समुद्री क्षेत्र में सभी के लाभ के लिए इसकी क्षमताओं का इस्तेमाल करने पर आधारित है.इस संदर्भ में मोदी ने कहा कि भारत अपने मुख्य भूभाग और द्वीपीय क्षेत्र की सुरक्षा के लिए और इसके हितों के संरक्षण के लिए सबकुछ करेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘हम समान रुप से एक सुरक्षित और स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भी काम करेंगे जो हमें समृद्धि के सभी किनारों तक पहुंचाये.’’ मोदी ने कहा कि भारत ने मालदीव और श्रीलंका के साथ समुद्री सुरक्षा सहयोग शुरु कर दिया है और उम्मीद है कि मॉरीशस, सेशेल्स तथा क्षेत्र के अन्य देश इस पहल में शामिल होंगे.

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